कब्ज होने का कारण, लक्षण और घरेलू उपचार
Specialization:- Gastroenterologist
विशेषज्ञता:- जठरांत्र चिकित्सक
आइए पहले जानते हैं
कब्ज क्या है ?
कब्ज एक सामान्य पाचन सम्बन्धी समस्या है जब किसी व्यक्ति को मल त्यागने में परेशानी या सप्ताह में तीन बार से कम मल त्याग होता है तो इस स्थिति को कब्ज (Constipation) कहते हैं। मल त्याग (Bowel Movement) की अवधि हर इंसान के लिए अलग-अलग हो सकती है कुछ लोगों की Bowel Movement दिन में तीन बार होती हैं तो कुछ लोगों की हफ्ते में कुछ ही बार। अगर सप्ताह में 3 दिन से ज्यादा बार आपकी बॉवेल मूवमेंट नहीं होती है तो इसे ही कब्ज होना कहते हैं। यह थोड़ा गंभीर हो सकता है, क्योंकि इस स्थिति में Stool और ज्यादा सख्त हो जाता है और उसे पास करने में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।
कब्ज के लक्षण
Symptoms Of Constipation
- पेट में भारीपन महसूस होना
- पेट में मरोड़ होना
- शौच के बाद भी पेट साफ नहीं होना
- मल का सख्त होना
- मल त्याग के दौरान जोर लगाना
- नियमित रूप से मल त्याग नहीं होना
- कभी-कभी मतली और उल्टी होना
- पेट में सूजन होना या पेट का फूलना
- सुबह Toilet देर तक बैठे रहना
कब्ज होने के कारण
Causes of Constipation
- डाइट में रेशेदार आहार (केला, सेब, बादाम, अनार, बाजरा, राजमा, दाल, गाजर, चना, मटर आदि) की कमी होना
- मैदा से बने उत्पादों और तेल में तली हुई चीजों का अत्यधिक सेवन करना
- मिर्च और मसालेदार भोजन का अधिक सेवन करना
- कम मात्रा में पानी पीना
- रात में देर से भोजन करना
- अधिक मात्रा में चाय और कॉफी का सेवन करना
- हार्मोन्स में असंतुलन होना
- थायरॉइड की परेशानी होना
- लंबे समय तक दर्द निवारक दवाओं का सेवन करना
- पेशाब को अधिक समय तक रोक कर रखना
- शरीर में पानी की कमी होना
- भोजन को पूरी तरह से चबाए बिना ही ग्रहण करना
- शरीर में कैल्शियम और पोटैशियम की कमी होना
- अधिक मात्रा में मांस का सेवन करना
- आंत या लिवर सम्बन्धी बीमारियों से पीड़ित होना
कब्ज का घरेलू इलाज
Home Remedies for Constipation
कब्ज को ठीक करने के लिए आपको ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए और अपने खाने में फाइबर से बनी चीजों को शामिल करना चाहिए।
गर्म दूध के साथ घी का सेवन सबसे पुराना और असरदार नुस्खा है। इस नुस्खे के 10 से 15 मिनट के अंदर मल त्याग हो जाता है। इसके लिए आपको गुनगुने या गर्म दूध में एक चम्मच घी मिलाकर पीना है। घी मल को नमी देखर नरम करने में मदद करता है। साथ ही गर्म दूध का सेवन पेट को तेजी से साफ करने में मदद करता है।
2. मुनक्के के पानी का सेवन
मुनक्के में फाइबर और Laxative गुण होते हैं, जो Bowel Movement को आसान बनाते हैं। मुनक्के का पानी पेट साफ करता है और मल को ढीला कर कब्ज से राहत दिलाता है। इससे पाचन तंत्र भी मज़बूत होता है। मुनक्के को रात में पानी में भिगोकर रख देना चाहिए और सुबह उठकर उसका सेवन करना चाहिए।
3. जीरा और अजवाइन
जीरा और अजवाइन का सेवन करना पेट की समस्याओं के लिए फायदेमंद माना जाता है। इससे पेट साफ होने के साथ एसिडिटी, उल्टी आना, पेट दर्द, पेट में मरोड़ आदि सभी समस्याओं से जल्द राहत मिलती है। इसके लिए आपको दो चम्मच अजवाइन के साथ दो चम्मच जीरा भूनकर पीसकर उसमें आधा चम्मच काला नमक मिलाएं और गर्म पानी से साथ सेवन करें।
4. सौफ
सौफ कब्ज से राहत दिलाने में मददगार है। सौफ का पानी पीने से पाचन तंत्र को लाभ होता है और कब्ज से राहत मिलती है। सौफ का पानी बनाने के लिए, रात में एक गिलास पानी में दो चम्मच सौफ और मिठास के लिए थोड़ी सी मिश्री (Sugar Candy) भिगोकर रख दें। सुबह इस पानी को छानकर पी लें।
5. मुलेठी
मुलेठी में Anti-Viral, Anti-Inflammatory और Anti-Bacterial गुण होते हैं, जो पाचन तंत्र को बेहतर बनाते हैं। यह कब्ज से राहत देता है। Gastric और Peptic अल्सर को रोकता है। इसके अलावा, यह प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने, बीमारियों और संक्रमणों को दूर रखने में सहायक है। मुलेठी के टुकड़े को चूसकर खाएं या मुलेठी की कुछ छड़ियों को पानी में उबालें और घूंट-घूंट करके पिएं।
6. अलसी का सेवन
अलसी के बीजों में मौजूद तत्व पाचन क्रिया में सुधार करते हैं। अलसी में फाइबर की अच्छी मात्रा होती है। अलसी के बीजों में प्रोटीन, फ़ाइबर और ओमेगा-3 फैटी एसिड की भरपूर मात्रा होती है। अलसी के बीजों के सेवन से कब्ज की समस्या से छुटकारा मिलता है। पेट साफ करने के लिए रोजाना एक से चार चम्मच तक अलसी का सेवन करें। इसे आप दलिया, सूप या ओट्स में मिलाकर खा सकते हैं। चाहें तो एक ग्लास पानी में पिसी हुई अलसी पी सकते हैं। इस दिन में एक या दो बार पीने से कब्ज में फायदा होगा।
7. शहद
शहद कब्ज की समस्या को दूर करने में मदद करता है। कब्ज से राहत पाने के लिए, सुबह खाली पेट एक गिलास गुनगुने पानी में दो चम्मच शहद मिलाकर पियें या रोज सुबह एक चम्मच शहद के साथ नींबू पानी पिएं या दूध में शहद डालकर भी पी सकते हैं।
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हड्डी का फ्रैक्चर - प्रकार, लक्षण और निदान
Specialization:- Orthopedist
विशेषज्ञता:- हड्डी रोग विशेषज्ञ
आइए जानते हैं
हड्डी का फ्रैक्चर क्या है ?
हड्डी का फ्रैक्चर जिसे आम बोलचाल में हड्डी का टूटना भी कहते हैं। यह एक बहुत ही आम चोट है जो किसी भी उम्र के व्यक्तियों को प्रभावित कर सकती हैं। फ्रैक्चर आमतौर पर गिरने, कार दुर्घटना या खेल में चोट जैसे आघात के कारण हो सकता है।
हड्डी का टूटना आंशिक या पूर्ण हो सकता है। फ्रैक्चर को दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है:
Open Fracture : यह तब होता है जब टूटी हुई हड्डी गहरे घाव की तरह दिखाई देती है या टूटी हुई हड्डी त्वचा के आर-पार हो जाती है। इसे Compound fracture के नाम से भी जाना जाता है।
Closed Fracture : Closed Fracture, Muscles के अंदर हड्डी में होता है। इसमें हड्डी Muscles के अंदर टूट जाती है और उस स्थान पर हमें Pain, Blood Clot और नीला पड़ जाता है। Closed Fracture, Tissues और Blood Vessels को नुकसान पहुँचाता है साथ ही इसमें Internal Bleeding का भी Risk रहता है।
हड्डी फ्रैक्चर के प्रकार
Types of Bone Fractures
फ्रेक्चर्स को कई प्रकारों में बांटा गया है जैसे-
1. ट्रांसवर्स फ्रैक्चर (Transverse Fracture)
ट्रांसवर्स फ्रैक्चर में हड्डी दबाव के कारण सीधे टूट जाती है।
2. टोरस फ्रैक्चर (Buckle Fracture)
फ्रैक्चर के इस प्रकार में हड्डी मुड़ जाती है लेकिन टूटने की नोबत नहीं आती है, इस तरह का फ्रैक्चर बच्चों में होना आम बात है, क्योंकि बच्चे अक्सर खेलकूद के दौरान गिर जाते हैं जिसके कारण उन्हें चोट आ जाती हैं या हड्डियां मुड़ जाती हैं।
3. स्ट्रेस फ्रैक्चर (Stress Fracture)
जो व्यक्ति एथलीट या किसी खेल से जुड़े होते हैं उनमें स्ट्रेस फ्रैक्चर होना आम बात है, इस प्रकार के फ्रैक्चर में खिलाड़ी के हड्डी में Strain आ जाती है जिसके कारण हड्डी टूट जाती है।
4. पैथोलॉजिकल फ्रैक्चर (Pathological Fracture)
व्यक्ति में इस टाइप का फ्रैक्चर तभी होता है जब किसी बीमारी के कारण हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, ऐसे में कमजोर हड्डी अपने आप ही टूट जाती है।
5. स्पाइरल फ्रैक्चर (Spiral Fracture)
इस फ्रैक्चर में हड्डी का कोई एक हिस्सा मुड़ जाता है, इस Type के फ्रैक्चर में काफी तकलीफ होती है।
6. प्रभावित फ्रैक्चर (Impacted Fracture)
ये फ्रैक्चर काफी दर्दनाक होता है, इस फ्रैक्चर में हड्डी का एक हिस्सा टूटकर दूसरे हड्डी के अंदर घुस जाता है।
7. इंट्राआर्टिकुलर फ्रैक्चर (Intraarticular Fracture)
इंट्राआर्टिकुलर फ्रैक्चर में joint की सतह पर फ्रैक्चर आ जाता है, जैसे कोहनी, घुटने आदि।
8. ग्रीनस्टिक फ्रैक्चर (Greenstick Fracture)
इस फ्रैक्चर में हड्डी एक तरफ से फ्रैक्चर हो जाती है, लेकिन ये ऐसी स्थिति होती है जब हड्डी पूरी तरह से नहीं टूटती है बल्कि झुक जाती है। ये फ्रैक्चर बच्चों में बहुत जल्दी होता है, क्योंकि बच्चों की हड्डियों में लचीलापन ज्यादा होता है।
9. कम्प्रेशन फ्रैक्चर (Crush Fracture)
कम्प्रेशन फ्रैक्चर ज्यादातर रीढ़ की हड्डी में होता है। जिन लोगों की रीढ़ की हड्डी कमजोर हो जाती हैं उनमें इस तरह का फ्रैक्चर होना आम बात है।
10. फ्रैक्चर डिसलोकेशन (Fracture Dislocation)
इस फ्रैक्चर में हड्डियों का Joint अपनी जगह से हट जाता है लेकिन फ्रैक्चर सिर्फ एक हड्डी में आता है। इसमें काफी दर्द सहना पड़ता है।
11. अलगाव फ्रैक्चर (Avulsion Fracture)
इस फ्रैक्चर में muscles और ligaments में खिंचाव हो जाता है, जिसके कारण फैक्चर हो जाता है।
12. कम्यूटेड फ्रैक्चर (Comminuted Fracture)
कम्यूटेड फ्रैक्चर में हड्डियां कई टुकड़ों में टूट जाती है।
फ्रैक्चर के लक्षण
Symptoms of Fracture
- चोटिल हिस्से के आस-पास सूजन, खरोंच या संवेदनशीलता होना
- कोई हिस्सा जो मुड़ा हुआ, Deformed या अपनी जगह से अलग दिखता है
- चोटग्रस्त हिस्से का सामान्य रूप से उपयोग करने में असमर्थता या उस जगह पर दर्द होना
- संवेदनशील स्थान पर सुन्नपन या मोड़ने पर दर्द
- चोटिल होने पर झटके या चटखने की आवाज सुनाई देना
- चोट की जगह पर वज़न डालने, उसे छूने, उसे दबाने, या उसे हिलाने पर दर्द होना
फ्रैक्चर का निदान
Fracture Diagnosis
हड्डी के फ्रैक्चर की पहचान करने के लिए डॉक्टर द्वारा शारीरिक परीक्षण और imaging tests किए जाएंगे। हड्डी के फ्रैक्चर का निदान करने के लिए किए जाने वाले परीक्षण हैं
- एक्स-रे : एक्स-रे द्वारा किसी भी फ्रैक्चर की पुष्टि की जाती है और देखा जाता है कि हड्डियां कितनी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।
- Magnetic Resonance Imaging (MRI) : MRI से हड्डी के भीतर की चोट दिखती है। यह छोटे फ्रैक्चर का पता लगा सकती है, जो एक्स-रे में दिखाई नहीं देते। MRI से हड्डी के भीतर की सूजन या खरोंच भी दिखाई देती है।
- सीटी स्कैन : सीटी स्कैन किसी फ्रैक्चर हुए जोड़ की सतह और किसी फ्रैक्चर के उन क्षेत्रों का बारीक विवरण दिखा सकती है जो Undamaged Bone से ढँके होते हैं। सीटी स्कैन और MRI विशेषकर उन Soft Tissue को दिखा सकती है, जो आमतौर पर एक्स-रे पर दिखाई नहीं देते।
- हड्डी स्कैन: हड्डी स्कैन का उपयोग स्वास्थ्य देखभाल चिकित्सकों द्वारा उन फ्रैक्चर का पता लगाने के लिए किया जाता है जो एक्स-रे पर दिखाई नहीं देते हैं। इस स्कैन में अधिक समय लगता है (अक्सर दो बार चार घंटे का अंतर होता है), लेकिन यह कुछ फ्रैक्चर जैसे हिप फ्रैक्चर, पैरों या पैरों में तनाव फ्रैक्चर, या रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर आदि का पता लगाने में सहायक है।
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मुंहासे होने के कारण और घरेलू उपचार
Specialization:- Dermatologist
विशेषज्ञता:- त्वचा विशेषज्ञ
मुँहासे त्वचा संबंधी आम रोगों में सबसे ज्यादा परेशान करने वाली समस्या है क्योंकि इसका सीधा असर आपकी सुंदरता पर पड़ता है। आमतौर पर 17 से 21 वर्ष की उम्र में मुँहासों का होना सामान्य है। क्योंकि इस उम्र में हार्मोन्स जैसे- एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन घटते और बढ़ते रहते हैं। जिस कारण चेहरे पर मुँहासे होने लगते हैं।
मुंहासे क्या है ?
What is Acne?
मुंहासे (Acne) की समस्या एक आम Skin Problem है, जो किसी भी उम्र के व्यक्ति को परेशान कर सकती है। जिनकी Skin, Oily होती है उन्हें ये समस्या ज्यादा परेशान करती है इसलिए वो इसे ज्यादा गंभीरता से लेते हैं। बहुत से लोग सोचते हैं कि ज्यादा तला-भुना खा लेने से ये समस्या होती है लेकिन यह समस्या हमारी Skin के भीतर तेल बनाने वाली ग्रंथियों और बालों के रोम (Hair Follicles) में सूजन आने के कारण होती है। बालों के रोम हमारी Skin के नीचे मौजूद होते हैं। ये रोम हमारी त्वचा के भीतर मौजूद Tissue जैसी कई संरचनाओं से बने होते हैं, जो बालों के विकास में मदद करते हैं। तेल बनाने वाली ग्रंथियां, जब तेल का उत्पादन करती हैं तो आपकी Skin के साथ-साथ आपके बालों को भी Moisturize करती हैं। मुंहासे की समस्या तब पैदा होती है जब Skin से निकलने वाले ऑयल का उत्पादन बढ़ जाता है और Skin Cells के फैलाव में कमी आ जाती है। इस स्थिति के कारण Skin Cells ब्लॉक हो जाते हैं और उनमें मौजूद ऑयल वहीं रुक जाता है। जिसके परिणामस्वरूप सूजन और मुंहासे हो जाते हैं।
मुँहासे होने के कारण
Causes of Acne
मुंहासे निकलने के कई कारण हो सकते हैं:
- अत्यधिक तला - भुना या मसालेदार खाना, खाना
- बैक्टीरिया के कारण
- गंदगी
- हार्मोन असुंतलन के कारण
- विटामिन A की कमी
- त्वचा का अधिक Oily होना
- रोम छिद्रों का भर जाना
- अत्यधिक मानसिक तनाव लेने के कारण
मुंहासे दूर करने के लिए घरेलू इलाज
Home Remedies to get rid of Acne
1. हल्दी
हल्दी Antibacterial और Anti-inflammatory प्राकृतिक गुणों के लिए जानी जाती है। हल्दी का इस्तेमाल करना मुहांसे दूर करने का काफी फायदेमंद घरेलू नुस्खा है। 1/2 - 1/4 चम्मच हल्दी, एक छोटा चम्मच चन्दन पाउडर के साथ मिलाकर गुलाब जल या सादे पानी में घोलकर एक गाढ़ा पेस्ट बनाएं। चेहरे में आधा घण्टे तक मास्क के रूप में लगाकर सादे पानी से धो लें। अगर त्वचा रूखी है तो मास्क धूलने के बाद चेहरे पर गुलाब जल लगा लें।
2. नींबू का रस
अपने Astringent और Exfoliating गुणों के कारण, नींबू का रस मुँहासे के उपचार के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। एक कटोरी में एक नींबू निचोड़ें और उसमें गुलाब जल की कुछ बूंदें मिलाएं। इस मिश्रण को Cotton से प्रभावित जगह जैसे गर्दन या चेहरे पर लगाएं। यह न केवल पिंपल्स को बनने से रोकेगा बल्कि त्वचा को चमकदार बनाने और दाग-धब्बों को कम करने में भी मदद करेगा। मुंहासों और फुंसियों पर नियंत्रण रखने का यह आपका एक अचूक प्राकृतिक नुस्खा है।
3. दालचीनी
4. एलोविरा
एलोवेरा में Inflammatory और Soothing गुण होते हैं। एलोवेरा जेल को सीधे प्रभावित क्षेत्रों पर लगाएं। आप त्वचा की देखभाल के लिए किसी हर्बल स्टोर से एलोवेरा जेल भी खरीद सकते हैं , लेकिन सुनिश्चित करें कि इसमें कोई Chemical मिला हुआ न हो।
5. दलिया मास्क:
पके हुए दलिया को शहद के साथ मिलाएं और इसे अपने चेहरे पर मास्क की तरह लगाएं। दलिया अतिरिक्त तेल को सोख सकता है और त्वचा को आराम पहुंचाता है।
6. हाइड्रेटेड रहें
विषाक्त पदार्थों (जैसे : बैक्टीरिया) को बाहर निकालने और अपनी त्वचा को हाइड्रेटेड रखने में मदद के लिए खूब पानी पियें।
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Food Poisoning - लक्षण, कारण और घरेलू उपाय
Specialization:- Gastroenterologist
विशेषज्ञता:- जठरांत्र चिकित्सक
फूड पॉइजनिंग क्या होती है?
What is Food Poisoning?
Food Poisoning एक तरह का Infection है, जो Staphylococcus नामक Bacteria, Viruses या अन्य Bacteria के कारण होता है। जब Staphylococcus Bacteria किसी खाद्य पदार्थ को खराब कर देता है, तो उसे खाने से Food Poisoning होती है। इस कारण उल्टी और डायरिया जैसी समस्या होती है। इसके अलावा, Food Poisoning की समस्या E.coli Bacteria के कारण भी हो सकती है। यह गंदा पानी पीने से शरीर में आ सकता है।
फूड पॉइजनिंग के लक्षण
Symptoms Of Food Poisoning
- पेट में ऐंठन या मरोड़ होना
- दस्त लगना
- पेट में दर्द होना
- जी मिचलाना
- उल्टी होना
- भूख न लगना
- बुखार आना
- कमजोरी होना
- सिर दर्द
फूड पॉइजनिंग के कारण
Causes of Food Poisoning
- सूक्ष्मजीवों द्वारा दूषित भोजन खाने से
- अनियमित दिनचर्या और गलत खान-पान
- खाना खाने से पहले हाथों को ठीक से न धोना
- खाने-पीने के बर्तनों का गंदा होना
- खराब डेयरी उत्पाद लेने से
- खाद्य पदार्थों में जहरीले पदार्थों का मिलना
- अधपका मांस खाने से
- कच्चा दूध पीने से
फूड पॉइजनिंग से बचाव
Prevention of Food Poisoning
- साफ पानी पिए (हो सके तो पानी उबालकर पिएं )।
- कच्ची सब्जियों और फलो को नमक वाले पानी में धो कर इस्तेमाल करे।
- पके हुए खाने को देर तक फ्रिज में न रखें।
- खाने को हमेशा ढक कर रखें।
- किसी संक्रमित और गन्दी वस्तु को छुने के बाद अपने हाथो को साबुन से अवश्य धोए या Sanitizer का प्रयोग करें। बाहर का खाना खाने से बचे।
- बासी या खराब खाना खाने से बचें।
- सफाई का ध्यान रखें।
फूड पॉइजनिंग का घरेलू इलाज
Home Remedies for Food Poisoning
1. Apple Cider Vinegar (ACV)
यह अपने क्षारीय प्रभाव के कारण Food Poisoning को ठीक करने के लिए सबसे अच्छे उपचारों में से एक है। क्षारीय प्रभाव आपके पेट में Acidity को कम करता है और Food Poisoning के लक्षणों से राहत दिलाने में मदद करता है। एक कप गर्म पानी में 2-3 चम्मच ACV मिलाएं। खाना खाने से पहले इसका सेवन करें।
2. दही और मेथी के बीज (दही और मेथी)
Food Poisoning को ठीक करने के लिए यह एक बेहतरीन उपाय है। दही में antibacterial गुण होते हैं जो Food Poisoning पैदा करने वाले बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करते हैं। इसके अलावा, मेथी के बीज में घुलनशील फाइबर की उच्च मात्रा होती है जो पानी को अवशोषित करती है और मल में भारीपन लाती है जिससे भोजन को आगे बढ़ने में मदद मिलती है। लगभग एक चम्मच दही और मेथी के बीज का सेवन करें। बीजों को बिना चबाएं निगल लें।
3. नींबू
नींबू में मौजूद मजबूत Anti-inflammatory, Antiviral और Antibacterial गुण Food Poisioning पैदा करने वाले बैक्टीरिया को मारते हैं। लगभग एक चम्मच नींबू के रस को चीनी के साथ मिलाएं और इसका सेवन करें। आप इसे गुनगुने पानी का भी इस्तेमाल क्र सकते हैं।
4. अदरक
Food Poisioning के लक्षणों को कम करने में अदरक अहम भूमिका निभाता है। यह Food Poisioning के कारण होने वाली मतली या सिरदर्द की समस्या से राहत दिलाने में मदद करता है। एक कप पानी में लगभग एक चम्मच कसा हुआ अदरक डालकर उबालें। स्वादानुसार शहद या चीनी मिला लें। आप सीधे अदरक के टुकड़ों का भी सेवन कर सकते हैं।
5. केले
Food Poisioning को ठीक करने के लिए केला एक फायदेमंद उपाय है क्योंकि यह बहुत हल्का,कम वसा और कम डाइटरी फाइबर वाला होता है और पचाने में आसान होता है। Food Poisioning से जल्दी रिकवरी और उसके प्रभाव को कम करने के लिए केला खाना बहुत ही प्रभावशाली उपाय है। प्रतिदिन कम से कम एक पका हुआ केला खाएं या आप एक गिलास केले का शेक भी ले सकते हैं।
6. शहद
अपने Antibacterial और Antifungal गुणों के कारण, शहद सबसे प्रभावी Food Poisioning उपचारों में से एक है। यह Food Poisioning के प्रभावों को कम करने में मदद करता है। लगभग एक चम्मच शहद दिन में तीन बार खाएं। या आप इसे चाय या नींबू पानी के साथ भी ले सकते हैं।
7. जीरा
Food Poisioning के इलाज के लिए जीरा बहुत फायदेमंद होता है। यह आपके शरीर में मौजूद पाचन एंजाइमों (भोजन को तोड़ने वाले) की गतिविधि को बढ़ाता है, जिससे संभावित रूप से पाचन में तेजी आती है। यह पेट की सूजन और दर्द को कम करता है।एक कप पानी में जीरा उबालें और इसमें धनिये के पत्त्तों का रस डालें और दिन में दो बार इसका सेवन करें। आप नमक, जीरा और हींग का मिश्रण भी ले सकते हैं । इसका सेवन दिन में 2 या 3 बार करें।
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पैरालिसिस - लक्षण, कारण और उपचार
Specialization:-Neurologist
विशेषज्ञता:- न्यूरोलॉजिस्ट
पैरालिसिस क्या होता है ?
What is paralysis?
पैरालिसिस जिसे लकवा या पक्षाघात भी कहा जाता है। यह एक ऐसी स्थिति है जो एक या एक से अधिक मांसपेशियों के समूह की कार्यप्रणाली प्रभावित करती है। इस स्थिति में, शरीर के किसी एक हिस्से की मांसपेशियाँ काम करना बंद कर देती हैं। पैरालायसिस या लकवा होने पर शरीर के हिस्से में सनसनी या महसूस करने की कमी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है, जब हमारे Brain और Muscles के बीच संचार या संदेश का आदान-प्रदान ठीक से नहीं हो पाता है, और इससे सोचने-समझने की क्षमता में भी कमी आती है।
पैरालायसिस या लकवा, Nerve Damage के कारण होता है। हमारे शरीर के नर्वस सिस्टम में Nerve का एक Complex Network होता है, जो ब्रेन से हमारे Muscles तक Signals Transmit करता है, यानी जो भी Specific Movements होते हैं (साँस लेना, चलना, सोचना और महसूस करना आदि) उन्हें करने के लिए, उन कार्यों की जानकारी देता है। जब Nerve System को कुछ क्षति होती है, तो उसके कारण यह संचार बाधित होता है, जिससे पैरालायसिस या लखवा जैसी स्थिति उत्पन्न होती है। Nerve System की यह क्षति बहुत से कारणों से हो सकती है, जैसे स्ट्रोक (जो मस्तिष्क के एक क्षेत्र में रक्त के प्रवाह को बाधित करता है), रीढ़ की हड्डी की चोट (जो मस्तिष्क से संकेतों को शरीर के बाकी हिस्सों तक पहुँचने से रोकती है), या कुछ Genetic Disorders जो Nerve Function को प्रभावित कर सकते हैं।
पैरालिसिस के लक्षण
Symptoms Of Paralysis
- मांसपेशियों में एंठन और दर्द होना
- मांसपेशियों में कमजोरी होना
- मुंह से लार गिरना
- सिर दर्द
- सोचने-समझने की क्षमता में कमी
- चेहरे के एक तरफ के हिस्से में कमजोरी होना
- देखने और सुनने की क्षमता में बदलाव
- Mood और व्यवहार में बदलाव होना
- आंशिक रूप से या पूरी तरह से आपके शरीर के किसी हिस्से या पूरे हिस्से को हिलाने में असमर्थ होना
पैरालिसिस के प्रकार
Types Of Paralysis
Monoplegia - इस प्रकार के पैरालायसिस में शरीर का एक अंग प्रभावित होता है, सामान्यतः एक बाँह प्रभावित हो सकती है। मोनोपलेजिया होने के बाद व्यक्ति को प्रभावित अंग में हलचल या सनसनी महसूस नहीं होती है।
Hemiplegia - इस प्रकार के पैरालायसिस में शरीर के एक तरफ का हिस्सा प्रभावित होता है, जैसे एक तरफ का हाथ, पैर और कभी-कभी एक तरफ का चेहरा भी प्रभावित हो सकता है।
Paraplegia - इस प्रकार के पैरालायसिस में दोनों पैर और अक्सर धड़ का निचला हिस्सा (lower part of the torso) पैरालायसिस हो जाते हैं। इस दौरान चलने में दिक्कत, पैरों को हिलाने में कठिनाई या कमर के नीचे कुछ भी महसूस नहीं होता है।
Quadriplegia - Quadriplegia, जिसे tetraplegia भी कहा जाता है, यह गर्दन के नीचे का लकवा है। इसमें आमतौर पर व्यक्ति के दोनों हाथ, दोनों पैर और धड़ प्रभावित होता है।
पैरालिसिस का इलाज
Treatment Of Paralysis
पैरालिसिस एक Permanent Condition होती है, लेकिन कुछ उपचार लक्षणों को प्रबंधित करने, जटिलताओं को रोकने और जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद कर सकते हैं। लकवा या पैरालिसिस के उपचार के लिए उपचार योजना लकवा के कारण, इसकी सीमा और व्यक्ति के संपूर्ण स्वास्थ्य पर निर्भर करती है।
लकवा के उपचार में शामिल हैं:
1. Physical Therapy :
नियमित रूप से Physical Therapy के द्वारा, मांसपेशियों की ताकत में सुधार, लचीलापन बढ़ाने और समग्र गतिशीलता को बढ़ाने में मदद मिलती है।
नियमित रूप से Physical Therapy के द्वारा, मांसपेशियों की ताकत में सुधार, लचीलापन बढ़ाने और समग्र गतिशीलता को बढ़ाने में मदद मिलती है।
2. Occupational Therapy : ऑक्यूपेशनल थेरेपी की मदद से व्यक्ति के लकवाग्रस्त होने के बावजूद, उसे ड्रेसिंग, खाने और स्नान करने जैसे रोजमर्रा के कार्यों को करने के लिए नए तरीकों को सीखने में मदद मिलती है।
3. Medicines : कुछ दवाइयों के उपयोग से लकवा के लक्षणों को प्रबंधित किया जा सकता है। इन दवाइयों में, टाइट या कठोर मांसपेशियों को आराम देने वाले, बेचैनी के लिए दर्द निवारक और Bladder Control Problems के लिए Anticholinergics शामिल हैं।
4. सर्जरी : कुछ Cases में, पैरालायसिस के अंतर्निहित कारण को ठीक करने, blockages को दूर करने या कार्य में सुधार करने के लिए सर्जरी का उपयोग किया जा सकता है।
5. सहायक उपकरण : चलने फिरने में मदद के लिए व्हीलचेयर, ब्रेसिज़ और मोबाइल स्कूटर या अन्य उपकरण का उपयोग।
पैरालिसिस से रोकथाम
Paralysis prevention
पक्षाघात की रोकथाम के लिए मुख्य रूप से स्ट्रोक और दर्दनाक चोट जैसे जोखिम कारकों से प्रबंधित करना आवश्यक है। पैरालिसिस का कारण बनने वाली स्थितियों के जोखिम को कम करने के लिए, संपूर्ण स्वास्थ्य को स्वस्थ को बनाए रखना और एक स्वस्थ जीवन शैली अपनाना आवश्यक है।
- स्वस्थ आहार लें।
- नियमित शारीरिक व्यायाम करें।
- नियमित चिकित्सा जाँच करवाएं।
- तंबाकू, शराब या अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करना छोड़ दें।
- सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करना और चोटों को रोकने के लिए सावधानी बरतना आवश्यक है।
- पैरालिसिस का कारण बनने वाली बीमारियों जैसे पोलियो, के खिलाफ टीकाकरण करवाएं।
हम आपकी सहायता किस तरह से कर सकते है?:-How can we help you?:- - प्रशिक्षित स्टाफ द्वारा उचित देखभाल
- रोगी को शिक्षा और आत्म-प्रबंधन
- रोगी को प्रशिक्षित स्टाफ द्वारा योग शिक्षा और ध्यान लगाने में मार्गदर्शन
- उचित मार्गदर्शन
- उचित सलाह डॉक्टर द्वारा परामर्श {proper consultation by doctor}
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एसिडिटी - लक्षण, कारण और घरेलू उपचार
Specialization:-Gastroenterologistविशेषज्ञता:-जठरांत्र चिकित्सक
आइए पहले जानते हैं:-
एसिडिटी क्या है ?:-
भोजन करने के बाद जब भोजन पेट के अंदर पाचन तंत्र में पहुंचता है, तब इस भोजन को पचाने के लिए एक एसिड बनता है। सामान्य रूप से हमारा पेट हाइड्रोक्लोरिक एसिड का स्राव करता है जो खाने को पचाने और तोड़ने का काम करता है। जब यह एसिड पेट में जरूरत से ज्यादा बनने लगे तो एसिडिटी हो जाती है। इससे पेट में जलन होने लगती है, जो छाती तक पहुंच जाती है। इसे हार्ट बर्निंग भी कहा जाता है।
एसिडिटी के लक्षण:-
Symptoms of Acidity:-
- सीने में जलन
- खट्टी डकारें आना
- पेट फूलना
- मतली और उल्टी होना
- गले में घरघराहट होना
- सांस लेते समय दुर्गंध आना
- सिर और पेट में दर्द
- भोजन करने के बाद कुछ घंटो तक सीने में जलन लगातार बने रहना
एसिडिटी के कारण:-
Causes Of Acidity:-
- नॉन वेजिटेरियन और स्पासी फूड का अत्यधिक सेवन
- भोजन के समय अत्यधिक पानी पीना
- अधिक समय तक भूखा रहना
- पेट की बीमारियां जैसे Peptic Ulcer, Gastroesophageal Reflux Disease, पेट में मरोड़, आदि।
- नॉन-स्टेरायडल एंटी इन्फ्लामेट्री ड्रग जैसी दवाओं का सेवन
- अत्यधिक चाय पीना और खाना कम खाना
- जल्दी - जल्दी खाना खाना या जरूरत से ज्यादा खाना
एसिडिटी के लिए घरेलू उपचार:-
Home Remedies for Acidity:-
एसिडिटी की समस्या से राहत पाने के लिए ये घरेलू उपाय अपनाए जा सकते हैं :
1. गुनगुना पानी पीना -
रोज़ सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीने से एसिडिटी की समस्या से राहत मिलती है। गुनगुना पानी पीने से पाचन बेहतर होता है और Metabolism तेज होता है। गुनगुना पानी Natural Detoxifier की तरह काम करता है।
2. सौंफ का पानी -
सौंफ के बीजों का सेवन करने से शरीर पर क्षारीय प्रभाव पड़ता है। वे पेट के अतिरिक्त एसिड को बेअसर करने में मदद करते हैं। 1 चम्मच सौंफ को 1 गिलास पानी में 3-5 मिनट के लिए उबालें, छान लें और घूंट-घूंट करके पिएं। पाचन को बेहतर बनाए रखने के लिए भोजन से एक घंटे पहले या बाद सौंफ की चाय पिएं।
3. जीरे का पानी -
जीरा पाचन रस को उत्तेजित करता है और एसिडिटी और अपच जैसी पेट संबंधी समस्याओं को दूर रखता है। दो चम्मच जीरो को एक ग्लास पानी में रातभर भिगो कर रख दें। सुबह इस पानी को छानकर पिएं। आप चाहें तो स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें दालचीनी पाउडर या नमक भी मिला सकते हैं। खाली पेट जीरे का पानी पीने से शरीर में यूरिक एसिड का स्तर सही रहता है।
4. दही का सेवन -
दही में प्रोबायोटिक गुण होते हैं, जो पाचन को सही रखते हैं। दही खाने से पेट को Healthy बैक्टीरिया मिलते हैं, जिससे एसिडिटी, गैस, और जलन जैसी समस्याएं नहीं होतीं। दही खाने से पेट ठंडा और शांत रहता है।
5. अदरक -
अदरक में Anti-Inflammatory तत्व मौजूद होते हैं, जो पाचन शक्ति के लिए मददगार होते हैं। आप एसिडिटी से राहत पाने के लिए अदरक के टुकड़े को चबा सकते हैं। चाहें तो आप इसे पानी में उबाल कर, छान लें। जब पानी गुनगुना हो जाए, तो इसे पी सकते हैं।
6. छाछ पीना -
छाछ में लैक्टिक एसिड और स्वस्थ बैक्टीरिया होते हैं जो पाचन में मदद करते हैं। अगर आपको एसिडिटी की समस्या है तो खाने के बाद एक कप छाछ का सेवन एसिडिटी से तुरंत राहत पाने में मदद करता है। इससे पेट की जलन से भी राहत मिलती है। छाछ में 90 प्रतिशत पानी होता है, इसलिए इसका सेवन आपके शरीर में हाइड्रेशन को बनाए रखने में मदद करता है।

































