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  • 12-Feb-2024
  • By Tej Hospital Solution

सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीने के फायदे

अक्सर लोग सुबह की शुरुआत चाय या काफी से करना पसंद करते हैं। लकिन खाली  पेट चाय का सेवन करने से कई तरह की पाचन समस्याएं हो सकती हैं। आप इसकी जगह गुनगुना पानी पी सकते हैं। यह पाचन के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। इसके साथ ही सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीने से कई तरह के स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं। अगर आप शरीर की कई बिमारियों से बचना चाहते हैं तो सुबह गुनगुने पानी का सेवन जरूर करें। आइए जानते हैं सुबह खाली पेट गुनगुना पानी क्यों पीना चाहिए?

सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीने के फायदे (Benefits Of Drinking Lukewarm Water On An Empty Stomach In The Morning)

1. कब्ज से राहत दिलाता है:

खाली पेट गुनगुना पानी पीने से कब्ज में राहत मिलती है। गर्म पानी शरीर से वेस्ट प्रोडक्ट को डिटॉक्स करने में मदद करता है। इससे कब्ज में बिना किसी परेशानी के मल त्याग किया जा सकता है। जिन लोगो को अक्सर गैस, एसिडिटी जैसी बीमारी रहती है, उनके लिए सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीना फायदेमंद होता है। इसके सेवन से आंतों को संकुचन में मदद मिलती है। इससे आंतों में अटका मल बाहर आ जाता है और कब्ज से राहत मिलती है।

2. शरीर को डिटॉक्स करता है: 

सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीने से शरीर डिटॉक्स होता है। गुनगुना पानी पीने से शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकल जाते हैं। इससे आंत में मौजूद भोजन जल्दी ब्रेकडाउन हो जाता है और पाचन अच्छा रहता है। रोजाना सुबह खाली पेट एक गिलास गुनगुना पानी पीने से मेटाबॉलिज्म तेजी से होता है और डाइजेशन को बेहतर बनाए रखने में भी मदद मिलती है। अगर आप रोजाना गुनगुने पानी में नींबू की 2-3 बूंदे डालकर पीते हैं, तो इससे आपके शरीर में मौजूद टॉक्सिक पदार्थ बाहर निकल जाते हैं।

3. वजन कम करने में सहायक:

रोज सुबह या फिर पूरे दिन गर्म पानी पीने से वजन घटाने की प्रक्रिया में तेजी आती है। गर्म पानी शरीर में जमे फैट को काटकर निकाल देता है। इसके अलावा, भूख को भी कम कर देता है। अगर आपका वजन तेजी से बढ़ रहा है तो रोजाना नींबू के पानी में जीरा डालकर पियें। इससे आपको जल्दी वजन घटाने में मदद मिलेगी। 

4. पाचन बेहतर बनाता है:

सुबह खाली पेट गर्म पानी पीने से पाचन शक्ति बढ़ती है। यदि आप पाचन संबंधी समस्याओं से परेशान हैं तो रोजाना सुबह गुनगुना पानी पियें। सुबह खाली पेट और रात को खाना खाने के कुछ देर बाद गर्म पानी पीने से पेट से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं।

5. रक्त संचार में सुधार करता है: 

गुनगुना पानी पीने से रक्त संचार में सुधार होता है। गर्म पानी पीने से शरीर गर्म रहता है और रक्त प्रवाह में सुधार होता है। गुनगुना पानी हमारे शरीर में जमने वाले फैट को बाहर निकाल देता है, जिससे आप तनावमुक्त महसूस करते हैं। गर्म पानी पीने से इम्यून सिस्टम भी अच्छा रहता है। 

6. त्वचा के लिए फायदेमंद:

यह त्वचा में रक्त के प्रवाह को बढ़ाता है। इससे त्वचा का स्वास्थ्य बेहतर होता है और उम्र बढ़ने के लक्षण कम होते हैं। यह त्वचा को हाइड्रेट करता है और शुष्कता को रोकता है। इससे त्वचा में एक स्वस्थ चमक आती है। यह चेहरे को शाइनी बनाता है। और रोम छिद्रों को खोलता है, जिससे त्वचा से टॉक्सिन और गंदगी निकल जाती है। 

7. शरीर हाइड्रेट रहता है:

हमारा शरीर ठंडे पानी की तुलना में गर्म पानी को जल्दी Absorb कर लेता है। इसी कारण ठंडे पानी की तुलना में गर्म पानी शरीर को ज्यादा हाइड्रेट रखता है। 

8.  गले की खराश:

ठंड के मौसम में सर्दी की वजह से खांसी होना आम बात है लेकिन, खांसने से कई बार गला छिल जाता है। जिससे गले में सूजन, खराश जैसी परेशानी होती है। हल्का गुनगुना पानी पीने से गले की खराश ठीक होती है। 

यदि आप इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहते हैं, तो शुरूआत में धीरे-धीरे शुरू करें और ध्यान दें कि पानी का तापमान अधिक न हो, ताकि आपका शरीर इसे सहजता से स्वीकार कर सके।

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  • 11-Feb-2024
  • By Tej Hospital Solution

पेट में जलन के कारण और घरेलू उपाय

पेट में जलन अनेक कारणों से हो सकती है और एसिडिटी इसका एक सामान्य लक्षण है। एसिडिटी के दौरान, पेट में मौजूद अत्यधिक मात्रा में अम्ल उत्पन्न होता है जो जलन का कारण बनता है। यह पेट के ऊपरी हिस्से में होता है जहां एसिडिटी उत्पन्न होती है। इसलिए, पेट में जलन का कारण अधिकतर एसिडिटी होती है।

पेट में जलन के कारण: (Causes of Stomach Irritation)

पेट में जलन के कई कारण हो सकते हैं:

  • अत्यधिक तीखे और मसालेदार भोजन खाने से 
  • पेट में अधिक अम्ल के उत्पादन से एसिडिटी होना 
  • पेट में गैस बनने के कारण 
  • जीभ के संक्रमण के कारण 
  • खराब खान-पान की आदतें
  • पेट में अल्सर होना
  • गैस्ट्रो-ओइसोफेजियल रिफ्लक्स रोग (यह एक आम पेट की समस्या है, जिससे पेट में जलन का अनुभव होता है।)
  • अत्यधिक अल्कोहल या धूम्रपान का सेवन करना
  • कुछ दवाओं के सेवन से  

पेट की जलन का घरेलू इलाज: (Home Remedies for Stomach Burning)

1. जीरा पानी:

जीरा पानी, पेट की जलन को शांत करने में फायदेमंद होता है। जीरे में मौजूद फाइबर और मिनरल्स, एसिडिटी और इसके लक्षणों को कम करने और रोकने में असरदार होते हैं।  जीरा, पेट से जुड़ी परेशानियों को दूर करता है और आंतों को साफ करने में भी फायदेमंद है। यह पाचन क्रिया को भी तेज करता हैं। इसका इस्तेमाल करने के  लिए जीरे को 10 से 15 मिनट पानी में उबालें और छानकर ठंडा होने के बाद पी लें। 

2. गुड़:

गुड़ में आयरन, क्लोरीन, के साथ कई तरह के विटामिंस और मिनरल्स भी पाए जाते हैं, जो पाचन को सुधारने में मदद करते हैं। जिससे पेट में जलन, गैस और दर्द जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। इस उपाय को करते समय गुड़ को चबाकर न खाएं बल्कि इसे टॉफी की तरह चूसते रहें।

3. नमकीन पानी:

पेट में जलन होने पर नमकीन पानी पीने से एसिडिटी से तुरंत राहत मिलती है। जब भी पेट में जलन होने लगे तो एक गिलास पानी में थोड़ा सा नमक डालकर अच्छे से घोल लें, फिर इसे धीरे-धीरे पीएं। इसे पेट में जलन के लिए काफी असरदार माना जाता है। 

4. सौंफ:

यह पाचन तंत्र सहित कई बीमारियों को दूर करता है। साथ ही पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। पेट में जलन होने पर, सौंफ के कुछ दानों को पानी में उबालकर इसे छान लें और ठंडा होने पर इसे पी लें। यह एसिडिटी में तुरंत राहत प्रदान करता है। सौंफ के कुछ दानों को चबाकर चूसने से भी एसिडिटी से राहत मिलती है। 

5. नारियल पानी:

नारियल पानी में फाइबर की भरपूर मात्रा होती है। यह पाचन तंत्र को शांत करने में मदद करता है। साथ ही, यह पेट को अतिरिक्त एसिड उत्पादन के प्रभाव से बचाता है।नारियल पानी पेट में होने वाली जलन को कम करके ठंडक भी पहुंचाता है। रोजाना नारियल पानी पीना सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है।

6. दही:

रोजाना खाना खाने के बाद एक कप दही या लस्सी का सेवन करें, इनका सेवन एसिडिटी की जलन और पेट से जुड़ी सभी समस्याओं में राहत दिलाता है। सुबह के समय दही खाने से पेट को हेल्दी बैक्टीरिया मिलते हैं। यह प्रोबायोटिक फूड डायजेशन सही रखता है और पेट में गैस-एसिडिटी और जलन जैसी दिक्कत नहीं होने देता। 

7. केला खाएं:

फाइबर से भरपूर केला, पेट को बैक्टीरिया मुक्त रखता है। यह जी मिचलाने और एसिडिटी की समस्या से भी छुटकारा दिलाता है। इसके सेवन से सीने में जलन की समस्या भी नहीं होती है। रोजाना केले खाने से गैस की समस्या से भी छुटकारा मिलता है।  

8. सेब का सिरका:

सेब का सिरका पेट की जलन को शांत करने में मदद कर सकता है। सेब के सिरके में पोटैशियम होता है, जो पैरों के दर्द और तनाव को कम करने में मदद करता है। इसके लिए सुबह गुनगुने पानी में दो चम्मच सेब का सिरका मिलाकर पीएं। इसमें दो चम्मच शहद मिलाने से इसका खट्टा स्वाद कम हो जाता है। 

9. इलायची : 

इलायची में फाइबर होता है, जो मेटाबॉलिज्म को बढ़ाकर पाचन को बेहतर बनाता है। इलायची में मौजूद बायोएक्टिव तत्व पाचन तंत्र को स्वस्थ रखते हैं। इलायची की तासीर ठंडी होती है, इसलिए यह पेट की गर्मी को शांत करती है। इलायची खाने से पेट की जलन कम होती है, जिससे एसिडिटी और अपच जैसी समस्याओं से आराम मिलता है। 

अगर यह समस्या आपको बार-बार हो रही है या लंबे समय तक बनी रहती है, तो डॉक्टर से परामर्श करना आवश्यक है।

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  • 08-Feb-2024
  • By Tej Hospital Solution

रोजाना तुलसी का पानी पीने के फायदे

देशभर में तुलसी को माँ के सामान माना जाता है और तुलसी की पूजा भी की जाती है। धार्मिक महत्व के साथ-साथ तुलसी हमारे स्वास्थ्य के लिए भी काफी फायदेमंद होती है। यहां तक की कई प्रकार की दवाइयां और जड़ी बूटियां तुलसी को मिलाकर बनाई जाती हैं। सर्दी-जुखाम हो या ब्लड शुगर जैसी बीमारियां सभी में  तुलसी एक असरदार घरेलू इलाज की तरह काम करती है। तुलसी के पानी को खाली पेट पीने से कई तरह के लाभ मिलते हैं। इससे कई तरह की बीमारियां दूर रहती हैं। तुलसी का पानी पीने से शारीरिक से लेकर मानसिक कई तरह के लाभ मिलते हैं। आइए तुलसी का पानी पीने के फायदों के बारे में जानते हैं। 

तुलसी का पानी पीने के फायदे: (Benefits Of Drinking Basil Water)

1. इम्यूनिटी बूस्ट करें: 

तुलसी में विटामिन सी और जिंक भरपूर मात्रा में होता है। इसमें एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-वायरल, और एंटी-फंगल गुण होते हैं।  तुलसी के पत्तों में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स गुण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं। तुलसी के पानी का नियमित सेवन आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में मदद कर सकता है, जिससे आप विभिन्न संक्रमणों और बीमारियों के प्रति बच सकते हैं।

2. पाचन में सहायक:

तुलसी के पत्ते एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं। ये पाचन अंगों की कार्यप्रणाली में सुधार करते हैं। सुबह खाली पेट तुलसी का पानी पीने से पाचन तंत्र शांत होता है और पाचन बेहतर होता है। इससे विषाक्त पदार्थ और कीटाणु शरीर से बाहर निकल जाते हैं। तुलसी का पानी पीने से पाचन तंत्र मजबूत होता है। इससे कब्ज और लूज मोशन की समस्या से छुटकारा मिलता है। 

3. तनाव से राहत: 

तुलसी में ओसिमुमोसाइड्स ए और बी यौगिक होते हैं। ये यौगिक तनाव को कम करते हैं और मस्तिष्क में न्यूरोट्रांसमीटर सेरोटोनिन और डोपामाइन को संतुलित करते हैं। तुलसी के सूजन रोधी गुण सूजन और रक्तचाप को कम करने में मदद करते हैं। तुलसी में एंटीऑक्सीडेंट कंपाउंड जैसे फ्लेवोनॉयड, पॉलीफेनोल पाए जाते हैं, जिससे तनाव कम होता है। साथ ही इसमें कोर्टिसोल हार्मोन भी पाए जाते हैं, जिससे डिप्रेशन की समस्या से राहत पायी जा सकती हैं। 

4. सर्दी जुकाम दूर करें:

तुलसी का पानी पीने से श्वसन संबंधी समस्याओं से राहत मिल सकती है। तुलसी में कफनाशक और एंटीट्यूसिव गुण होते हैं। ये गुण कफ, जलन, और सर्दी के लक्षणों को जड़ से खत्म करने में मदद करते हैं। तुलसी की पत्तियों में विटामिन और कई अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसमें मौजूद एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टीज सर्दी-खांसी, कब्ज, अपच, आदि समस्याओं में फायदेमंद हैं। 

5. श्वसन प्रणाली को बेहतर बनाएं:

तुलसी में एंटी-इन्फ्लेमेटरी, एंटीबैक्टीरियल, और एंटीवायरल गुण होते हैं जो श्वसन संबंधी समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। यह श्वसन प्रणाली को साफ और स्वस्थ रखने में मदद करता है और फेफड़ों के संक्रमण को कम करने में भी सहायक होता है। तुलसी का पानी श्वसन प्रणाली की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर उसे मजबूत बनाता है।

6. ब्लड - शुगर लेवल कंट्रोल करता है:

तुलसी में कई तरह के औषधीय गुण होते हैं। तुलसी की पत्तियों का सेवन ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करता है। अगर आपका ब्लड शुगर बढ़ा हुआ है, तो आपको तुलसी की पत्तियों को उबालकर पानी में छानकर उसका सेवन करना चाहिए। तुलसी के पत्तों की चूर्ण युक्त कैप्सूल खाने से भी शुगर लेवल कम होता है।

7. ह्रदय के स्वास्थ्य को सुधारें:

तुलसी की पत्तियों को ह्रदय के स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। यह रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने में सहायक है। यह कोलेस्ट्रॉल को कम करने, धमनियों में प्लाक के निर्माण को रोकने और स्वस्थ रक्त परिसंचरण को बनाए रखने में मदद करता है, जिससे हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा कम होता है।

8. त्वचा के लिए फायदेमंद:

तुलसी में एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल, और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं। तुलसी के पानी का इस्तेमाल करने से त्वचा को इंफेक्शन से बचाया जा सकता है और मुंहासों की समस्या कम हो सकती है। तुलसी का पानी त्वचा में सूजन को कम करने में भी मदद करता है। तुलसी के रस में विटामिन सी होता है, जो त्वचा के रंग में निखार लाता है।  इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन सी चेहरे के काले दाग-धब्बों को मिटाने में मदद करते हैं। साथ ही हाइपरपिग्मेंटेशन को भी कम करने में मदद करता है।

तुलसी का पानी कैसे बनाएं: (How To Make Basil water)

तुलसी का पानी बनाने का तरीका:

  • किसी बर्तन में एक या दो गिलास पानी डालकर उबलने दें। 
  • इसमें कुछ तुलसी के पत्ते डालें। 
  • पानी को तब तक उबलने दें जब तक पानी आधा न हो जाए। 
  • गैस बंद करके इसे अच्छी तरह छान लें। 
  • अब इसमें शहद डालकर इसका सेवन करें। 

तुलसी के पानी को गुनगुना ही पिएं। 

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  • 07-Feb-2024
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डायबिटीज को कंट्रोल करने के घरेलू उपचार

डायबिटीज जिसे शुगर की बीमारी या मधुमेह भी कहा जाता है। इन दिनों डायबिटीज की समस्या आम होते जा रही है। इसका मुख्य कारण गलत लाइफस्टाइल और खान - पान है। इसे कंट्रोल करने के लिए अपनी डाइट पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है। अगर समय रहते डायबिटीज कंट्रोल न किया गया तो यह जानलेवा भी हो सकता है। अगर आप चाहते हैं, डायबिटीज आपके शरीर को ज्यादा नुकसान न पहुंचाए तो आप कुछ घरेलू नुस्खे आजमा सकते हैं। ये डाइबिटीज से आपका ख्याल रखते हैं और उसे जड़ से समाप्त करने में भी मदद कर सकते हैं। 

डायबिटीज को कंट्रोल करने के घरेलू उपचार (Home Remedies To Control Diabetes)

यहां कुछ घरेलू उपचार दिए गए हैं जो शुगर को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं:

1. नीम के पत्ते:

नीम की पत्तियों में तिक्त और कषाय रस होता है। ये रस शरीर में पहुंचकर ब्लड शुगर को कम करते हैं। नीम की पत्तियों में कई फ्लेवोनोइड्स समेत कई अन्य तत्व भी होते हैं, जो पैंक्रियाज को स्टिम्युलेट करते हैं। इससे ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद मिलती है। डायबिटीज के मरीजों को नीम के पत्तों का सेवन करना चाहिए। रोजाना नीम के 5-6 पत्ते चबाने से ब्लड शुगर कंट्रोल में रहता है। नीम की पत्तियों का सेवन सुबह खाली पेट करना चाहिए। इससे शुगर लेवल को कंट्रोल में रखा जा सकता है। साथ ही, स्किन से जुड़ी समस्याएं भी नहीं होंगी। 

2. मेथी:

मेथी में एंटी-डायबिटिक गुण होते हैं। इसमें मौजूद फाइबर पाचन को धीमा करता है और ग्लूकोज के अवशोषण को कम करता है। इससे ब्लड शुगर लेवल अचानक नहीं बढ़ता और ब्लड ग्लूकोज लेवल्स नियंत्रित रहते हैं। मेथी का सेवन 4 से 6 महीने तक लगातार करने से ब्लड शुगर का लेवल कम किया जा सकता है। मेथी का पानी पीने से शरीर में मौजूद खराब कोलेस्ट्रॉल बाहर निकल जाता है और अच्छा कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है। इसके लिए , एक छोटा चम्मच मेथी के दानों को रात में एक गिलास  पीने के पानी में भिगो दे। सुबह उसके पानी को छानकर इसमें गुनगुना पानी मिला लें। इसे खाली पेट पी सकते हैं और दानों को चबाकर खा भी सकते हैं। 

3. दालचीनी: 

दालचीनी, शुगर कंट्रोल करने में मदद करती है। दालचीनी में एंटीबायोटिक, एंटी-इंफ्लेमेटरी, और एंटी-ऑक्सीडेंट गुण होते हैं। दालचीनी की चाय पीने से ब्लड ग्लूकोज लेवल कम करने में मदद मिलती है। साथ ही, दालचीनी की चाय पाचन के लिए भी फायदेमंद है। दालचीनी, कोशिकाओं में शर्करा की गति को बढ़ाकर रक्त शर्करा को कम करने और मधुमेह से लड़ने में मदद करती है। दालचीनी का सेवन करने का सबसे अच्छा तरीका है कि इसे पानी के साथ मिलाकर पिया जाए। इसके लिए एक गिलास पानी में दालचीनी का छोटा सा टुकड़ा या दालचीनी की छाल भिगो दें। इसे रात भर के लिए छोड़ दें और सुबह इसे छानकर खाली पेट  पी लें। 

4. करेले का जूस:

करेले में एंटी डायबिटिक्स गुण होते हैं। इसमें मौजूद चरनटीन से खून में ग्लूकोज का लेवल कम होता है। करेले में पॉलीपेप्टाइड-पी या पी-इंसुलिन भी पाया जाता है, जो प्राकृतिक तरीके से डायबिटीज को कंट्रोल करता है। करेले का जूस पीने से रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। करेले के जूस में कैलोरी कम और फाइबर अधिक होता है, जो वजन घटाने वाला आहार माना जाता है। यह शरीर का मेटाबॉलिज़्म बढ़ाता है। सुबह खाली पेट करेले का रस पीने से रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। 

5. जामुन:

डायबिटीज के मरीजों के लिए जामुन फायदेमंद होता है। जामुन के रस में एंटी-डायबिटिक गुण होते हैं। इसमें मौजूद एसिड यौगिक भोजन को स्टार्च में बदलने की गति को धीमा कर देते हैं, जिससे मधुमेह का स्तर नियंत्रित रहता है। जामुन की गुठलियों का चूर्ण बनाकर खाना चाहिए। आप जामुन की गुठली के चूर्ण का उपयोग रोज सुबह खाली पेट कर सकते हैं। इसके लिए आप एक गिलास पानी में एक चम्मच गुठली का चूर्ण मिक्स करके सेवन कर सकते हैं।  ऐसा करने से आपका ब्लड शुगर नियंत्रण में रहेगा। या जामुन के पत्तों को अगर आप सुबह खाली पेट चबाएं तो इससे आपके खराब ब्लड शुगर लेवल को ठीक करने में सहायता मिलेगी।  

6. अदरक:

अदरक के नियमित सेवन से ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है। अदरक का सेवन वजन कम करने में मदद कर सकता है क्योंकि यह पाचन क्रिया के साथ साथ मेटाबोलिज्म को भी बढ़ाता है। इसके लिए, रात को सोने से पहले दूध में अदरक मिलाकर पीना चाहिए। या अदरक का काढ़ा बनाकर पिएं। इसके लिए, एक गिलास पानी में अदरक और दो काली मिर्च डालकर पकाएं। और इसका सेवन करें। या आप अदरक की चाय बनाकर भी पी सकते हैं। 

7. तुलसी की पत्तियाँ:

तुलसी में कई तरह के औषधीय गुण होते हैं। तुलसी की पत्तियों का सेवन ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करता है। अगर आपका ब्लड शुगर बढ़ा हुआ है, तो आपको तुलसी की पत्तियों को उबालकर पानी में छानकर उसका सेवन करना चाहिए। तुलसी के पत्तों की चूर्ण युक्त कैप्सूल खाने से भी शुगर लेवल कम होता है।

8.  नियमित व्यायाम: 

शारीरिक गतिविधि इंसुलिन संवेदनशीलता को बढ़ाकर रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करती है। प्रतिदिन कम से कम 15 से 20 मिनट की मध्यम-तीव्रता वाले व्यायाम या शारीरिक गतिविधियाँ जैसे : Walking, Swimming और Cycling आदि करने का लक्ष्य रखें।

याद रखें, किसी भी नए घरेलू उपचार को आजमाने से पहले अपने स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से परामर्श करें। खासकर यदि आप पहले से ही मधुमेह के लिए दवा ले रहे हैं। इन उपचारों की प्रभावशीलता अलग-अलग व्यक्तियों में अलग-अलग हो सकती है, और आपका डॉक्टर आपकी व्यक्तिगत आवश्यकताओं के लिए सर्वोत्तम दृष्टिकोण निर्धारित करने में आपकी सहायता कर सकता है।

डायबिटीज के मरीजों को क्या खाना चाहिए ? (What Should Diabetic Patients Eat?)

  • डायबिटीज के मरीजों को अपनी डाइट में चीजें जौ, दलिया, चावल, गेहूं, सूजी, अरहर की दाल, काबुली चने, हरे चने, कुलथी की दाल, हरी पत्तेदार सब्जियां  आदि चीजें शामिल करनी चाहिए।
  • डायबिटीज के मरीजों को सुबह खाली पेट भीगे बादाम, अखरोट, और मूंगफली खानी चाहिए।  इससे ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है।
  • डायबिटीज के मरीजों को खाली पेट घी और हल्दी को एक साथ रोटी पर लगाकर खाने से शुगर क्रेविंग कम होती है। 

डायबिटीज के मरीजों को आइसक्रीम, आलू, फ्राइड फूड, पैक्ड जूस, मैदा या रिफाइंड आटा आदि चीजों  का सेवन नहीं करना चाहिए। 

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  • 06-Feb-2024
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फाइलेरिया क्या है? - लक्षण, कारण और उपचार

फाइलेरिया क्या है? (What Is Filariasis?)

फाइलेरिया, एक संक्रामक रोग है जो कि निमेटोड परजीवियों (Wuchereria bancrofti) की वजह से होता है। फाइलेरिया काली मक्खियों और मच्छरों द्वारा फैलने वाला एक परजीवी रोग है। ये परजीवी पतले, गोल, कृमि जैसे जीव होते हैं। माइक्रोस्कोप से देखने पर वे सफेद या पारभासी (Translucent) दिखाई देते हैं। फाइलेरिया को आम भाषा में हाथीपांव रोग कहा जाता है। इससे शरीर में सूजन और बुखार हो सकता है। कुछ गंभीर मामलों में ये शरीर की बनावट बदल सकता है जैसे त्वचा का मोटा होना और पैरों में सूजन।

फाइलेरिया के कारण: (Cause of Filariasis)

फाइलेरिया एक परजीवी से होने वाला रोग है। यह धागे की तरह दिखने वाले फाइलेरिओडी नामक निमेटोड के कारण होता है। यह एक संक्रामक उष्णकटिबंधीय रोग है। यह मच्छरों की प्रजाति के एक कीड़े (Filarial Worms) जो कि खून चूसते हैं, की वजह से होता है। इसमें हमारा लसीका तंत्र या लिंफेटिक सिस्टम (Lymphatic System) संक्रमित हो जाता है। लसीका तंत्र शरीर में Fluid यानी द्रव पदार्थ के स्तर को संतुलित करता है और आपके शरीर को संक्रमण से बचाने में मदद करता है। पर जब ये कीड़ा आपको काट लेता है तो लसीका तंत्र असंतुलित हो जाता है और इसकी वजह से शरीर में सूजन आ जाती है।

फाइलेरिया के लक्षण:(Symptoms of Filaria)

फाइलेरिया के कुछ लक्षण ये हैं:

  • पुरुषों में प्रजनन अंगों के आस-पास दर्द और सूजन
  • हाथ-पैरों में सूजन
  • हाइड्रोसिल की समस्या (पुरुषों में अंडकोष के आस-पास अंडकोश में तरल पदार्थ का जमा होना)
  • विकलांगता
  • मानसिक परेशानी या तनाव होना 
  • लिम्फेडेमा (लसीका तंत्र में तरल पदार्थ का निर्माण होता है और ये सूजन और बुखार पैदा करता है)
  • ज्यादा दिनों तक भुखार रहना या सिर दर्द 

फाइलेरिया का उपचार: (Treatment of Filaria:)

एंटीपैरासिटिक उपचार (Antiparasitic Treatment): निमेटोड कीड़े फाइलेरिया का कारण बनते हैं। ऐसे में इन्हें खत्म करने के लिए एंटी पैरासिटिक उपचार की आवश्यकता होती है। इसमें डॉक्टर द्वारा मरीज को फ्लोरोसिड इंजेक्शन या अन्य दवाइयाँ दी जाती हैं। 

सर्जरी: कुछ मामलों में फाइलेरिया का इलाज सर्जरी से भी किया जा सकता है। अगर समस्या ज्यादा बढ़ गई है और गंभीर रूप ले चुकी है, तो इन मामलों में डॉक्टर सर्जरी कर सकते हैं। सर्जरी से काफी हद तक सुधार हो सकता है, लेकिन सर्जरी के बाद संक्रमण का खतरा भी हो सकता है। इसलिए, बेहतर है कि शुरुआती लक्षणों पर ध्यान देकर डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

फाइलेरिया से कैसे बचें: (How To Avoid Filariasis:)

फाइलेरिया से बचने के लिए, आपको मच्छरों से बचना चाहिए। फाइलेरिया के लिए, मच्छर मुख्य वजह हैं, फाइलेरिया से बचने के लिए, आप ये उपाय अपना सकते हैं:

  • घर के आस-पास सफाई रखें। 
  • घर में कीटनाशक का छिड़काव करें। 
  • घर में कहीं भी पानी जमा न होने दें। 
  • सोते समय अपने हाथों और पैरों पर सरसों या नीम का तेल लगाएं। 

फाइलेरिया होने पर प्रोटीन युक्त संतुलित आहार लें। और जितना हो सके उतना तरल पदार्थ पियें। यदि आपको फाइलेरिया से संबंधित कोई भी लक्षण दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श करें। 


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  • 05-Feb-2024
  • By Tej Hospital Solution

गठिया के दर्द से राहत पाने के लिए कुछ घरेलू उपाय

गठिया की बीमारी ज्यादातर बड़े बुजुर्गों में देखने को मिलती है। लेकिन आजकल कई युवा भी इस बीमारी से परेशान हैं। गठिया होने पर शरीर में सूजन आ जाती है। साथ ही  उठने, बैठने और चलने में भी समस्या का सामना करना पड़ता है। ठंड के मौसम में जोड़ों के दर्द से जूझ रहे लोगों को अधिक सावधानी बरतनी चाहिए। क्योंकि सर्दी में जोड़ों का दर्द ज्‍यादा तकलीफ देने लगता है। सर्दियों में ये समस्‍या इतनी बढ़ जाती है कि लोगों को उठने-बैठने और लेटने में भी दूसरों की सहायता लेना पड़ती है। यहां कुछ घरेलू उपाय दिए गए हैं जो आपके गठिया (Arthritis) के दर्द को कम करने में आपकी मदद कर सकते हैं:

गठिया के दर्द से राहत पाने के कुछ घरेलू उपाय (Some Home Remedies To Get Relief From Arthritis Pain)

यहां कुछ घरेलू उपाय दिए गए हैं जो गठिया के दर्द को कम करने में मदद कर सकते हैं:

1. हॉट और कोल्ड थेरेपी: 

प्रभावित जोड़ों पर गरम या ठंडा लगाना दर्द और सूजन को कम करने में मदद कर सकता है। गरमाई के लिए गर्म पैड, गरम तौलिये या गरम स्नान लें और Cold Therapy के लिए एक तौलिये या किसी कपड़े में लपेटे हुए बर्फ के पैक का उपयोग करें। और इससे प्रभावित क्षेत्र पर सेक करें। इससे दर्द से आराम मिलता है। 

2. हल्दी तेल से मालिश:

लहसुन में पाया जाने वाला डायलिल डाइसल्फाइड एंटी इन्फ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होता है। लहसुन को सरसों के तेल में अच्छे से गर्म करने के बाद उस तेल को अपने जोड़ों पर इस्तेमाल कर सकते हैं। हल्के हाथों से आप उस जगह पर मालिश करें जहां पर आपको सूजन और दर्द महसूस हो रहा है। थोड़े समय में आपको गठिया के दर्द से राहत मिलने शुरू हो जाएगी। 

3. हल्दी का लेप:

हल्दी में करक्यूमिन नामक एक तत्व होता है जो गठिया (Arthritis) के कारण होने वाले दर्द को कम करता है। इसके अलावा इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेट्री गुण सूजन को  कम करने में भी मदद करते हैं। इसके लिए आप हल्दी को नारियल या फिर सरसों के तेल में मिलाकर प्रभावित स्थान पर इसे लेप की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसा करने से आपको दर्द में धीरे-धीरे राहत मिलना शुरू हो जाएगा। 

4. अदरक:

अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो गठिया के कारण होने वाली सूजन को कम करने में मदद करते हैं। हर रोज अदरक का सेवन करने से दर्द और सूजन से राहत मिल सकती है। इसके आलावा अदरक के तेल का उपयोग करना चाहिए। इसके लिए आप जोड़ों पर अदरक के तेल से मालिश करें। या अदरक का पेस्ट भी जोड़ो पर लगा सकते हैं।

5. सरसों के तेल से मालिश: 

सरसों के तेल को गर्म करके नियमित सुबह-शाम मालिश करने से गठिया के दर्द में राहत मिल सकती है। यह मांसपेशियों को आराम दिलाता है और सूजन को कम कर करने में मदद करता है।

6. नमक और गर्म पानी: 

गर्म पानी में नमक मिलाएं। इसे गठिया से प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं। कुछ देर तक इससे सेक करें। यह दर्द को कम करने में मदद कर सकता है। या एक चम्मच नमक गर्म पानी में डालकर नहा लें। ऐसा करने से दर्द खत्म हो जाता है। यह जोड़ों के दर्द, घुटने और कमर दर्द में भी आराम देता है।

7. ताजे फल और सब्जियां: 

विटामिन-C और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर ताजे फल और सब्जियां गठिया के दर्द को कम करने में मदद कर सकते हैं। इसके लिए अपने भोजन में नारंगी, अंगूर, अदरक, टमाटर, गोभी, आम, लहसुन आदि शामिल करें।

8. स्वस्थ वजन बनाए रखें: 

अतिरिक्त वजन जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव डालता है, जिससे गठिया का दर्द बढ़ जाता है। स्वस्थ वजन बनाए रखने के लिए संतुलित आहार और नियमित व्यायाम करना दर्द को कम करने में मदद करता है और जोड़ों की कार्यक्षमता में सुधार कर सकता है।

9. नियमित व्यायाम करें: 

चलना, तैरना, या साइकिलिंग जैसे कम प्रभाव वाले व्यायाम जोड़ों के लचीलेपन को बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैं और कठोरता को कम कर सकते हैं। ध्यान रखें कोई भी एक्टिविटी अपनी क्षमता के अनुसार ही करें। अपने शरीर पर अतिरिक्त बोझ या दबाव न डालें और अपने प्रति सौम्य रहें।

याद रखें कि यदि आपको कोई बाहरी चिकित्सीय स्थिति है या आप दवाएँ ले रहे हैं तो  किसी नए घरेलू उपाय को आजमाने से पहले, एक चिकित्सा पेशेवर से परामर्श करें। वे आपकी व्यक्तिगत आवश्यकताओं और चिकित्सा इतिहास के आधार पर व्यक्तिगत सिफारिशें प्रदान कर सकते हैं।

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