बदहजमी के कारण, लक्षण और घरेलू उपचार
Specialization:- Gastroenterologist
विशेषज्ञता:- जठरांत्र चिकित्सक
बदहजमी को ‘अपच’ के रूप में भी जाना जाता है। यह पेट के ऊपरी हिस्से में होने वाला दर्द या बेचैनी है। पेट में जो Acid बनता है वह जब पाचन तंत्र की सुरक्षात्मक सतह को नुकसान पहुँचाता है, तब पेट में जलन और सूजन होती है, जिस कारण बदहजमी होती है। जो अत्यन्त कष्टदायक होती है। बदहजमी से परेशान ज्यादातर लोगों के पाचन तंत्र में सूजन नहीं होती है। ज्यादातर मामलों में यह खाने से सम्बंधित होती है , हालांकि यह अन्य कारकों जैसे कि अत्यधिक जंक फूड खाने, धूम्रपान, शराब, गर्भधारण, तनाव या कुछ दवाएं लेने से भी हो सकती है। आमतौर पर अपच में कोई गंभीर जटिलताएं नहीं होती हैं। पेट द्वारा भोजन को देर से और धीमी गति से पचाने के कारण कुछ लोगों में अपच 3 घंटे से अधिक समय तक रह सकती है।
बदहजमी के कारण
Causes of Indigestion
- वसायुक्त या तैलीय खाद्य पदार्थों का अत्यधिक सेवन करना
- ज्यादा मसालेदार भोजन करना
- कैफीन का अत्यधिक मात्रा में सेवन करना
- अत्यधिक मात्रा में शराब का सेवन करना
- जरूरत से ज्यादा खाना खा लेना
- बहुत तेजी से भोजन करना
- बहुत अधिक गैसयुक्त पेय पदार्थों का सेवन करना
बदहजमी के लक्षण
Symptoms of Indigestion
- पेट में दर्द
- पेट फूलना
- आंतों में गड़गड़ाहट
- पेट में गैस बनना
- जी मिचलाना
- उल्टी करने की इच्छा या जी मचलना
- दस्त
- बेचैनी
- सीने में जलन
- पेट में भारीपन महसूस होना
बदहजमी से राहत पाने के घरेलू उपाय
Home Remedies to get relief from Indigestion
सामान्यतः बदहजमी की समस्या से निजात पाने के लिए सबसे पहले घरेलू नुस्खों को ही अपनाया जाता है। यहां हम कुछ ऐसे घरेलू उपायों के बारे में बात करेंगे जिनके प्रयोग से अपच की समस्या से राहत पाया जा सकता है।
सेब का सिरका
पाचन क्रिया को ठीक करने के लिए सेब के सिरके का अक्सर इस्तेमाल किया जाता है। इसमें मौजूद अल्कलाइजिंग प्रभाव अपज या बदहजमी को दूर करने में मदद करता है।
एक गिलास पानी में एक चम्मच सेब का सिरका और उसमें थोड़ा शहद अच्छी तरह मिला लें। इसे दिन में 2 या 3 बार पियें। इससे आपको जल्द राहत मिलेगी।
अजवायन
अजवायन में पाचक और वातहर गुण होते हैं, जो अपच, पेट की गैस और दस्त का इलाज करता है। अपने डायट में अजवाइन को शामिल करने से बदहजमी से लाभ मिलता है। या 1 या आधा चम्मच अजवाइन चबाएं। इससे आपको अपच की समस्या से राहत मिलेगी।
नींबू और अदरक का पानी
नींबू और अदरक का पानी शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसको बनाने के लिए 1 गिलास पानी को गर्म करें। उममें 1 चम्मच कद्दूकस की हुई अदरक को डाल दें। उसके बाद इस पानी को उबलने दें। गुनगुना होने पर इस पानी में नींबू के रस की बूंदे और शहद को मिलाकर पी लें। ये पानी आसानी से बदहजमी को दूर करेगा और पेट में बन रही गैस को भी दूर करेगा।
सौंफ
सौंफ की मदद से भी बदहजमी और अपच को आसानी से दूर किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल करने के लिए सौंफ के बीज को गिलास पानी में उबाल लें। फिर इस पानी को छानकर गुनगुना होने पर पी लें। ये उपाय करने से उल्टी की समस्या दूर होने के साथ बदहजमी भी दूर होगी।
बेकिंग सोडा
बेकिंग सोडा शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसका इस्तेमाल करने के लिए 1/2 चम्मच बेकिंग सोडा को 1 गिलास पानी में मिलाएं। अब इस पानी को पी लें। ऐसा करने से पेट में एसिड की समस्या दूर होगी और बदहजमी से आराम मिलेगा।
दालचीनी
दालचीनी शरीर के लिए बहुत लाभदायक होती है। इसके सेवन से शरीर की कई बीमारियों को दूर किया जा सकता हैं। इसका इस्तेमाल करने के लिए 1 कप पानी में 2-3 टुकड़ों को पानी में डालकर उबाल लें। अब गुनगुना होने पर इस पानी को पी लें। बदहजमी की समस्या दूर होने में मदद मिलेगी।
हींग
हींग गैस, बदहजमी या अपच जैसी दिक्कत से तुरंत राहत देती है। इसके लिए आप दो चुटकी हींग को भूनकर इसका सेवन कर सकते हैं। या गर्म पानी में हींग मिलाकर भी इसका सेवन कर सकते हैं।
बदहजमी (अपच) दूर करने के लिए इन उपायों की मदद ली जा सकती हैं। लेकिन ध्यान रखें अगर आपको कोई बीमारी या एलर्जी की समस्या है, तो डॉक्टर से पूछकर ही इनका सेवन करें।
अनियमित पीरियड्स के कारण और प्रभावी घरेलू उपचार
पीरियड्स या मासिक धर्म, जिसे माहवारी और रजोधर्म के नाम से भी जाना जाता है। महिलाओं में बढ़ती उम्र के साथ शरीर में हार्मोन में होने वाले बदलाव की वजह से गर्भाशय से Bleeding होने लगती है जिसे मासिक धर्म कहते हैं। मासिक धर्म सबको एक ही उम्र में नहीं होता। लड़कियों को यह 8 से 17 वर्ष तक ही उम्र में हो सकता हैं। कुछ विकसित देशों में लड़कियों को 12 या 13 साल की उम्र में पहला मासिक-धर्म होता है। वैसे सामान्य तौर पर 11 से 13 वर्ष की उम्र में लड़कियों का मासिक धर्म शुरू हो जाता है।
पीरियड्स या मासिक धर्म के बारे में अधिक जानने के लिए नीचे दिए गए Link में जाकर Click करें।
अनियमित पीरियड्स क्या हैं?
What are Irregular Periods
अनियमित पीरियड्स तब होते हैं जब पीरियड्स, नियमित पीरियड्स से पहले या बाद में आते हैं। आम तौर पर, महिलाओं का मासिक धर्म चक्र 28 दिनों का होता है। अगर मासिक धर्म चक्र 21 दिनों से कम या 35 दिनों से ज्यादा हो, तो उसे अनियमित माना जाता है।
अनियमित पीरियड्स के कारण
Causes Of Irregular Periods
- हार्मोनल असंतुलन के कारण
- गर्भनिरोधक गोलियों या गर्भनिरोधक इंजेक्शन का उपयोग करना
- पेरिमेनोपॉज ( शरीर बहुत कम मात्रा में ओव्यूलेशन हार्मोन का उत्पादन करता है। यह Irregular Periods का कारण हो सकता है।)
- थायराइड विकार (थायरॉयड कुछ महीनों के लिए आपके पीरियड्स को बंद कर देता है।)
- अत्यधिक मोटापा ( यदि किसी महिला का वजन सामान्य रूप से ज्यादा है, तो शरीर अत्यधिक एस्ट्रोजन का उत्पादन करता है। एस्ट्रोजन हार्मोन का किसी भी महिला के मासिक धर्म की अवधि पर सीधा प्रभाव पड़ता है।)
अनियमित पीरियड्स के लिए प्रभावी घरेलू उपचार
Effective Home Remedies for Irregular Periods
1. अदरक की चाय
अदरक अनियमित पीरियड्स सहित विभिन्न बीमारियों और लक्षणों के लिए फायदेमंद है। कच्चे अदरक का नियमित सेवन आपके पीरियड्स को नियमित करने में मदद कर सकता है। अदरक में जिंजरोल होता है जो शरीर में सूजन को कम करने में मदद करता है। यह गर्भाशय की मांसपेशियों को सिकोड़ने में मदद करता है और हार्मोनल संतुलन को सुविधाजनक बनाता है। यह मासिक धर्म की मासिक घटना को नियमित करता है। सुबह या शाम खाली पेट एक गिलास गर्म अदरक की चाय में थोड़ा सा नींबू का रस और थोड़ा सा शहद मिलाकर पीने से Metabolism को बढ़ावा मिलता है।
2. गुड़
गुड़ मीठा होता है और इसमें बहुत सारे औषधीय गुण होते हैं। गुड़ के नियमित सेवन से अनियमित पीरियड्स को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। यह खून को साफ करने का काम करता है और गर्भाशय की ऐंठन को कम करने में भी मदद करता है।
3. कच्चा पपीता
कच्चा पपीता अनियमित मासिक धर्म को नियमित करने के लिए असरदार है। यह गर्भाशय की मांसपेशियों को सिकुड़ने में मदद करता है। कुछ महीनों तक नियमित रूप से कच्चे पपीते का जूस पियें लेकिन पीरियड्स के दौरान इसे न पियें।
4. जीरे का पानी
जीरे का पानी अनियमित पीरियड्स के लिए फायदेमंद माना जाता है। जीरा गर्भाशय की दीवारों को संकुचित करता है, जिससे पीरियड्स नियमित और समय पर आते हैं। जीरे का पानी बनाने के लिए, 1 या 2 चम्मच जीरा रात भर पानी में भिगो कर रखें। सुबह इसे छानकर पी लें। जीरा पानी पीने से पीरियड्स के दर्द में भी आराम मिलता है।
6. अनानास
मासिक धर्म का रक्त मुख्य रूप से गर्भाशय की दीवार के बहाव का परिणाम है। इसीलिए ऐसे खाद्य पदार्थ खाना महत्वपूर्ण है जो गर्भाशय की परत को हटाने या उसे नरम करने में मदद करते हैं। अनानास एक ऐसा फल है क्योंकि इसमें ब्रोमेलैन एंजाइम होता है। इसके अलावा, यह तीखा फल लाल और सफेद रक्त कोशिकाओं के निर्माण में भी मदद करता है। इससे रक्त प्रवाह में सुधार होता है।
7. हल्दी
यदि आप स्वाभाविक रूप से अपने मासिक धर्म को समय से पहले करना चाहती हैं, तो गर्म दूध और शहद के साथ हल्दी का सेवन करें। जब तक आपको मासिक धर्म न आ जाए तब तक इसका सेवन रोजाना करें।
8. एलोवेरा जूस
एलोवेरा जूस आपके मासिक धर्म को नियमित करने और अतिरिक्त वजन कम करने के लिए असरदार उपाय है। यह आपके चयापचय को भी बढ़ाता है और आपके हार्मोनल असंतुलन को ठीक करने और आपके मासिक धर्म की अनियमितताओं का इलाज करने में मदद करता है। लेकिन पीरियड्स के दौरान कभी भी एलोवेरा का इस्तेमाल न करें। इससे गर्भाशय संकुचन बढ़ सकता है।
9. दालचीनी
दालचीनी हमारे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। यह गर्भाशय में रक्त के प्रवाह को नियंत्रित करने में मदद करता है और अनियमित मासिक धर्म का इलाज करता है। यह पीरियड्स के दौरान पेट दर्द, मतली और उल्टी को भी कम करता है।
10. स्वस्थ आहार का सेवन करना
अनियमित पीरियड्स का एक कारण अस्वास्थ्यकर (Unhealthy) खान-पान भी है। फास्ट फूड और अल्कोहल के अत्यधिक सेवन से शरीर में हार्मोनल असंतुलन हो सकता है जिससे अनियमित पीरियड्स हो सकते हैं।
आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आपके आहार में हरी सब्जियां, फल, सूखे मेवे, रेड मीट, मछली और ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल हों जो आपको नियमित रूप से संपूर्ण पोषक तत्व प्रदान करें।
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पेट में गांठ : लक्षण, कारण और उपचार
Specialization:-Gastroenterologist
विशेषज्ञता:-जठरांत्र चिकित्सक
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आइए पहले जानते हैं
पेट में गाँठ की क्या है ?
पेट के क्षेत्र में किसी प्रकार की सूजन या उभार जो पेट के बाहरी तरफ को उभरा हो, उस स्थिति को पेट में गांठ होना कहा जाता है। ज्यादातर मामलों में पेट में नरम गाँठ बनती है। पर कुछ मामलों में यह कठोर भी हो सकती है , जो पूरी तरह से पेट के अंदरूनी कारणों पर निर्भर करता है। पेट में गांठ की समस्याएं ज्यादातर महिलाओं में देखी जाती हैं। महिलाओं की शारीरिक बनावट ऐसी है कि उनके पेट में बच्चेदानी होती है। यही पेट में गांठ की वजह भी बनती है।
पेट में गाँठ के लक्षण
Symptoms Of Stomach Lump
- पेट में दर्द होना
- पेट का फूल जाना
- पेशाब के दौरान दर्द होना
- गांठ के आस-पास जलन होना
- भूख में बदलाव होना
- जी मिचलाना व उलटी जैसा महसूस होना
- वजन उठाते समय दर्द महसूस होना
- छाती में दर्द होना
- कब्ज की समस्या होना
पेट में गांठ होने के कारण
Causes of Lump in Stomach
पेट में गांठ होने के कई कारण हो सकते हैं. इनमें शामिल हैं:
लिपोमा - लिपोमा, त्वचा के अंदर बनने वाली एक कोमल चर्बी की गांठ होती है। ये धीरे-धीरे बढ़ती है। इसको छूने पर हल्की कठोर व रबर जैसी महसूस होती है।
हीमेटोमा - इस स्थिति में में त्वचा के नीचे खून जम जाता है। जिसके परिणामस्वरूप रक्त कोशिकाएँ टूटने लगती हैं। यह आमतौर पर किसी प्रकार की चोट लगने के कारण ही होता है।
हर्निया - जब पेट का कोई अंदरूनी अंग छेद के माध्यम से बाहर आने लगता है तो उस स्थिति को हर्निया कहा जाता है। इन अंगों में मुख्य रूप से पेट की मांसपेशी, ऊतक और बहुत बार आंत पेट की कमजोर दीवार में छेद करके बाहर आ जाती हैं।
पेट की गांठ नरम या कठोर हो सकती है। कुछ लोगों को इसकी वजह से दर्द भी होता है। अगर गांठ के साथ खून आ रहा है, तो यह कैंसर का लक्षण भी हो सकता है। ज्यादातर कैंसर की शुरुआत गांठ से ही होती है। शुरुआत में गांठ छोटी होती है और उसमें दर्द नहीं रहता, इसलिए लोग इसे नजर अंदाज कर देते हैं। लेकिन, इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। तुरंत अपने डॉक्टर से इसकी जांच करानी चाहिए और उचित इलाज कराना चाहिए।
पेट में गांठ का इलाज
Treatment of Stomach Lump
पेट में गांठ का इलाज मुख्य रूप से गांठ के कारण के आधार पर किया जाता है। गांठ के कारण पर निर्भर करते हुए इलाज में दवाएं, ऑपरेशन या अन्य विशेष प्रकार की इलाज प्रक्रिया शामिल हो सकती है।

- हर्निया, कैंसर या फिर आंतों में किसी तरह की परेशानी होने पर डॉक्टर आपको ऑपरेशन की सलाह देता है, जिसमें आपको लेप्रोस्कोपी नामक सर्जिकल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
- कीमोथेरेपी - कीमोथेरेपी के जरिए गांठ का आकार छोटा किया जाता है। जब गांठ का आकार छोटा हो जाता है, तो कीमोथेरेपी बंद कर दी जाती है। इसके बाद ऑपरेशन से इसे निकाल दिया जाता है।
- सिस्ट और हीमेटोमा जैसे सामान्य कारणों की वजह से हुए पेट में गांठ के लिए इलाज की जरूरत नहीं पड़ती है। सामान्यतौर पर यह खुद-ब-खुद ठीक हो जाता है। इसके अलावा गंभीर समस्या न होने पर डॉक्टर दवाईयों के सहारे पेट में गांठ का इलाज करते हैं।
पेट में गांठ से बचाव
Prevention of Stomach Lump
- मल त्यागने पर ज्यादा जोर न लगाएं।
- खाना खाने के बाद लेटने और फिर अधिक शारीरिक गतिविधि न करें।
- ज्यादा भारी चीजें न उठाएं।
- धूम्रपान का त्याग करें।
- Healthy लाइस्टाइल का चुनाव करें।
- रात में हल्का भोजन करें।
- बीमार होने पर जल्द से जल्द उसका इलाज कराएं।
- पेट में किसी तरह की परेशानी होने पर डॉक्टर से संपर्क करें।
- Acid Reflux बनाने वाले खाद्य पदार्थों के उदाहरण का सेवन न करें।
पेट में गांठ के लिए कुछ घरेलू उपचार
Some Home Remedies for Stomach Lump
पेट में गांठ की समस्या लिपोमा, हर्निया, हीमेटोमा, कैंसर, पित्ताशय की पथरी जैसे रोगों के कारण हो जाती है। लेकिन सभी का उपचार घरेलू नुस्खों की मदद से नहीं कर सकते हैं। इनमें सिर्फ चर्बियों की गांठें यानी लिपोमा का हम आसानी से घर पर उपचार कर सकते हैं। पेट में लिपोमा की गांठ से छुटकारा पाने के लिए आप निम्न घरेलू उपाय आजमा सकते हैं।
1 . पेट की गांठ को दूर करने के लिए सुबह खाली पेट कच्ची हल्दी को गर्म पानी में मिलाकर इसका सेवन करें।
2 . गांठ को दूर करने के लिए 10 से 20 ग्राम कचनार के पेड़ की छाल लें और इसे 400ml पानी में उबालकर इसका काढ़ा बना लें। जब ये पानी घटकर 50ml तक रह जाए, तो इस काढ़े को छानकर घूंट-घूंट कर पी लें।
3 . पेट की गांठ दूर करने के लिए एक चुटकी हल्दी पाउडर और चुटकी भर लताकरंज चूर्ण को लाल मूली के रस में मिलाकर पिएं। जल्द लाभ मिलेगा।
4 . गांठ वाली जगह पर बेर के पत्तों से सेक लगाएं।
5. स्मोकिंग और शराब के सेवन से बचें।
6. नियमित रूप से Exercise करना सुनिश्चित करें।
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सर्दियों में सुबह उठकर नींबू की चाय पीने के फायदे
आप हर दिन सुबह उठकर दूध वाली चाय पीते होंगे। बिना दूध की चाय के दिन की शुरुआत नहीं होती होगी। दूध वाली चाय पीते ही ऐसा लगता है जैसे सारी थकान दूर हो गई हो। चाय पीने के फायदे भी कई होते हैं। लेकिन, दूध वाली चाय से कहीं फायदेमंद हर्बल चाय (Herbal Tea) होती है। हालांकि, कई तरह की हर्बल चाय होती है जैसे ग्रीन टी, कैमोमाइल टी, जिंजर टी, लेमन टी। इन सभी चाय को पीने के अपने फायदे और विशेषताएं है।
नींबू की चाय बनाना काफी आसान है। यह बहुत जल्दी बनती है और आमतौर पर नींबू हर घर में होता है। यदि आप स्वस्थ रहना चाहते हैं, तो नींबू की चाय से दिन की शुरुआत करना बेहत फायदेमंद है। इसमें नींबू होने के कारण शरीर को विटामिन C मिलता है और विटामिन C सेहत के लिए बेहद जरूरी है। नींबू की चाय पीने से शरीर के विषाक्त पदार्थ जैसे कुछ बैक्टीरिया, कुछ दवाएं आदि बाहर निकल जाते हैं। शरीर को ऊर्जा मिलती है। Refresh होने के लिए नींबू की चाय पीनी चाहिए।
नींबू वाली चाय पीने के फायदे
Benefits Of Drinking Lemon Tea
Immunity Boost :
नींबू की चाय में विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट, और एंटी-इंफ़्लामेटरी गुण होते हैं। ये गुण इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करते हैं। नींबू की चाय में मौजूद विटामिन C, शरीर के Tissues की वृद्धि, Repair, और विकास के लिए भी जरूरी है। अगर आपको किसी प्रकार का Infection है तो रोजाना 1 कप नींबू की चाय जरूर पिएं।
कोल्ड-फ्लू से आराम :
सर्दी-जुकाम की परेशानी से जूझ रहे लोगों के लिए नींबू की चाय काफी फायदेमंद मानी जाती है। नींबू की चाय में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-वायरल गुण पाया जाता है जो संक्रमण से आपको सुरक्षित रखता है जिससे आप सर्दी-जुकाम से आराम पा सकते हैँ।
बेहतर परिणाम के लिए, आप चाय में अदरक डाल सकते हैं। इसके अलावा, यह गले में दर्द व गले में खराश से भी राहत प्रदान करती है। नींबू की चाय रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immune System) को भी मजबूत बनाती है।
वजन कम करे :
ग्रीन टी की तरह नींबू की चाय या Lemon tea पीने से वजन कम होता है।बढ़ते वजन से परेशान लोगों के लिए नींबू की चाय फायदेमंद होती है। नींबू में मौजूद गुण आपके फैट को कम करके वजन घटाने में असरदार होता है। साथ ही इससे बेली फैट को भी कम किया जा सकता है। नींबू में कैलोरी ना के बराबर होती है, इसलिए आप नींबू की चाय पीकर अपना वजन घटा सकते हैं।
त्वचा के लिए फायदेमंद
नींबू की चाय में कई तरह के गुण होते हैं, जो त्वचा के लिए फायदेमंद होते हैं। नींबू में कसैले गुण पाया जाता है, जो त्वचा से Dead Cells को हटाता है। इसमें उपस्थित Anti-inflammatory गुण मुंहासे, पिंपल्स, और एक्जिमा जैसी समस्याओं से राहत दिलाते हैं। इसके आलावा नींबू में विटामिन - C पाया जाता है जो त्वचा को चमकदार बनाता है। और इसमें साइट्रिक एसिड की मात्रा अधिक होती है, जिससे लीवर में जमा जहरीले पदार्थ आसानी से बाहर निकल जाते हैं।
शरीर को डिटॉक्स करे
शरीर में मौजूद विषाक्त पदार्थों को दूर करने के लिए नींबू की चाय का सेवन करें। नींबू की चाय पीने से बॉडी को डिटॉक्सिफाई किया जा सकता है। नींबू की चाय प्रभावी रूप से शरीर से विषाक्त पदार्थों को नष्ट कर देती है। शरीर से विषाक्त पदार्थों को हटाना जरूरी होता है क्योंकि वे इंफेक्शन और बीमारियों को बढ़ाते हैं। नींबू की चाय का नियमित सेवन शरीर को Detoxifies करता है। और रोग और इंफेक्शन को कम करता है।
अस्थमा जैसी सांस संबंधी समस्याओं से छुटकारा
नींबू की चाय में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लामेटरी गुण आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं। नियमित रूप से नींबू की चाय का सेवन कर आप अस्थमा जैसी सांस संबंधी समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं।
नींबू की चाय बनाने का तरीका
How To Make Lemon Tea
नींबू की चाय बनाने के लिए आपको पानी, चीनी, चाय पत्ती, अदरक और नींबू चाहिए। यह एक तरह की काली चाय ही है, जिसमें खट्टा स्वाद लाने के लिए नींबू का रस मिलाया जाता है। पहले एक बर्तन में एक कप पानी डालें। उसमें अदरक के टुकड़े को कद्दूकस कर थोड़ा गर्म होने दें। अब उसमें एक चम्मच चीनी और एक चौथाई चम्मच चाय पत्ती डालकर उबलने दें। आंच बंद कर दें। इसे कप में छान लें और नींबू का रस अपने स्वादानुसार डालें। नींबू डालते ही इसका स्वाद भी बदल जाता है और इसका रंग हल्का ऑरेंज सा हो जाता है।
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दाद खाज खुजली ठीक करने के घरेलू उपाय
Specialization Dermatologist
विशेषज्ञता:त्वचा विशेषज्ञ
आइए पहले जानते हैं
दाद क्या होता है ?
दाद त्वचा की ऊपरी परत पर होता है। यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में बड़ी ही आसानी से फैल सकता है। दाद को Medical Language में टिनीया (Tinea) कहते हैं। यह एक परतदार त्वचा पर गोल और लाल चकत्ते (red rash) के रूप में दिखाई देता है। इसमें खुजली एवं जलन होती हैं। यह बड़ी ही आसानी से संक्रमित व्यक्ति की चीजें या कपड़े उपयोग करने से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है।
दाद, त्वचा में होने वाला एक fungal infection है। यह कुछ खास तरह के फफूंद की वजह से होता है। दाद, जख्म की तरह दिखता है और तेजी से फैलता है। यह त्वचा पर लाल या भूरे रंग में उभरा हुआ दिखता है। अगर किसी जानवर को दाद हुआ है तो उस जानवर को स्पर्श करने से भी दाद का संक्रमण मनुष्ण के शरीर में फैल सकता है। अगर दाद का समय रहते इलाज न किया जाए, तो इसमें फुंसी हो सकती है और पस भर सकता है।
दाद-खुजली के लक्षण :
Symptoms of Ringworm and Itching:
- त्वचा का लाल पड़ना
- कभी-कभी गोल दाद में छोटे-छोटे दाने होना
- दाद से पस या पानी का निकलना
- खुजली होना
- दाद-खुजली शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैलता है
- यह लाल चकत्ते (Red Rash) के रूप में दिखाई देता है
- दाद वाले चकत्ते बाहरी तरफ से किनारों पर लाल होते है
दाद - खुजली के कारण :
Ringworm - Causes of Itching:
- गर्मी में पसीने की वजह से फंगस को शरीर में फैलने के लिए नमी मिलती है।
- फंगस वाली वस्तुओं को साझा करने से संक्रमण फैलता है।
- किसी प्रभावित जानवर के संपर्क में आने वाली वस्तुओं को छूने से भी दाद हो सकता है।
- शरीर में विटामिन A की कमी के कारण Dry Skin होने लगती है, जिसकी वजह से खुजली की समस्या हो सकती है।
दाद खाज खुजली ठीक करने के घरेलू उपाय
Home Remedies to cure Ringworm and Itching
नारियल का तेल
नारियल का तेल त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए अच्छा माना जाता है। यह न सिर्फ खुजली वाली त्वचा से राहत प्रदान करता है बल्कि त्वचा को चिकना (Smooth) और नरम भी बना देता है। इसलिए प्रभावित क्षेत्र पर नारियल का तेल लगाने से आराम मिलता है।
लहसुन
लहसुन में अजोइना (Ajoene) नाम एक Anti–fungal agent होता है जो फंगल संक्रमण को ठीक करने में मदद करता है। लहसुन के एक टुकड़े को छीलकर उसकी पतली स्लाइस काट लें, प्रभावित क्षेत्र पर पतली स्लाइस को रखें और उसके चारों ओर एक पट्टी लपेट लें और रात भर के लिए इसे छोड़ दें। इसकी जगह पर लहसुन के पेस्ट का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
सेब का सिरका
सेब का सिरका एंटी बैक्टीरियल और एंटी फ़ंगल गुणों से भरपूर होता है। यह स्किन में इंफेक्शन और दाद-खाज खुजली को कम करने में मदद कर सकता है। सेब के सिरके को रूई की सहायता से दाद वाली जगह पर लगाएं। दिन में कम से कम चार से पांच बार इसे दोहराएं। यह दाद की अचूक दवा है।
एलोवेरा
एलोवेरा एंटी-फंगल और जीवाणुरोधी होते है। प्रभावित त्वचा पर सीधे ऐलोवेरा जेल को लगाएं और रात भर के लिए छोड़ दें। यह दाद चकत्ते आदि को ठीक करता है तथा यह त्वचा की स्वस्थ करने के लिए कईं पोषक तत्व और मिनरल प्रदान करता है।
नीम के पत्तों का पेस्ट
नीम के पत्तों का पेस्ट दाद, खाज, खुजली से राहत दिलाने में मदद करता है। नीम के पत्तों में कई पोषक तत्व होते हैं। नीम के पत्तों का पेस्ट बनाने के लिए, आधे चम्मच नीम के पत्ते के पाउडर में एक चम्मच गर्म पानी मिलाकर पेस्ट बना लें। या नीम की ताजी पत्तियों को पीसकर खुजली वाली जगह पर लगाएं। नीम के पत्तों का पेस्ट लगाने के अलावा, आप नीम की ताजी पत्तियों को पानी में उबालकर भी इस्तेमाल कर सकते हैं। पानी को ठंडा करके नहाने से दाद और खुजली में आराम मिलता है।
टमाटर और नींबू का रस
दाद, खाज, खुजली से निजात पाने के लिए टमाटर और नींबू का रस बहुत फायदेमंद है। दोनों में ही विटामिन C पाया जाता है जो कि त्वचा से संबंधित दिक्कतों को दूर करने का काम करता है। इसके लिए टमाटर के जूस में नींबू का रस और इमली का बीज मिलाकर इसे पीस लें फिर इसको प्रभावित जगह पर लगाएं। ऐसा करने से खुजली और दाद से छुटकारा मिलेगा।
दाद- खाज-खुजली से कैसे बचें?
How to avoid ringworm and itching?
- विटामिन-E से युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करें। इसकी मदद से हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है तथा फंगस को नष्ट करने में मदद करता है। विटामिन-E के लिए जैतून का तेल, सूरजमुखी का तेल, अखरोट, मसूर की दाल, पालक, बादाम, तिल आदि का सेवन करें।
- भोजन में लौंग का प्रयोग करें। इसके सेवन से फंगल संक्रमण दूर होता है।
- साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए तथा संक्रमित व्यक्ति द्वारा प्रयोग किए गए कपड़े, वस्तुएँ आदि का प्रयोग नहीं करना चाहिए। ऐसे पालतु जानवरों से भी दूर रहना चाहिए जो संक्रमित होते हैं।
- अधिक पसीने से परहेज रखना चाहिए इसके लिए एंटी-फंगल का इस्तेमाल करें।
- दाद वाली जगह पर बार-बार खुजलाना नहीं चाहिए।
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माइग्रेन क्या है ? लक्षण और घरेलू उपचार
Specialization:-Neurologist
विशेषज्ञता:- न्यूरोलॉजिस्ट
माइग्रेन क्या है?
What is Migraine?
माइग्रेन, जिसे अधिकपारी के नाम से भी जाना जाता है। जो आमतौर पर सिर के एक तरफ बहुत तेज दर्द के साथ होता है। इससे पीड़ित व्यक्ति को सिर दर्द के साथ Nausea, उल्टी और दस्त के लक्षण भी हो सकते हैं। यह अत्यधिक तेज़ दर्द का कारण बन सकता है जो घंटों से लेकर कई दिनों तक रह सकता है। Bright Light और तेज Sound व्यक्ति को अधिक प्रभावित करते है।
कुछ लोगों में सिरदर्द से पहले देखने में परेशानी या आँखों के सामने हल्का धब्बा दिख सकता है। इसके कारण चेहरे के एक तरफ या हाथ या पैर में Tingling और बोलने में कठिनाई भी होती है। कुछ दवाएं माइग्रेन को रोकने और दर्द कम करने में मदद कर सकती हैं। दवा के साथ-साथ lifestyle में बदलाव भी जरूरी है।
माइग्रेन के लक्षण
Migraine symptoms
माइग्रेन एक तेज सिरदर्द है। इसके लक्षण ये हो सकते हैं :
- सिर के एक तरफ तेज दर्द
- तेज रोशनी, तेज आवाज, और तेज गंध से सिरदर्द बढ़ना
- पेट खराब महसूस होना या उल्टी आना
- ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत
- त्वचा में चुभन
- आंखों के नीचे काले घेरे
- ज्यादा गुस्सा आना
- चिड़चिड़ापन
माइग्रेन का अटैक एक घंटे से लेकर कई दिनों तक रह सकता है। यह आमतौर पर सिर के एक तरफ या दोनों हिस्सों को प्रभावित करता है।
माइग्रेन से राहत पाने के लिए घरेलू उपाय :
Home Remedies To Get Relief From Migraine:
रोजाना खूब पानी पिएं
रोजाना खूब पानी पीने की आदत डालें। यदि आप भरपूर मात्रा में पानी नहीं पीते हैं तो इससे आपके शरीर में डिहाइड्रेशन हो जाता है। इस स्थिति में सिरदर्द हो सकता है। डिहाइड्रेशन गंभीर सिरदर्द का कारण होता है। डिाहइड्रेशन से चिड़चिड़ापन होता है और आपकी एकाग्रता भी प्रभावित होती है। इसलिए, अपने शरीर को डिहाइड्रेशन से बचने के लिए हर दिन खूब पानी पिएं और भरपूर मात्रा में रसदार फल खाने की आदत डालें।
अदरक
अदरक माइग्रेन के लक्षणों को रोकने और प्रबंधित करने में प्रभावी है।अदरक में कई फाइटोकेमिकल्स होते हैं जो सिरदर्द को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के लिए असरदार होते हैं। माइग्रेन के लक्षणों से राहत पाने के लिए आप अदरक की चाय बना सकते हैं। या अदरक को कद्दूकस कर पानी में उबालें। इसे कुछ देर तक उबलने दें और फिर छान लें। आप स्वाद के लिए इसमें थोड़ा मीठा मिला सकते हैं। अब इसका सेवन करें।
भोजन में मैग्नीशियम से युक्त पदार्थ शामिल करें।
मैग्नीशियम Blood Sugar Level और Nerve Transmission को बनाए रखने के लिए जरूरी और महत्वपूर्ण Minerals में से एक है। शरीर में मैग्नीशियम की कमी से माइग्रेन का दौरा पड़ सकता है। इसलिए, आहार में मैग्नीशियम शामिल करने से माइग्रेन से छुटकारा मिल सकता है। मैग्नीशियम से भरपूर खाद्य पदार्थ हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, फलियां, मछली, दही आदि हैं।
गुड़ और दूध का सेवन
माइग्रेन के दर्द से राहत पाने के लिए गुड़ और दूध का सेवन किया जा सकता है। इसके लिए, रोजाना सुबह खाली पेट, गुड़ का छोटा टुकड़ा मुंह में रखकर दूध पीना चाहिए। गुड़ खाने से कई तरह की परेशानियों से छुटकारा मिलता है। रोजाना गुड़ को थोड़ी मात्रा में खाने से कब्ज, एसिडिटी, सिरदर्द, गले में खराश जैसी समस्याओं से राहत मिलती है।
पुदीना
पुदीना सिरदर्द और माइग्रेन का भी सबसे अच्छा इलाज है। सिरदर्द होने पर दवाएं लेने से अच्छा है कि आप पुदीने की चाय लें। साथ ही सिर दर्द से राहत के लिए आप अपने माथे पर पुदीने के तेल का मसाज कर सकते हैं। इसके अलावा कई बार सिरदर्द, तनाव और चिंता के कारण होता है, ऐसे में पुदीने को अपनी डाइट में शामिल करें।
कैफीन
चाय, कॉफी में भरपूर मात्रा में कैफीन होता है। माइग्रेन के तेज दर्द में कॉफी पीने से तुरन्त राहत मिलती है, कॉफी में मौजूद कैफीन माइग्रेन में Adenosine के प्रभाव को कम कर देता है। हालांकि ज्यादा कैफीनयुक्त पदार्थ हमारे स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं होते हैं लेकिन एक कप कॉफी आपके स्वास्थ को लाभ पहुंचाती है।
सिर की मालिश
तनाव को दूर करने के लिए सिर की मालिश बहुत कारगर उपाय है माइग्रेन के दर्द को कम करने के लिए सिर के पीछे के हिस्से की मालिश करने से माइग्रेन के दर्द में राहत मिलती है इसके साथ ही हाथ पैरों की मालिश भी करनी चाहिए। इससे शरीर में रक्त संचार बढ़ता है।
दालचीनी
दालचीनी का सेवन करने से माइग्रेन के मरीजों को आराम मिलता है। दालचीनी में Antioxidant, Anti-Inflammation और Anti-biotic गुण होते हैं। दालचीनी को पीसकर इसका पेस्ट बना लें और इस पेस्ट को माथे पर करीब आधे घंटे तक लगाकर रखें। ऐसा करने से माइग्रेन के दर्द से राहत मिलेगी। दालचीनी के तेल से सिर की मालिश करने से सर्दी की वजह से होने वाले सिरदर्द में भी आराम मिलता है।
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