ट्रॉमा - लक्षण, कारण और उपचार
Specialization:-Neurology
(विशेषज्ञता):-तंत्रिका-विज्ञान
ट्रॉमा, किसी Accident या किसी प्राकृतिक आपदा जैसे भयानक घटना की वजह से होने वाली एक घटना है यह एक तरह की भावनात्मक प्रतिक्रिया (Emotional Response) है जिसमें घटना के तुरंत बाद व्यक्ति सदमें में चले जाता है बार-बार पुरानी बातों को याद करना, रिश्तों में तनाव और यहां तक कि सिरदर्द और मतली जैसे शारीरिक लक्षण भी दिख सकते हैं हालांकि, इस तरह की भावनाएं बिल्कुल आम बात हैं, लेकिन कुछ लोग इनसे पीछा छुड़ाकर आगे नहीं बढ़ पाते हैं। ऐसे में Psychologists से परामर्श करना अति आवश्यक है।
ट्रॉमा का व्यक्ति के जीवन पर Short Time के लिए भी असर पड़ सकता है और Long Term असर भी देखने को मिल सकता है। वह Helpless, Numb और Overwhelmed महसूस कर सकता है। यहां तक कि व्यक्ति को अपनी भावनाएं Express करने में भी समस्या हो सकती है।
ट्रॉमा के कारण
Causes of Trauma
ट्रॉमा के कई कारण हो सकते हैं। उनमें से कुछ प्रमुख कारणों हैं –
- किसी के द्वारा धमकाना (Bullying)
- Harassed होना
- बलात्कार
- Accident होना
- जानलेवा बीमारी की चपेट में आने पर
- किसी प्रियजन की अचानक मृत्यु
- किसी हमले का शिकार होना
- किसी के द्वारा अपहरण किए जाने पर
- आतंकवादी घटना में फंसना
- प्राकृतिक आपदा का शिकार होना
- किसी के साथ डरावनी घटना होते देखना
हालाँकि ट्रॉमा अक्सर किसी दर्दनाक घटना के कारण होता है, लेकिन यह हमेशा उससे जुड़ा नहीं होता है। कभी-कभी, दूर से कुछ देखने के बाद किसी व्यक्ति को झटका लगना भी संभव है। विशेष रूप से छोटे बच्चे इस स्थिति के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं और किसी दर्दनाक घटना के घटित होने के बाद उनकी मनोवैज्ञानिक जांच की जानी चाहिए।
ट्रॉमा के लक्षण
Symptoms of Trauma
ट्रॉमा के लक्षण मामूली से बहुत गंभीर तक हो सकते हैं। ट्रॉमा के लक्षण इस तरह के होते हैं :
- अत्यधिक गुस्सा आना
- डर लगना
- हर समय उदासी रहना
- किसी से बात करने में झिझकना
- बिना बात के चिंता करना
- अत्यधिक Depression में रहना
- Body Numbness
- चिड़चिड़ापन होना
- किसी भी काम में ध्यान न होना
ट्रॉमा से गुजर रहे लोग के लिए अपनी भावनाओं पर काबू पाना मुश्किल हो जाता है और कई बार वह दूसरों से दूरी बना लेते हैं। ट्रॉमा से गुजर रहे लोग बार-बार बीती बातों में ही उलझे रहते हैं, जिससे कि उनके साथ हुई वह भयानक घटना उन्हें फिर से याद आ जाती है। यही नहीं डरावने सपने आना भी इस समस्या में आम है।
ट्रॉमा का इलाज
Treatment of Trauma
कई तरह की इलाज प्रक्रियाओं के जरिए ट्रॉमा के लक्षणों से राहत मिल सकती है। ट्रॉमा से निपटने के लिए सबसे पहले थेरैपी का ही इस्तेमाल किया जाता है।
Cognitive Behavioral Therapy :
Cognitive Behavioral Therapy(CBT) को आम भाषा में Talk Therapy भी कहा जाता है। यह एक तरह की थेरेपी है, जिसमें Psychologist या Counselor से संपर्क किया जाता है। इसमें mental stress की वजह से आई Negative Thinking को बदलकर Positive Life की तरफ़ लाने की कोशिश की जाती है। इसे आमतौर पर Mental Health को बनाए रखने के लिए प्रयोग में लाया जाता है। CBT का प्रभाव दवा की तुलना में लंबे समय तक रहता है जिससे व्यक्ति को भविष्य में स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।
Eye Movement Desensitization and Reprocessing :
Eye Movement Desensitization and Reprocessing (EMDR) एक साइकोथेरेपी है। यह एक ऐसी थेरेपी है जिसमें आंखों की हरकतों के ज़रिए बीमारी का इलाज किया जा सकता है। इसके अलावा, इसका इस्तेमाल वयस्कों और बच्चों में Anxiety Disorders, Depression और अन्य Clinical Problem के इलाज के लिए भी किया जाता है।
Acupoint Stimulation :
Acupressure एक प्राचीन इलाज का तरीका है। इसमें शरीर के विभिन्न हिस्सों के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर दबाव डालकर बीमारी को ठीक करने की कोशिश की जाती है। हमारे शरीर के मुख्य अंगों के Pressure Points पैरों के तलवे में और हथेलियों में होते हैं।
हम आपकी सहायता किस तरह से कर सकते है?:-How can we help you?:- - प्रशिक्षित फिजियोथेरेपिस्ट द्वारा फिज़ियोथेरेपी
- रोगी को शिक्षा और आत्म-प्रबंधन
- फिजियोथेरेपी अभ्यास द्वारा पार्किंसंस के परिणामों को कम करने और शक्ति, धीरज, लचीलेपन और संतुलन में गिरावट को कम करने में मदद
- चाल, संतुलन, मैनुअल गतिविधियों में सुधार और गिरावट के जोखिम को कम करने पर ध्यान
- उचित मार्गदर्शन
OUR SERVICES Click Here
- प्रशिक्षित फिजियोथेरेपिस्ट द्वारा फिज़ियोथेरेपी
- रोगी को शिक्षा और आत्म-प्रबंधन
- फिजियोथेरेपी अभ्यास द्वारा पार्किंसंस के परिणामों को कम करने और शक्ति, धीरज, लचीलेपन और संतुलन में गिरावट को कम करने में मदद
- चाल, संतुलन, मैनुअल गतिविधियों में सुधार और गिरावट के जोखिम को कम करने पर ध्यान
- उचित मार्गदर्शन
- Physiotherapy
- Doctor Consultations
- Nursing
- Trained Attendants
- Lab Tests
- Counselling
- Web Development
- Education & Training
- Digital Marketing
पार्किंसंस रोग क्या है?
Specialization:-Neurology
(विशेषज्ञता):-तंत्रिका-विज्ञान
पार्किंसंस रोग एक प्रगतिशील विकार है,जो तंत्रिका तंत्र और तंत्रिकाओं द्वारा नियंत्रित शरीर के हिस्सों को प्रभावित करता है। यह एक अपक्षयी मस्तिष्क रोग है जो मांसपेशियों के नियंत्रण को प्रभावित करता है। लक्षण आमतौर पर धीरे-धीरे शुरू होते हैं और समय के साथ बिगड़ते जाते हैं।
पार्किंसन रोग दिमाग के उस हिस्से की बीमारी के कारण होता है, जो गतिविधि को समन्वित करने में सहायता करती हैं। अक्सर, सबसे आम लक्षण कंपन होता है जो मांसपेशियों की आराम वाली स्थिति में होता है। मांसपेशियाँ कड़ी(Stiffen) हो जाती हैं, गतिविधि धीमी और असमन्वित हो जाती है,तथा आसानी से संतुलन खो जाता है।
लक्षण:-
- कंपन,कंपकंपी,
- मांसपेशियों में जकड़न,कठोरता
- संतुलन की हानि
- गति धीमी होना
- चलने में कठिनाई
- नींद में कमी
- वजन में कमी
- कब्जियत
- जल्दी सांस भर आना
- पेशाब करने में रुकावट
- चक्कर आना
- खडे होने पर अंधेरा आना
- सेक्स में कमजोरी
- जोड़ों में दर्द
कारण:-
- दुर्घटना चोट या मानसिक सदमें
- मेडिकोलीगल कोर्ट केसेस
- पार्किंसन रोग आमतौर पर 55 वर्ष की आयु के बाद विकसित होता है, हालांकि 30-40 वर्ष के लोगों को भी प्रभावित कर सकता है. एक अनुमान के मुताबिक हर साल पार्किंसंस रोग के 60,000 नए मामलों का निदान किया जाता है|
उपचार:-
पार्किंसन रोग का कोई इलाज नहीं है,हालांकि, दवा, फ़िज़ियोथेरेपी, और कुछ मामलों में सर्जरी फ़ायदेमंद साबित हो सकती है|
सर्जरी:-
सर्जरी को आसानी से पार्किंसंस के उपचार की सलाह नहीं दी जाती है, केवल कुछ चुनिंदा मामलों में ही सर्जरी की सलाह दी जाती है। आमतौर पर, जब रोगी बीमारी के उन्नत चरण में पहुंच गया है और असहनीय मोटर लक्षण (न्यूरॉन संकेतों का संयोजन) है, तो सर्जरी की सलाह दी जाती है।- पल्लिडोटॉमी
- थैलोमोटॉमी
- डीप ब्रेन स्टिमुलेशन
हम आपकी सहायता किस तरह से कर सकते है?:-How can we help you?:- - प्रशिक्षित फिजियोथेरेपिस्ट द्वारा फिज़ियोथेरेपी
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इन्फ्लूएंजा - लक्षण, कारण और उपचार
इन्फ्लूएंजा, जिसे फ्लू के नाम से भी जाना जाता है। यह एक तरह की बीमारी है जो RNA वायरस के कारण होती है। ये Virus जानवरों, पक्षियो और मनुष्यों की श्वसन नली को संक्रमित करता है। आमतौर पर इस virus से लोगों में बुखार, खांसी, सिरदर्द और थकान जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में निकट संपर्क में रोगी के खांसने या छींकने पर निकलने वाली सांस की बूंदों से फैलता है। व्यक्ति आमतौर पर कुछ दिनों के बाद ठीक हो जाते हैं, लेकिन 65 वर्ष से अधिक उम्र के वयस्क, 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे और पुरानी बीमारी (जैसे अस्थमा , हृदय और गुर्दे जैसी बीमारियाँ) वाले व्यक्तियों को अधिक नुकसान पहुँचा सकता है।
इन्फ्लूएंजा के लक्षण
Symptoms Of Influenza
- खांसी जो धीरे-धीरे गंभीर हो जाती है
- अत्यधिक थकान
- मांसपेशियों में हल्का या गंभीर दर्द
- बहती या भरी हुई नाक
- बार-बार छींके आना
- सिरदर्द
- भूख में कमी
- ठंड लगने के साथ तेज बुखार होना(100 F से लेकर 103 F तक )
- गला खराब होना
- उल्टी और दस्त (बच्चों में अधिक आम)
- आँखे लाल हो जाना
इन्फ्लूएंजा के कारण
Causes of Influenza
इन्फ्लूएंजा एक Viral Infection है और इसका मुख्य कारण इन्फ्लूएंजा वायरस है। यह वायरस आमतौर पर नाक, गले और फेफड़ों के ऊपरी हिस्सों में विकसित होता है और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलता है।
इन्फ्लूएंजा वायरस कई प्रकार के होते हैं, जिनमें इन्फ्लूएंजा A, इन्फ्लूएंजा बी और इन्फ्लूएंजा सी शामिल हैं।
इन्फ्लूएंजा वायरस या फ्लू वायरस किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलता है। जब कोई संक्रमित व्यक्ति खांसता या छींकता है तो उसकी खांसी और छींक की बूंदें हवा में फैल जाती हैं, जिसके कारण आस-पास के लोग इन बूंदों को साँस द्वारा अंदर ले लेते हैं और वे भी इस वायरल संक्रमण से संक्रमित हो जाते हैं।
उपचार
Treatment
इन्फ्लूएंजा के उपचार में डॉक्टरों की सलाह का पालन करना आवश्यक है। लक्षणों की गंभीरता के आधार पर इन्फ्लूएंजा का उपचार किया जा सकता है। इन्फ्लूएंजा के उपचार के लिए कुछ उपचार विकल्प निम्न हैं:
1. आराम : यदि कोई व्यक्ति इन्फ्लूएंजा से पीड़ित है, तो उसके लिए अधिक आराम करना फायदेमंद हो सकता है।
2. गरारे करना : गरारे करने से, खाँसी और सूजन को कम करने में मदद मिल सकती है।
3. दवाइयों का सेवन : डॉक्टर की सलाह के अनुसार खाँसी और सर्दी के लिए, उपयुक्त खाँसी सिरप और Antipyretic दवाइयों का सेवन किया जाता है।
4. हाइड्रेट रहना : पर्याप्त पानी पीना, बुखार की दवा के रूप में काम करता है साथ ही Dehydration होने का खतरा कम रहता है।
5. खानपान का ध्यान रखना : स्वस्थ आहार और पर्याप्त पौष्टिकता से भरपूर खाना खाने से, इन्फ्लूएंजा से लड़ने में मदद मिलती है।
6. डॉक्टर की सलाह लेना : स्थिति गंभीर होने पर, डॉक्टर की सलाह लेना और उसके बताए गए उपचार का पालन करना आवश्यक है। समय - समय पर डॉक्टर से जाँच करवाएं।
7. दवाइओं का समय पर सेवन करना : डॉक्टर द्वारा निर्धारित की गई दवाइयों का समय पर सेवन करना आवश्यक है।
रोकथाम
Prevention
फ्लू होने या इसे दूसरों तक फैलने से रोकने के लिए आप कुछ सावधानियां बरत सकते हैं। जितनी जल्दी हो सके फ्लू से बचाव का टीका लगवाएं।
- आपका बुखार कम होने के बाद अगले 24 घंटों तक बिस्तर पर ही आराम करें।
- कमरे से बाहर मास्क पहन कर निकलें।
- अपने चेहरे को छूने के बाद, अपने हाथों को साफ रखने के लिए दिन भर में hand sanitizer का उपयोग करें।
- खांसने या छींकने के दौरान Use किए गए tissues को फेंक दें।
- आंखों, नाक और मुंह को छूने से बचें
- बार-बार हाथ धोए या hand sanitizer का Use करें।
Fungal Infection - कारण, लक्षण और घरेलू उपाय
Fungal Infection, अलग - अलग fungus के कारण होने वाली बीमारी है। यह बीमारी तब होती है, जब fungus शरीर के किसी हिस्से पर हमला करता है और हमारा Immune System इससे लड़ने में सक्षम नहीं होता। Fungal Infection एक छोटे से दाद-घाव से लेकर जानलेवा Infection जितना बड़ा भी हो सकता है, जो शरीर के किसी भी हिस्से पर हो सकता है। यह एक ऐसा Infection है जो पुरुष, महिला, बच्चे और बुजुर्गों किसी को भी प्रभावित कर सकता है। यह शरीर के किसी भी भाग को प्रभावित कर सकता है जैसे - हाथ , सिर, उंगली , मुँह या शरीर के अन्य कोई भाग। कई तरह के Fungs ऐसे भी हैं जो हमारे शरीर में भी पाए जाते हैं। इनमें से कुछ अच्छे भी होते हैं और कुछ हानिकारक भी।
Fungal Infection के लक्षण
Symptoms of Fungal Infection
Fungal Infection शरीर के किस हिस्से पर हुआ है इस आधार पर लक्षण भिन्न हो सकते हैं। त्वचा पर होने वाले सामान्य लक्षण :
- त्वचा में लाल धब्बे या Rashes होना
- दाद
- संक्रमण वाले हिस्से पर खुजली या दर्द होना
- त्वचा में घाव
- जलन होना
- त्वचा पर ऊपरी पपड़ी निकलना या खाल निकलना
- कई बार पस वाली फुंसियां (Pimples) होना
- त्वचा पर दाने निकलना
Fungal Infection के कारण
Causes of Fungal Infection
- कमजोर Immune System
- गर्म और नम वातावरण
- आनुवंशिक कारण
- Fungal Infection से पीड़ित व्यक्ति के सम्पर्क में आने के कारण
Fungal Infection के घरेलू उपचार
Home Remedies for Fungal Infection
कई ऐसे घरेलू इलाज है जिनका उपयोग Fungal Infection को दूर करने के लिए किया जाता है। ध्यान रखें कि ये सुझाव पेशेवर चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं हैं, और यदि संक्रमण बना रहता है, तो स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर से परामर्श करना आवश्यक है। नीचे कुछ घरेलू उपचार दिए गए हैं जिनका आप Use कर सकते हैं।
1. Tea Tree Oil :
यह अपने Antifungal गुणों के लिए जाना जाता है। इसे नारियल तेल जैसे Daily Use Oil के साथ मिलाएं और Infected Area पर लगाएं।
2. लहसुन :
लहसुन में Natural Antifungal गुण होते हैं। इसमें एलिसिन नामक पदार्थ ज्यादा होते हैं जो Fungus और Bacteria को रोकने में मदद करता है। Fungal Infection को रोकने के लिए आप खली पेट लहसुन का सेवन कर सकते हैं या गुनगुने पानी के साथ लहसुन की 1 - 2 कलियों का सेवन कर सकते हैं।
3. Apple Cider Vinegar :
Apple Cider Vinegar में Antifungal और Antibacterial गुण पाए जाते हैं। Apple Cider Vinegar को पानी में घोलें और इसे Infected Area पर लगाएं।
4. Aloe Vera :
एलोवेरा में Anti-Inflammatory और Antifungal गुण होते हैं। Aloe Vera जेल को सीधे प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं।
5. हल्दी :
यह एक शक्तिशाली Antifungal और Anti-Inflammatory एजेंट होता है। हल्दी का सेवन संक्रमण को कम करने में मदद करता है। भोजन के अलावा एक चम्मच हल्दी को दूध में डालकर भी इसका सेवन कर सकते हैं।
यदि आपके लक्षण बने रहते हैं या बिगड़ जाते हैं, तो पेशेवर चिकित्सा सलाह लेना महत्वपूर्ण है।
पायरिया - लक्षण, कारण और घरेलू उपचार
पायरिया, मसूड़ों की बीमारी है। इसे पीरियोडोंटाइटिस भी कहते हैं। यह मसूड़ों का एक गंभीर Infection है। पायरिया होने पर, मसूड़ों में Infection फैलता है। इससे मसूड़ो में पीलापन होने लगता हैं और कभी - कभी उनसे खून आने लगता है। इसके साथ मुँह से सांसो के साथ बदबू आने लगती है। साथ ही, मसूड़ों और दांतों की जड़ों से मवाद निकलता है। आमतौर पर मवाद का सेवन भोजन के साथ किया जाता है, जिससे कई प्रकार के Infection भी हो सकते हैं।
पायरिया के लक्षण
Symptoms Of Pyorrhea
पायरिया में निम्न लक्षण दिखाई देते हैं :
- मसूड़ो का लाल दिखाई देना
- बदबूदार सांस, जो लगातार बनी रहती है
- मसूड़ों में सूजन
- मसूड़ों से खून आना
- चबाने पर दांतों में दर्द होना
- दांतों में हल्का दर्द रहना
- मसूड़े कमजोर होना
पायरिया के कारण
Causes of Pyorrhea
- दांतों की सही ढंग से सफाई न करना
- दांतों के बीच Food particles फंसे रहना
- दांतों की सही देखभाल न करना
- तंबाकू या धूम्रपान का सेवन करना
- कई दिनों तक Brush न करना
- शरीर में कैल्शियम की कमी होना
- मसूड़ों की खराबी
- Genetics के कारण
घरेलू उपचार
Home Remedies
पायरिया के लिए कई प्रकार के घरेलू उपचार उपलब्ध हैं, जिनके बारे में नीचे बताया जा रहा है। यदि आपके लक्षण गंभीर हो, तो इस अवस्था में डॉक्टर से Check Up करवाना जरूरी है। यहां कुछ घरेलू देखभाल सुझाव दिए गए हैं:
1. स्वच्छता बनाए रखें :
अपने दांतों को ब्रश करें : Soft-Bristle वाले Toothbrush का उपयोग करके अपने दांतों को दिन में कम से कम दो बार आराम - आराम से Brush करें।
Antiseptic Mouthwash का उपयोग करें : ऐसे Antiseptic Mouthwash से कुल्ला करें जिसमें Chlorhexidine हो या कोई अन्य डॉक्टर द्वारा Recommended, Antimicrobial agent का Use करें।
2. खारे पानी से कुल्ला करें :
गर्म नमक के पानी से गरारे करने से मसूड़ो की सूजन को कम करने में मदद मिलती है। एक गिलास गर्म पानी में आधा चम्मच नमक मिलाएं और इससे कुल्ला करें।
3. नारियल तेल :
नारियल तेल या तिल के तेल से Oil Pulling करना फायदेमंद है। एक बड़ा चम्मच तेल पानी में Mix करके मुंह में 15-20 मिनट तक घुमाएं और फिर थूक दें। यह मुंह में Bacteria को कम करने में मदद करता है।
4. तुलसी :
तुलसी पायरिया को ठीक करने में लाभदायक असर करती है। तुलसी में Antiplaque Effect पाया जाता है। ये पायरिया के उपचार में मदद करता है। तुलसी में पाए जाने वाले गुण मसूड़ों में होने वाली सूजन को ठीक करके पायरिया के उपचार में मदद करते है। इसे माउथवॉश की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।
तुलसी की ताजी पत्तियों को तोड़ लें और इसे पानी से अच्छी तरह धो लें। इसे कूटकर इसका अर्क निकाल लें। फिर इस अर्क को माउथवॉश के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। इसे हफ्ते में एक बार किया जा सकता है।
5. लौंग :
पायरिया के घरेलू उपचार में लौंग का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। लौंग में Antiplaque, Antigingivitis और Antibacterial गुण पाए जाते हैं।
6-7 लौंग को बारीक से पीस कर , इसमें दो-तीन बूंद Lemon Grass Oil की मिलाकर लगभग 2 मिनट तक इस पेस्ट से ब्रश करें।फिर पानी से कुल्ला करके मुंह को साफ कर लें। इस प्रक्रिया को हफ्ते में 1 बार इस्तेमाल किया जा सकता है।
6. काली मिर्च :
काली मिर्च में Pinenes, D-limonene और Caryophylline जैसे Compounds पाए जाते हैं। इनका सेवन मसूड़ों से खून आने जैसी समस्या को कम करता है।
रातभर के लिए काली मिर्च के 10-12 दाने पानी में भिगोकर ,सुबह काली मिर्च को बारीक से पीस लें। अब इस पेस्ट को एक कटोरी में लें और इसमें दो बूंद Lemon Grass Oil मिला लें। फिर इस पेस्ट को मुलायम ब्रश की सहायता से दांतों की सफाई के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। उसके बाद पानी के जरिए कुल्ला कर लें।
इस प्रक्रिया को हफ्ते में एक बार इस्तेमाल किया जा सकता है।
7. विटामिन सी :
मसूड़ों के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए अपने आहार में विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थ (जैसे खट्टे फल, स्ट्रॉबेरी और कीवी ) शामिल करें।
8. हल्दी :
हल्दी में Natural Anti-Inflammatory और Antimicrobial गुण होते हैं। आप हल्दी पाउडर में थोड़ा सा पानी मिलाकर पेस्ट बना सकते हैं और इसे अपने मसूड़ों पर लगा सकते हैं। कुछ मिनट बाद इसे धो लें।
8. हाइड्रेड रहें :
अपने मुंह को नम रखने के लिए खूब पानी पिएं, जिससे Bacteria की वृद्धि को कम करने में मदद मिल सकती है।
याद रखें, ये घरेलू उपचार Dental Treatment का विकल्प नहीं हैं। पायरिया के लिए Dentist से उचित निदान और देखभाल की आवश्यकता होती है। यदि आपको संदेह है कि आपको पेरियोडोंटाइटिस या कोई अन्य दंत समस्या है, तो दांतों की जाँच के लिए Dentist से परामर्श लें। वे आपकी स्थिति का आकलन करके गहरी सफाई, Scaling, Root Planing या अन्य उपचार की सिफारिश कर सकते हैं।
पाचन तंत्र सम्बन्धी रोग - कारण, लक्षण व उपाय
आपने अक्सर यह बात तो जरूर सुनी ही होगी कि सारी बीमारियों की शुरुआत पेट से होती है। अगर आपको पेट से जुड़ी कोई समस्या रहती है तो यह कहना बिलकुल गलत नहीं होगा कि आप जल्द ही किसी बड़ी समस्या की चपेट में आने वाले हैं।उदहारण के लिए अगर आप लंबे समय से कब्ज की समस्या से जूझ रहे हैं तो इसकी काफी संभावना है कि आपको बवासीर जैसा गंभीर रोग हो सकता है। वहीं, अगर आपको अक्सर गैस और पेट में जलन की समस्या रहती है तो इससे आपको रक्तचाप और दिल से जुड़ी समस्याएँ होने की संभवना होती है। इसलिए आपको हमेशा पाचन तंत्र को स्वस्थ रहना चाहिए ।
पाचन तंत्र क्या है
पाचन तंत्र मानव शरीर में एक जटिल प्रणाली है जो भोजन को पोषक तत्वों में तोड़ने के लिए जिम्मेदार है जिसे शरीर द्वारा अवशोषित और उपयोग किया जा सकता है। यह शरीर को ठीक से काम करने के लिए आवश्यक ऊर्जा और आवश्यक घटक प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मुंह (Mouth ): पाचन की प्रक्रिया मुंह में शुरू होती है, जहां भोजन चबाने से Mechanically रूप से टूट जाता है और लार के साथ मिल जाता है। लार में Enzyme होते हैं जो कार्बोहाइड्रेट का Chemicalपाचन शुरू करते हैं।
ग्रासनली (Esophagus): निगलने के बाद, चबाया हुआ और मिश्रित भोजन को Muscular Contractions द्वारा ग्रासनली में नीचे धकेल दिया जाता है जिसे Peristalsis कहा जाता है। Esophagus एक नली है जो मुंह को पेट से जोड़ती है।
पेट (Stomach): पेट में, पेट के Acid और पाचन Enzyme की क्रिया से भोजन टूट जाता है। और उसे एक अर्ध-तरल पदार्थ में मिलाता है जिसे Chyme कहा जाता है।
छोटी आंत: Chyme को फिर छोटी आंत में ले जाया जाता है, जहां अधिकांश पोषक तत्वों का अवशोषण होता है। छोटी आंत छोटी उंगली जैसे उभारों से बनी होती है जिन्हें Villi,कहा जाता है, ये प्रोटीन, वसा और कार्बोहाइड्रेट के मूल घटको को तोड़ते है।
लिवर: लिवर पित्त का उत्पादन करता है, जो Bladder में जमा होता है और जरूरत पड़ने पर छोटी आंत में छोड़ दिया जाता है जिससे उन्हें पचाना और अवशोषित करना आसान हो जाता है।
अग्न्याशय(Pancreas): Pancreas कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा को तोड़ने के लिए छोटी आंत में पाचन Enzyme को स्रावित करता है।
बड़ी आंत (Colon): छोटी आंत द्वारा पोषक तत्वों को अवशोषित करने के बाद जो अपचित रह जाता है वह बड़ी आंत में प्रवेश कर जाता है। बड़ी आंत शेष सामग्री से पानी और Electrolytes को अवशोषित करती है, जिससे मल बनता है।
मलाशय और गुदा(Rectum and anus): Rectum मल को तब तक संग्रहित रखता है जब तक कि वे शरीर से बाहर निकलने के लिए तैयार न हो जाएं। Anus वह द्वार है जिसके माध्यम से शौच की प्रक्रिया के दौरान मल बाहर निकाला जाता है।
पाचन तंत्र ख़राब होने के कारण
- तनाव में रहना
- जल्दी-जल्दी खाना
- सही से खाना चबाकर ना खाना
- ज़्यादा मसालेदार खाना
- ज़्यादा Caffeine या चॉकलेट का सेवन करना
- गलत खान-पान सेवन
- व्यायाम न करने कि वजह से
- पानी कम मात्रा में पीने से
- junk food सेवन अधिक करने
पाचन तंत्र के ख़राब होने के लक्षण
- छाती में दर्द और जलन होना
- गले में जलन होना
- उल्टी होना
- कुछ भी खाने की इच्छा न होना
- निगलते समय कठिनाई या दर्द होना
- पुरानी खांसी
- सांसों की बदबू आना
- खाने पर तुरंत उल्टी की इच्छा या जलन बढ़ना
- पेट फूला हुआ लगना या पेट में गैस बनना
उपचार :
- गुनगुना पानी पिएं
- विटामिन-सी से भरपूर चीज़ें खाएं जैसे संतरा, अंगूर, कीवी, पपीता, अमरूद, अनानास, शिमला मिर्च, स्ट्रॉबेरी
- आवयश्कता से अधिक न खाये
- भोजन को हमेशा चबाकर खा
- फाइबर से भरपूर चीज़ें खाएं जैसे शकरकंद, दलिया, हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, सेब, पपीता
- दिन के भोजन में दही या छाछ सेवन करे
- अत्यधिक तनाव न ले
- Physical Activity करें
पाचन सम्बन्धी समस्याओं के लिए घरेलू उपचारों के बारे में जानने के लिए नीचे दिए गए Link में जाकर Click करें।



























