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  • 03-Feb-2024
  • By Tej Hospital Solution

मिर्गी क्या है ? लक्षण, कारण और उपचार

मिर्गी क्या है ? (What Is Epilepsy?)

मिर्गी एक न्यूरोलॉजिकल विकार (Neurological Disorder) है। जो मस्तिष्क की तंत्रिका कोशिका की गतिविधि को बाधित करता है। जिस कारण मरीज को दौरे पड़ते हैं, वह बेहोश हो सकता है या कुछ समय तक असामान्य व्यवहार कर सकता है।

मिर्गी के कई कारण और लक्षण होते हैं। मिर्गी किसी भी व्यक्ति को हो सकती है, लेकिन अधिकतर मामलों में यह छोटे बच्चों और अधेड़ उम्र के लोगों में देखने को मिलता है। 

मिर्गी कोई संक्रमण बीमारी नहीं है। यह मानसिक बीमारी या मानसिक कमजोरी के कारण नहीं होता है। अधिकतर मामलों में मिर्गी के कारण पड़ने वाले दौरों से मस्तिष्क पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता है, लेकिन कभी-कभी दौरों के कारण मस्तिष्क को क्षति पहुंच सकती है।

मिर्गी का इलाज करने के कई अलग-अलग तरीके मौजूद हैं। मिर्गी के उपचार में मेडिटेशन, सर्जरी और दवा आदि शामिल हैं।

मिर्गी के कारण: (Causes of Epilepsy)

मिर्गी आने के कई कारण हो सकते हैं:

  • आनुवंशिक कारण।
  • ब्रेन ट्यूमर या सिस्ट का होना।
  • एड्स की बीमारी का उत्पन होना।
  • जन्म से पहले शिशु के सिर में चोट लगना।
  • अत्यधिक शराब या नशीली दवाओं का सेवन।
  • मेनिनजाइटिस (मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के आस-पास की सुरक्षात्मक झिल्ली में सूजन होना )
  • अल्जाइमर रोग।
  • ब्रेन स्ट्रोक (35 से अधिक उम्र के लोगों में मिर्गी का यह मुख्य कारण देखा गया है )।

मिर्गी के लक्षण: (Symptoms Of Epilepsy)

  • अचानक बेहोश हो जाना
  • बोलने में समस्या होना
  • भावनाओं में बदलाव
  • तनाव
  • बात को समझने में परेशानी
  • एक टक एक ही जगह पर देखना
  • सांस लेने में परेशानी
  • मांसपेशियों में दर्द
  • अचानक गुस्सा होना
  • चक्कर आना
  • अचानक खड़े-खड़े गिर जाना
  • चेहरे, गर्दन और हाथ की मांसपेशियों में बार-बार झटके आना

इन सबके अलावा, मिर्गी के दूसरे भी अन्य लक्षण हो सकते हैं। मिर्गी का लक्षण मरीज और मिर्गी के प्रकार के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं।

मिर्गी का इलाज: (Epilepsy Treatment)

मिर्गी के उपचार में आमतौर पर दवाएं, जीवनशैली में बदलाव और कुछ मामलों में सर्जरी शामिल होते हैं:

1. दवाएँ: एंटीसेप्टिक दवाओं का सेवन करने से मिर्गी के कारण पड़ने वाले दौरों की संख्या कम होती है और कुछ लोगों में दोबारा दौरे आने का खतरा भी खत्म हो जाता है। इस दवा का सेवन डॉक्टर द्वारा दिए गए दिशा-निर्देश के मुताबिक ही करना चाहिए।

2. जीवनशैली में बदलाव: जीवनशैली में कुछ बदलाव मिर्गी को प्रबंधित करने और दौरे की आवृत्ति को कम करने में मदद करते हैं। इनमें पर्याप्त नींद लेना, शराब और नशीली दवाओं से परहेज करना, तनाव का प्रबंधन करना, भोजन और दवाओं में नियमितता बनाए रखना आदि शामिल हो सकता है।

3. कीटोजेनिक आहार: मिर्गी से पीड़ित कुछ लोग, विशेषकर बच्चे जिनके दौरे दवा से अच्छी तरह से नियंत्रित नहीं होते हैं, उन्हें कीटोजेनिक आहार से लाभ हो सकता है। यह उच्च वसा, कम कार्बोहाइड्रेट वाला आहार कुछ व्यक्तियों में दौरे की आवृत्ति को कम करने में मदद कर सकता है।

4. वेगस तंत्रिका उत्तेजना (VNS): वीएनएस मिर्गी से पीड़ित लोगों के लिए एक शल्य चिकित्सा उपचार विकल्प है जिनके दौरे दवा से पर्याप्त रूप से नियंत्रित नहीं होते हैं। इसमें एक उपकरण प्रत्यारोपित (Implant ) किया जाता है जो गर्दन में वेगस तंत्रिका (Vagus Nerve) तक विद्युत आवेग (Electrical Impulses) पहुंचाता है, जो दौरे की आवृत्ति और गंभीरता को कम करने में मदद करता है।

5. मिर्गी सर्जरी: कुछ मामलों में, मस्तिष्क के उस क्षेत्र को हटाने के लिए सर्जरी की जाती है जहां दौरे शुरू होते हैं (मिर्गी फोकस)। यह आमतौर पर तब माना जाता है जब दौरे को दवा द्वारा नियंत्रित नहीं किया जा सकता है और मस्तिष्क के महत्वपूर्ण कार्यों को जोखिम में डाले बिना मिर्गी के फोकस को स्पष्ट रूप से पहचाना जा सकता है।

मिर्गी का उपचार अत्यधिक व्यक्तिगत है, और दौरे के प्रकार और गंभीरता, व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य और उनकी प्राथमिकताओं और जीवनशैली सहित विभिन्न कारकों पर निर्भर करता है। मिर्गी से पीड़ित व्यक्तियों के लिए उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप एक व्यापक उपचार योजना विकसित करने के लिए स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों से परामर्श लेना आवश्यक है। 

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  • 02-Feb-2024
  • By Tej Hospital Solution

सुबह खाली पेट अजवाइन का पानी पीने के फायदे

अजवाइन एक प्रकार का मसाला है, जो ज्यादातर सभी घरों में पाया जाता है। यह खाने की सुगंध और स्वाद बढ़ाने में ही नहीं, बल्कि कई बीमारियों को दूर करने में भी मदद करता है। इन छोटे-छोटे बीजों में प्रोटीन, फाइबर, फास्फोरस, कैल्शियम, आयरन और कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसका इस्तेमाल घरेलू उपचार के रूप में भी किया जाता है। यह स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं को दूर करने में फायदेमंद है। पाचन संबंधी समस्या से राहत पाने के लिए अजवाइन सबसे कारगर उपायों में से एक माना जाता है। यह सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है। अजवाइन वाले पानी को पीने से पेट दर्द, अपच और कब्ज आदि समस्याओं को दूर किया जा सकता है। यह युर्वेदिक गुणों से भरपूर होता है। यह वजन कम करने में भी मददगार है। आइए जानते हैं सुबह खली पेट अजवाइन का पानी पीने के फायदे।

अजवाइन का पानी पीने के फायदे (Benefits Of Drinking Celery Water)

1. पाचन में सुधार करता है: 

अजवाइन में एक्टिव एंजाइम होते हैं, जो पेट में एसिड के प्रवाह में सुधार करते हैं। इससे पाचन हेल्थ में सुधार होता है। यह कब्ज, एसिडिटी और गैस जैसी समस्याओं को दूर करने के लिए शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने में मदद करता है। नियमित रूप से सुबह खाली पेट अजवाइन का पानी पिएंगे, तो इससे पेट में गैस नहीं बनेगी। इसके साथ आप अदरक, नींबू का रस आदि मिला सकते हैं। अजवाइन का पानी पीने से पाचन-तंत्र मजबूत बनता है।

2. वजन घटाने में फायदेमंद:

अजवाइन का सेवन सेहत और वजन घटाने दोनों के लिए फायदेमंद है। अजवाइन का पानी कैलोरी और फैट को कम करने में मदद करता है। जिससे वजन कम करने में मदद मिलती है और पाचन में सुधार होता है। अजवाइन का रस भी वजन घटाने में मदद करता है। सुबह खाली पेट अजवाइन वाले पानी के सेवन से वजन को आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है।  

3. संक्रमण से बचाता है: 

अजवाइन में एंटीसेप्टिक, एंटीमाइक्रोबियल और एंटीपैरासिटिक गुण पाए जाते हैं। ये सर्दी, खांसी और अन्य संक्रमण को रोकने में मदद करता है। अजवाइन का पानी साल्मोनेला और ई कोलाई जैसे बैक्टीरिया (जो पेट से जुड़ी समस्या पैदा करते हैं) से लड़ने में भी मदद कर सकता है।

4. ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने में मददगार:

आयुर्वेद के मुताबिक, अजवाइन (Carom Seeds) एक ऐसी औषधी है, जो हाई बीपी को कंट्रोल कर सकता है। अजवाइन को ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने के लिए जाना जाता है। अजवाइन के बीज में फाइबर और पोटैशियम की मात्रा ज्यादा होती है, जो ब्लड प्रेशर को कण्ट्रोल करने में मदद करती है। अजवाइन को स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक माना जाता है। 

5. खांसी से राहत दिलाने में फायदेमंद:

अजवाइन का इस्तेमाल सर्दी-जुकाम, खांसी, और बुखार के घरेलू इलाज में किया जाता है। अजवाइन के बीजों को उबालकर, और सिर पर तौलिया या कोई कपड़ा रखकर इस गर्म पानी की भाप लें। इससे भाप लेने से सीने की जकड़न दूर होती है और खांसी से राहत मिलती है। 

6. पेट दर्द में आराम दिलाए:

अजवाइन में थायमोल नाम का कंपाउंड होता है, जो गैस्ट्रिक रस का उत्पादन बढ़ाने में मदद करता है। साथ ही इसमें एंटी-माइक्रोबियल गुण पाए जाते हैं, जो पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करते हैं। अजवाइन के सेवन से पेट दर्द और गैस की समस्या से तुरंत आराम मिलता है। 

7.  बॉवेल मूवमेंट नियमित रहता है:

अजवाइन के पानी के सेवन से आपका बॉवेल मूवमेंट नियमित हो जाता है। इसमें पाए जाने वाले गुण कब्ज की स्थिति पैदा नहीं होने देते हैं। साथ ही अजवाइन की गर्मा गर्म चाय आपके पेट को साफ करती है और मल को मुलायम बनाती है, जिससे कि मल आसानी से बाहर निकल पाता है। 

8. त्वचा के लिए फायदेमंद:

अजवाइन में कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। ये गुण त्वचा की समस्याओं (मुहांसे, एक्जिमा और फंगल इन्फेक्शन) को कम करने में मदद करते हैं। अजवाइन में खून साफ करने वाले तत्व भी पाए जाते हैं। ये त्वचा की गहराई से सफाई करते हैं। साथ ही त्वचा के संक्रमण को दूर करते हैं। 

अजवाइन का पानी कैसे बनाएं ? (How To Make Celery Water?)

अजवाइन का पानी बनाने के लिए, 

  • एक गिलास पानी में एक चम्मच अजवाइन डालें। 
  • रात भर के लिए इसे भिगोकर रख दें। 
  • अगले दिन सुबह इस पानी को उबालकर छान लें। 
  • इस पानी को ठंडा कर लें और खाली पेट सुबह-सुबह इसका सेवन करें। 

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  • 01-Feb-2024
  • By Tej Hospital Solution

अस्थमा से राहत पाने के लिए घरेलू उपचार

अस्थमा, जिसे आम बोल चाल में दमा भी कहा जाता है। यह फेफड़ों से संबंधित एक बीमारी है। जिसके कारण व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई होती है। अस्थमा होने पर श्वास नलियों में सूजन होकर श्वसन मार्ग सिकुड़ जाता है। इन वायुमार्गों से हवा फेफड़ों के अन्दर और बाहर जाती है और अस्थमा होने पर ये वायुमार्ग सूजे हुए रहते हैं।

अस्थमा अलग -अलग कारणों और अलग-अलग परिस्थितियों के कारण हो सकता है। इसके कारण सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, खांसी और घरघराहट सी हो सकती है। हालांकि इसके लक्षण गंभीर हो सकते हैं। इससे राहत पाने के लिए दवाइयाँ जरूरी हैं। लकिन राहत पाने के लिए कुछ घरेलू उपचार भी हैं।  

अस्थमा के लिए घरेलू उपचार (Home Remedies For Asthma)

1. कलौंजी:
अस्थमा के इलाज में कलौंजी मददगार होती है। कलौंजी के वाष्पशील तेल में दर्द और सूजन को कम करने की क्षमता होती है। साथ ही कलौंजी में थाइमोक्वीनोन नाम का तत्त्व पाया जाता है जो अस्थमा से लड़ने में कारगर है। 
इसको इस्तेमाल करने के लिए आधा चम्मच कलौंजी का तेल, एक चम्मच शहद, एक कप गर्म पानी चाहिए। इसके लिए पानी में कलौंजी का तेल और एक चम्मच शहद मिलाएं। और ऐसे सुबह नाश्ते से पहले और रात को खाना खाने के बाद पिएं। इसे 1 महीने तक दोहराएं। 

2. शहद:
शहद अस्थमा के लक्षणों को कम करने में मदद करता है। और बेहतर नींद में भी मदद करता है। इसका इस्तेमाल करने के लिए पानी में शहद मिला कर पिएं। इसके अलावा अस्थमा का दौरा बार-बार न पड़े इसलिए हल्दी और शहद मिलाकर चाटना चाहिए। यह अस्थमा के सफल इलाज में सहायक होता है। 

3.लहसुन :
लहसुन आपके फेफड़ों में जमाव को साफ करने में मदद करता है, जिसकी वजह से अस्थमा के लक्षणों से तुरंत राहत मिलती है। अस्थमा के लक्षणों को कम करने के लिए दूध में लहसुन की कुछ कलियाँ उबालकर पियें। इस मिश्रण का हर रोज सेवन करने से अस्थमा का जड़ से इलाज होता है।

4. अंजीर:
अंजीर कफ को जमने से रोकने में काफी मदद करता है। अस्थमा का इलाज करने के लिए सूखी अंजीर को गर्म पानी में रातभर भिगो दें और सुबह खाली पेट इसका सेवन करें। इससे श्वास नली में जमा बलगम ढीला हो जाता है और बाहर निकल जाता है जिससे संक्रमण फैलने का खतरा कम हो जाता है। 

5. हल्दी:
अस्थमा जैसे फेफड़ों के रोगों में हल्दी का सेवन फायदेमंद होता है। हल्दी, अस्थमा में जमे हुए कफ को दूर करने में मदद करती है जिससे अस्थमा के लक्षणों में कमी होने लगती है। इसीलिए अस्थमा के मरीजों को हल्दी का सेवन की सलाह दी जाती है।  इसके लिए हल्दी का पानी पिएं। इसे 2 हफ्तों तक दिन में 3 बार दोहराएं।

6. अदरक:
अदरक का इस्तेमाल अस्थमा के लिए फायदेमंद है। अस्थमा का जड़ से इलाज करने के लए आप अदरक का इस्तेमाल कर सकते हैं। अदरक की चाय में लहसुन की दो पिसी कलियाँ मिलाकर पिएं। यह अस्थमा का सफल इलाज करने में सहायक है। या आप अदरक के छोटे टुकड़े को चबा भी सकते हैं। 

7. अजवाइन:
अजवाइन में एंटी-इन्फ्लेमेशन का गुण भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो अस्थमा दूर करने में असरदार माना जाता है। ऐसे में अस्थमा के मरीजों को अजवाइन का सेवन करने की सलाह दी जाती है। अगर किसी व्यक्ति को अस्थमा की परेशानी है तो वह डॉक्टर की सलाह पर अजवाइन का सेवन कर सकता है। इसका इस्तेमाल करने के लिए पानी में अजवाइन डालकर इसे उबालें। और इससे भाप लें। यह अस्थमा का जड़ से इलाज करता है। 

अस्थमा के मरीजों के लिए सावधानियां: (Precautions For Asthma Patients)

अस्थमा के रोगियों के लिए सावधानी रखना बेहद जरूरी है। अगर आप शुरू से ही सावधानियां और परहेज रखते हैं तो इससे संक्रमण बढ़ने का खतरा कम होता है और अस्थमा अटैक से भी बच सकते हैं।आइए जानते हैं अस्थमा के रोगियों को क्या-क्या सावधानियां रखनी चाहिए- 

  • अस्थमा और दमा के मरीजों को सर्दी और धूल से बचना चाहिए।
  • ज्यादा ठंड व मौसम में नमी अस्थमा मरीजों  की समस्या को और अधिक बढ़ा सकती है।
  • घर से बाहर जाते समय मास्क लगाकर निकलें जिससे आप धूल-मिट्टी के संपर्क में आने से बच सकें।
  • सर्दियों में धुंध से बचें।
  • कीटनाशक, स्प्रे, अगरबत्ती, मच्छर भगाने का कॉइल का धुआँ और खुशबुदार चीजों से बचें ।
  • धूम्रपान ना करें और धूम्रपान वाली जगह पर ना जाएं।
  • भोजन में लेसदार पदार्थ और मिर्च-मसालेदार चीजें न खाएं।
  • फ्रीज में रखी सोया और अन्य चीजों को भी तुरंत नहीं खाना चाहिए।

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  • 31-Jan-2024
  • By Tej Hospital Solution

रीढ़ की हड्डी के बीच गैप होने के कारण, लक्षण और इलाज

रीढ़ की हड्डी को हमारे शरीर का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। रीढ़ हमारे शरीर की संरचना में अहम भूमिका निभाती है और शरीर को Structural Stability प्रदान करती है। हालांकि उम्र बढ़ने के साथ साथ हामरे शरीर में कई तरह की परेशानियां आने लगती हैं, इन्हीं में से एक है रीढ़ की हड्डी में गैप आ जाना। 

रीढ़ की हड्डी में गैप आने को स्पोंडिलोसिस (Spondylosis) कहते हैं। इससे व्यक्ति को चलने फिरने में दिक्कत होने लगती है। ऐसे स्थिति खासकर उम्र बढ़ने के साथ होने लगती है। 

रीढ़ की हड्डी के बीच गैप होने का कारण (Cause Of Gap Between Spinal Cord)

रीढ़ की हड्डी में गैप की समस्या तब होती है, जब हमारी रीढ़ की हड्डी की पट्टियों के बीच की दूरी या Spacing कम हो जाती है। इसकी वजह से रीढ़ की हड्डी के किसी भी भाग में दबाव आने लगता है, जो दर्द और कई अन्य समस्याओं का कारण बनता है। रीढ़ की हड्डी में गैप की इस स्थिति को स्पाइनल डिस्क हर्नियेशन (Spinal Disc Herniation) कहा जाता है। यह एक गंभीर स्थिति है, जो हमारी रीढ़ से संबंधित अन्य हड्डियों को प्रभावित कर सकती है। रीढ़ की हड्डी में गैप के कारण कई हो सकते हैं जैसे:
कभी-कभी बहुत अधिक वजन उठाने से  रीढ़ की हड्डी में Gap बन सकता है।
अगर किसी व्यक्ति का वजन अधिक तेजी से कम होने लगे और वह भारी काम करने लगे तो इससे भी उनकी रीढ़ की हड्डी में गैप बन सकता है।
लंबे समय तक गलत तरीके से बैठने और काम करने से भी रीढ़ की हड्डी में जगह बन सकती है। यह समस्या अक्सर उन लोगों में देखी जाती है जो ऑफिस में काम करते हैं और सारा दिन बैठे रहते हैं।
कुछ मामलों में यह समस्या अनुवांशिक हो सकती है। अगर आपके परिवार में किसी को यह समस्या रही है, तो आपको भी यह हो सकती है।
गलत तरीके से खड़ा होना भी आपकी रीढ़ की हड्डी में गैप का एक बड़ा कारण हो सकता है।

रीढ़ की हड्डी के बीच गैप होने के लक्षण (Symptoms Of Gap Between Spinal Cord)

रीढ़ की हड्डी में गैप होने के लक्षण: 
रीढ़ की हड्डी में दर्द
जोड़ों में दर्द
कुट्ट रोग (कुष्ठ रोग मुख्य रूप से त्वचा और परिधीय नसों (दिमाग और स्पाइनल कॉर्ड के बाहर की नसों) को प्रभावित करता है।)
पीठ दर्द
कार्पल टनल सिंड्रोम  (तंत्रिका को स्थायी क्षति पहुँचाता है)
कलाई का दर्द
सीधे खड़े होने पर कमर से कट-कट की आवाज आना
भारी सामान उठाने पर पीठ दर्द होना
अत्यधिक पसीना आना 

रीढ़ की हड्डी में गैप का इलाज (Treatment Of Spinal Gap)

रीढ़ की हड्डी में गैप का इलाज इसके कारण, गंभीरता, और रोगी की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है। आमतौर पर डॉक्टर जो सुझाव देते हैं उनमें शामिल है:
  • दवाएं: डॉक्टर आपको कुछ दवाओं की सलाह देंगे, जो गैप के कारण होने वाले दर्द को कम करने और सूजन को कम करने में मदद कर सकती हैं।
  • व्यायाम और प्राकृतिक चिकित्सा: गैप के सामान्य इलाज में प्राकृतिक चिकित्सा, व्यायाम और योग आदि की सलाह दी जाती है, जिससे कि पीठ की मांसपेशियों को मजबूत और दर्द को कम किया जा सके।
  • फिजियोथेरेपी: फिजियोथेरेपी ट्रीटमेंट, हड्डियों के बीच गैप के साथ संबंधित मांसपेशियों को सुधारने और दर्द को कम करने के लिए इस्तेमाल की जाती है।
  • चिकित्सकीय उपचार: यदि गैप काफी गंभीर है और इलाज की जरूरत होती है, तो डॉक्टर द्वारा सर्जरी की सलाह दी जाती हैं। सर्जरी द्वारा गैप को कम करने की कोशिश की जाती है, जिसमें किसी विशेष तकनीक का उपयोग किया जा सकता है, जैसे कि स्पाइनल फ्यूजन (Spinal Fusion) या डिस्क आपरेशन (Disc Surgery)।

डॉक्टर आपको अच्छे पोस्चर का अभ्यास और बैक सपोर्ट उपकरण का उपयोग करने की सलाह देता है, जो गैप के इलाज में मदद करता है।

रीढ़ की हड्डी में गैप का इलाज सही समय पर किया जाना चाहिए ताकि समस्या बढ़ने से बचा जा सके। इसके लिए डॉक्टर की सलाह और सही देखभाल का पालन करना महत्वपूर्ण है। स्वस्थ जीवनशैली, थैरेपी, और चिकित्सक के सलाह का पालन करने से गैप का इलाज संभव हो सकता है।

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सर्दियों में सेहत के लिए कितना जरूरी है, अदरक

अदरक सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है, खासकर सर्दियों के महीनों में। इसके गर्म करने वाले गुण परिसंचरण को उत्तेजित करने और शरीर को गर्म रखने में मदद करते हैं, जो ठंड के मौसम में विशेष रूप से उपयोगी है। अदरक में मौजूद औषधीय गुण शरीर को कई तरह से लाभ पहुँचाते हैं। इसके अतिरिक्त, अदरक अपने सूजन-रोधी और प्रतिरक्षा-बढ़ाने वाले गुणों के लिए जाना जाता है, जो सर्दी और फ्लू जैसी सर्दियों की बीमारियों को दूर करने में मदद करता है। यह पाचन में भी सहायता करता है। सर्दियों के दौरान अदरक को अपने आहार में शामिल करना समग्र स्वास्थ्य और कल्याण के लिए एक फायदेमंद विकल्प है। आइए जानते हैं, सर्दियों में अदरक के सेवन से क्या लाभ मिलते हैं।

सर्दियों में अदरक के सेवन के फायदे: (Benefits Of Consuming Ginger In Winter)

सर्दियों में अदरक का सेवन कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है। ये एक प्राकृतिक उपचार है जो ठंड से बचाव में मदद करता है और शरीर को गर्मी प्रदान करता है। यहाँ कुछ अदरक के सेवन के फायदे बताए गए हैं:
1. सर्दी - खांसी में सहायक:
आयुर्वेद में सर्दी-जुकाम के लिए अदरक को फायदेमंद बताया गया है। अदरक में एंटी-इंफ़्लेमेटरी गुण होते हैं। यह शरीर को कई स्वास्थ्य समस्याओं से बचाता है और इम्यूनिटी बढ़ाने में भी मदद करता है। खांसी-जुकाम से छुटकारा पाने के लिए अदरक का काढ़ा बनाकर पिया जा सकता है। सर्दियों में अदरक वाली चाय पीना भी फायदेमंद माना जाता है। इससे ठंड नहीं लगती और शरीर को इंफेक्शन से बचाया जा सकता है। सर्दी के मौसम में अगर गर्मागर्म चाय में अदरक की चाय बनाकर पीना फायदेमंद माना जाता है।

2. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक:
अदरक में जिंजरोल पाया जाता है इसके अलावा अदरक में एंटी बैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण मौजूद होता है जिसके कारण अदरक रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और खांसी बुखार कम करता हैं, संक्रमण से लड़ने में मदद करता है, साथ ही सिरदर्द से राहत दिलाता हैं और सामान्य सर्दी और फ्लू से जुड़े अन्य लक्षणों को कम करने में मदद करता हैं। 

3. पाचन से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं:
अदरक पाचन शक्ति को मजबूत करता है। अदरक खाने से गैस, दर्द, दस्त, और कब्ज की समस्या दूर होती है। अदरक में एंटी-इंफ़्लेमेटरी गुण होते हैं। ये जोड़ों के दर्द को दूर करने में मददगार होते हैं। अदरक से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। अदरक खाने से पेट दर्द से आराम मिलता है, मतली (Nausea) की समस्या दूर होती है, और वजन कम करने में भी मदद मिलती है। 

4. गठिया के दर्द को कम करता है:
अदरक में एंटी इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो दर्द या सूजन से राहत दिलाने में मदद करते हैं। गठिया के दर्द से राहत पाने के लिए आप अदरक का सेवन कर सकते हैं। यह मांसपेशियों के अकड़न को शांत करने में सहायक माना जाता है। अदरक में ऐसे औषधीय गुण होते हैं, जो गठिया के दर्द और सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं।अदरक का पेस्ट या तो अपने जोड़ों पर लगा सकते हैं या फिर आप अपने दिन भर के खाने में भी अदरक का सेवन कर सकते हैं। दोनों ही तरह से इस्तेमाल किया गया अदरक गठिया के रोगियों के लिए बेहद लाभकारी होता है। 

5. भूख न लगने की समस्या दूर करता है:
अदरक के रस को पानी में उबालकर पीने से भूख बढ़ती है और वजन भी तेजी से बढ़ता है। अदरक पाचन में सुधार करने में मददगार है। इसके नियमित सेवन से भूख न लगने की समस्या दूर होती है।अदरक के कुछ छोटे-छोटे टुकड़े काटकर एक गिलास पानी में डालकर पीने से भी भूख बढ़ती है। 

6. अपच की समस्या दूर करता है:
अदरक का पानी अपच, कब्ज, सूजन, उल्टी, दस्त, और मतली जैसी समस्याओं को दूर करने में मदद करता है। अदरक में 'जिंजरोल' नामक तत्व पाए जाते हैं, जो पाचन प्रणाली को मजबूत बनाने में मदद करता हैं। अदरक खाने से गैस, एसिडिटी औरपेट फूलना जैसी समस्याओं से राहत मिलती है। अदरक का चूर्ण भी कब्ज की समस्या दूर करने में फायदेमंद है। अदरक खाने से Digestion अच्छा रहता है और पाचन से जुड़ी कई दिक्कतों से छुटकारा मिलता है। 

7. त्वचा के लिए फायदेमंद:
अदरक में कई तरह के गुण पाए जाते हैं। इसमें एंटी-एजिंग गुण होते हैं। अदरक में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट त्वचा के कोलेजन को बनाए रखने में मदद करते हैं। साथ ही, इसमें विटामिन और मिनरल भी होते हैं, जो त्वचा को काले होने से रोकता है और कॉम्प्लेक्शन (रंग, रूप ) को बढ़ाता है। अदरक में मौजूद एंटीसेप्टिक तत्व ऊपरी त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया को खत्म करके त्वचा की डीप क्लीनिंग करने में मदद करते है। 

8. कोलेस्ट्रॉल कम करने में सहायक:
अदरक में जिंजरोल और शोगोल नाम के तत्व होते हैं। ये कंपाउंड सूजन और कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करते हैं।अदरक कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद करता है।  इससे ह्रदय से जुड़ी समस्याओं और कोलेस्ट्रॉल से जुड़ी दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा कम हो सकता है। कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए, आप इसे कच्चा चबा सकते हैं। इसके अलावा, अदरक का पानी या अदरक की चाय बनाकर भी पी सकते हैं। 

9. डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद:
अदरक डायबिटीज को कंट्रोल करने में असरदार है। यह डायबिटीज में ब्लड शुगर लेवल और HbA1C को कम करने में मदद करता है। रिसर्च के मुताबकि 2 ग्राम अदरक का सेवन करने से 12 फीसदी तक शुगर को कंट्रोल किया जा सकता है। अदरक का ग्लाइसेमिक इंडेक्स बेहद कम होता है, इसलिए डायबिटीज के मरीजों के लिए अदरक का सेवन करना फायदेमंद होता है।

10. शरीर को गर्म रखने में सहायक: 
ठंडी में, अदरक का सेवन शरीर को गर्म रखने में मदद कर सकता है और ठंड के लक्षणों को कम करता है।

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  • 30-Jan-2024
  • By Tej Hospital Solution

पीलिया के घरेलू उपचार और बचाव के तरीके

पीलिया एक चिकित्सीय स्थिति है जिसमें त्वचा और आंखों का सफेद भाग पीला पड़ जाता है। यह शरीर में बिलीरुबिन की मात्रा अधिक होने के कारण होता है। बिलीरुबिन का निर्माण शरीर के उत्तकों और खून में होता है। आमतौर पर जब किसी कारणों से लाल रक्त कोशिकाएं टूट जाती हैं तो पीले रंग के बिलीरुबिन का निर्माण होता है। बिलीरुबिन लिवर से फिलटर होकर शरीर से बाहर निकलता है, लेकिन जब किसी कारणों से यह खून से लिवर में नहीं जाता है या लिवर द्वारा फिलटर नहीं होता है तो शरीर में इसकी मात्रा बढ़ जाती है जिससे पीलिया होता है।

पीलिया के लक्षण  (Symptoms Of Jaundice)

पीलिया का सबसे बड़ा लक्षण त्वचा और आंखों का पीला होना है। इसके अलावा, पीलिया होने पर निम्न लक्षण दिखाई देते हैं:-  
बुखार होना
थकान होना
वजन घटना
कमजोरी होना
भूख नहीं लगना
पेट में दर्द होना
सिर में दर्द होना
कब्ज की शिकायत होना
पेशाब का रंग गहरा होना
कुछ मामलों में खुजली और उलटी होना

पीलिया के घरेलू उपचार (Jaundice Home Remedies)

1. अरंडी के पत्ते:
इसके लिए आप अरंडी के पत्तों का रस निकालें। इसे खाली पेट लगभग 25 ml पिएं। यह 3 से 4 दिनों के अंदर पीलिया ठीक कर देता है।

2. गन्ने का रस:
गन्ने का रस पीलिया के इलाज में अत्यंत फायदेमंद होता हैं। अगर दिन में तीन से चार बार सिर्फ गन्ने का रस पिया जाए तो यह काफी लाभदायक होता हैं। अगर रोगी सत्तू खाकर गन्ने का रस सेवन किया जाय तो सप्ताह भर में ही पीलिया ठीक हो जाता है। यह आपके लिवर को मजबूत बनाने में मदद करता है। गन्ने के रस में विभिन्न एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो लिवर को संक्रमित होने से बचाते हैं। 

3. हल्दी: 
हल्दी पीलिया रोग के उपचार के लिए बहुत अच्छी होती हैं। पीलिया होने पर आप एक चम्मच हल्दी को आधे गिलास पानी में मिला लें। इसे रोजाना दिन में तीन बार पिएं। इससे शरीर में मौजूद सभी विषाक्त पदार्थ मर जाएंगे। यह बिलीरुबिन को शरीर से बाहर करने में भी बहुत मदद करता है। 

4. मूली के पत्तों का रस: 
मूली और मूली के पत्तों का रस निचोड़कर पीने से भी पीलिया में जल्दी राहत मिलती है। मूली के रस में काला नमक मिलाकर पीने से पाचनतंत्र भी ठीक रहता है। यह हमारे शरीर से एक्सट्रा बिलीरुबिन को बाहर निकालने में मदद करता है और पीलिया को जल्द खत्म करता है। 

5. पीपल के पत्ते का रस:
खून के बहाव में रुकावट पैदा होने पर पीपल के पत्तों का रस बहुत ही लाभकारी होता है।  पीपल के पत्तों को उबालकर पीने से पीलिया रोग में आराम मिलता है। इसके लिए कुछ पीपल के पत्तों को उबालकर उसका रस बना लें। इसका दिन में 2 से 3 बार सेवन करें। 

6. नींबू का रस: 
में साइट्रिक एसिड होता है, जो पाचन में मदद कर सकता है और लीवर के कार्य में सहायता होता है। नींबू के रस को पानी में निचोड़ कर पीने से पेट साफ होता है। इसे रोज खाली पेट सुबह पीना पीलिया में लाभदायक होता है।

7. दही:
दही के सेवन से बैक्टीरिया की वजह से होने वाले इंफेक्शन से बचाव होता है और ये पीलिया के लक्षणों को कम करता है। 

8. नारियल पानी:
पीलिया को दूर करने में नारियल पानी सहायता करता है। ये लीवर को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाता है। साथ ही इसका सेवन करने से पाचन तंत्र भी दुरुस्त रहता है। 

9. त्रिफला चूर्ण:
एक चम्मच त्रिफला चूर्ण को रात भर पानी में भीगोकर रख दें और सुबह उठकर इसको पी लें। इसका सेवन दो सप्ताह तक करने से पीलिया से राहत मिलती है। 

यह  ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि प्रत्येक व्यक्ति के लिए इन घरेलू उपचार का प्रभाव अलग - अलग हो सकता है। यदि आपको संदेह है कि आपको पीलिया या कोई अंतर्निहित स्वास्थ्य स्थिति है, तो सटीक निदान और उचित चिकित्सा देखभाल के लिए स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से परामर्श लें। 

पीलिया से बचाव के उपाय (Jaundice Prevention Measures)

पीलिया से बचने के लिए, आप ये उपाय अपना सकते हैं: 
  • प्रतिदिन एक कटोरी दही खाएं।
  • सुबह खाली पेट उबले हुए टमाटर का जूस पिएं।  स्वाद बढ़ाने के लिए, इसमें थोड़ी काली मिर्च और नमक मिला सकते हैं।
  • नियमित रूप से योग करें।  भुजंगासन, उत्तान पादासन, शवासन, और प्राणायाम बहुत फायदेमंद हैं।
  • अरहर के पत्तों को पीसकर उसका रस निकाल लें। इस रस का कम से कम 60 मिलीलीटर रोजाना सेवन करें। अरहर की फलियां भी बहुत पौष्टिक होती हैं। इन्हें आहार में शामिल किया जा सकता है।
  • ब्लूबेरी, अंगूर, पपीता, खरबूज, कद्दू, शकरकंद, रतालू, टमाटर, गाजर, चुकंदर, शलजम, ब्रोकोली और फूलगोभी जैसी क्रुसिफ़ेरस सब्जियां, अदरक, लहसुन, और पालक आदि का सेवन बढ़ाएं। 

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