बालों के झड़ने के कारण और घरेलू उपाय
बालों का झड़ना सिर्फ आपके बालों को नहीं बल्कि पूरे शरीर को प्रभावित कर सकता है। बालों के झड़ने के कई कारण हो सकते है। आजकल के समय में बाल झड़ना एक आम समस्या हो गयी है। महिलाओं और पुरुष दोनों में यह समस्या देखने को मिलती है। महिलाओं के बाल पुरुषों की अपेक्षा लम्बे होते हैं इसलिए पुरुषों की अपेक्षा अधिक झड़ते हुए प्रतीत होते हैं।
बाल झड़ने के कारण: (Cause of Hair Fall)
बालों का झड़ना, कई कारकों के कारण हो सकता है। यहां बाल झड़ने के कुछ सामान्य कारण दिए गए हैं:
- तनाव
- पोषक तत्वों की कमी
- रूसी
- कोई अंतर्निहित बीमारी
- थायराइड इंबैलेंस
- बालों को कलर या ब्लीच करना
- केमिकल ट्रीटमेंट जैसे स्ट्रेटनिंग, पर्मिंग आदि
- मेनोपॉज के दौरान या प्रेग्नेंसी के बाद हॉर्मोनल इंबैलेंस
- आनुवंशिकता
- हार्मोनल परिवर्तन
- प्रसव
- किसी प्रकार की बीमारी कैंसर का उपचार
- उम्र बढ़ना
- मौसमी एलर्जी
बालों को झड़ने से रोकने के घरेलू उपाय: (Home Remedies To Prevent Hair Fall)
1. आलू और शहद:
आलू और शहद का हेयर मास्क बालों को झड़ने से रोकने में मदद करता है। आलू के रस में शहद और अंडे की जर्दी मिलाकर बालों पर लगाने से बालों की ग्रोथ अच्छी होती है। शहद में एंटीफंगल गुण होते हैं, जो बालों के झड़ने और डैंड्रफ की समस्या को कम करते हैं।
इसका इस्तेमाल करने के लिए, आलू को कद्दुकस कर, इसका रस निकाल लें और उसमें शहद मिलाएं। इस मिश्रण को बालों पर लगाएं और 30-45 मिनट तक रखें।इसके बाद बालों को धो लें। हफ्ते में दो बार इसे अपनाएं।
2. प्याज का रस:
प्याज के रस में सल्फर पाया जाता है, जो बालों का झड़ना रोकने और बालों की ग्रोथ में मदद कर सकता है. प्याज के रस में आयरन और जिंक भी होता है, जो बालों को मजबूती देता है और झड़ना कम करता है।
अपने सिर में प्याज का रस या लहसुन का रस लगाकर मसाज करें। इस प्रक्रिया को सोने से पहले करें तथा सुबह अच्छी तरह से बालों को धो लें।
3. नारियल तेल:
नारियल तेल बालों के झड़ने को कम करने में मदद करता है। नारियल तेल में एंटी फंगल गुण होते हैं। यह स्कैल्प के ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने में मदद करता है। इसके इस्तेमाल से बाल जड़ से मजबूत होते हैं और Hair Fall की समस्या से छुटकारा मिलता है।
नारियल तेल को गरम करके लगाएं और मालिश करें। इसे रात को लगाएं और सुबह बाल धो लें। नारियल तेल बालों को Moisturize करने में मदद करता है और झड़ने को कम करता है।
4. आंवले का पाउडर:
आंवला पाउडर बालों के झड़ने को रोकने और बालों के विकास को बढ़ाने में मदद कर सकता है। आंवला पाउडर में विटामिन C की मात्रा ज्यादा होती है। विटामिन C, कोलेजन के उत्पादन के लिए जरूरी है। यह बालों के रोम को सहारा देने में मदद करता है।
इसका इस्तेमाल करने के लिए, आंवला पाउडर को नारियल तेल में मिलाएं और इससे बने हुए मिश्रण से सिर पर मसाज करें।इसे रात को लगाएं और सुबह बाल धो लें।आंवला में मौजूद विटामिन सी बालों के स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है।
5. एलोवेरा जेल:
एलोवेरा जेल में विटामिन-ए, विटामिन-सी और विटामिन-बी होता है जो कि बालों को भरपूर मात्रा में पोषण देता है। एलोवेरा जेल में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गुण बालों को हाइड्रेट करने में मदद करता है। और बालों को झड़ने से रोकता हैं।
एलोवेरा जेल को बालों पर उंगलियों या ब्रश की मदद से स्कैल्प से लेकर बालों के Ends तक लगाएं और 30 मिनट तक रखें। इसके बाद बालों को धो लें। एलोवेरा में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स बालों को सुरक्षित रखने में मदद करते हैं।
6. भृंगराज तेल:
भृंगराज तेल, Hair Follicles को सक्रिय करके उनकी ग्रोथ बढ़ाता है। इससे बालों का झड़ना रुकता है और बाल तेजी से बढ़ने लगते हैं। भृंगराज तेल में मौजूद आयरन, विटामिन E, मैग्नीशियम, कैल्शियम, और विटामिन D जैसे पोषक तत्व उन कमियों को पूरा करते हैं, जिनकी वजह से बाल झड़ते हैं।
भृंगराज तेल को गरम करके बालों में लगाएं और मालिश करें। इसे रात को लगाएं और सुबह बाल धो लें। भृंगराज बालों को मजबूत और स्वस्थ बनाने में मदद करता है।
साथ ही, ध्यान रखें कि सही आहार, पर्याप्त पानी पीना, सही तरीके से बाल धोना और तनाव को कम करना भी बालों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। यदि बालों का झड़ना पर्याप्त समय तक बना रहता है, तो एक विशेष सलाह के लिए चिकित्सक से मिलना आवश्यक है।
हम आपकी सहायता किस तरह से कर सकते है?:-
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- रोगी को प्रशिक्षित स्टाफ द्वारा उचित प्रबंधन और देखभाल
- उचित मार्गदर्शन
- उचित सलाह डॉक्टर द्वारा परामर्श {Proper Consultation By Doctor}
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टाइफाइड के इलाज के लिए घरेलू उपचार
टाइफाइड बुखार Salmonella Typhi, Bacteria के कारण होने वाली बीमारी है । यह आपकी Small Intestines को प्रभावित करता है यह मुख्य रूप से दूषित भोजन और पानी से फैलता है और तेज बुखार, पेट दर्द और अन्य लक्षणों का कारण बनता है। यदि इसका इलाज समय पर नहीं किया गया, तो यह महत्वपूर्ण स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है। टाइफाइड बुखार को आंत्र ज्वर(Enteric Fever) भी कहा जाता है।
टाइफाइड के लक्षण (Symptoms Of Typhoid)
- तेज बुखार (103º - 104ºF)
- सिरदर्द
- पेट दर्द
- दस्त या कब्ज होना
- भूख न लगना, वजन कम होना
- अत्यधिक कमजोरी या थकान होना
- डायरिया
- उल्टी
टाइफाइड के लिए कुछ घरेलू उपाय (Some Home Remedies For Typhoid)
टाइफाइड साल्मोनेला टाइफी के कारण होने वाला एक गंभीर जीवाणु संक्रमण है, और इसमें आमतौर पर चिकित्सा ध्यान और एंटीबायोटिक उपचार की आवश्यकता होती है। घरेलू उपचार लक्षणों को प्रबंधित करने और रिकवरी में सहायता कर सकते हैं। यदि आपको टाइफाइड के लक्षण दिखाई देते हैं, तो उचित निदान और उपचार के लिए स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर से परामर्श करना महत्वपूर्ण है। यहां कुछ घरेलू उपचार दिए गए हैं जो राहत प्रदान कर सकते हैं:
1. हाइड्रेशन:
टाइफाइड बुखार में दस्त और उल्टी के कारण शरीर से महत्वपूर्ण तरल पदार्थ बाहर निकल जाते हैं। जिस कारण शरीर में पानी की कमी हो जाती है। इसलिए, शरीर को हाइड्रेट बनाए रखना जरूरी है। टाइफाइड के दौरान, आपको कम से कम 2.5 से 3 लीटर साफ पानी पीना चाहिए। इसके अलावा, छाछ, नारियल पानी, और Herbal Tea भी ले सकते हैं।
2. अदरक की चाय:
अदरक में प्राकृतिक सूजनरोधी और रोगाणुरोधी गुण होते हैं जो पाचन संबंधी परेशानी को कम करने में मदद कर सकते हैं। ताजे अदरक के कुछ टुकड़ों को पानी में उबालकर अदरक की चाय तैयार करें। मतली और पेट दर्द से राहत पाने के लिए इस चाय का सेवन करें।
3. तुलसी:
तुलसी में एंटीबायोटिक और एंटीमाइक्रोबियल गुण होते है। उबले हुए पानी में तुलसी डालकर रोजाना तीन से चार कप पिएं। तुलसी रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाती है और पेट को ठंडा रखती है। या आप पेस्ट बनाने के लिए 4-5 तुलसी के पत्ते ले सकते हैं। इस पेस्ट में काली मिर्च पाउडर और केसर के कुछ कतरे मिलाएं। इन सभी को मिला लें। इस मिश्रण को हर भोजन के बाद लें।
4. लहसुन:
लहसुन में मौजूद एंटीमाइक्रोबियल गुण टाइफाइड बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करते हैं। लहसुन अपने एंटीऑक्सीडेटिव गुणों के कारण टाइफाइड से जल्दी ठीक होने में भी मदद करता है। यह इम्युनिटी को बढ़ाता है और शरीर को डिटॉक्स करता है। खाली पेट इसकी दो कलियाँ खाएं। इसकी सलाह गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए नहीं है।
5. नींबू पानी:
नींबू में विटामिन C का उच्च स्तर होता है, जो प्रतिरक्षा को बढ़ाता है और पाचन में मदद करता है। अपने पाचन तंत्र को बेहतर बनाने के लिए एक गिलास गर्म पानी में आधा नींबू निचोड़ें और सुबह सबसे पहले इसका सेवन करें।
6. शहद और दालचीनी:
शहद में प्राकृतिक जीवाणुरोधी गुण होते हैं, जबकि दालचीनी बुखार को कम करने में मदद करती है। दैनिक प्रतिरक्षा (Immunity) बढ़ाने के लिए, एक चम्मच शहद को एक चम्मच दालचीनी पाउडर के साथ मिलाएं, और इसका सेवन करें।
7. लौंग:
टाइफाइड के उपचार के लिए लौंग का इस्तेमाल करें। लौंग में टाइफाइड ठीक करने के गुण होते हैं। 2 - 3 कप पानी में 4 से 5 लौंग डालकर उबाल लें। जब पानी आधा रह जाए इसे छान लें। इस पानी को पूरा दिन पिएं। इस उपचार को एक हफ्ते लगातार करें। इससे टाइफाडइ में हुई कमजोरी दूर होती है।
8. कसूरी मेथी:
मेथी के दानों में ठंडक देने वाले गुण होते हैं जो बुखार को कम करने में मदद करते हैं। एक चम्मच मेथी के दानों को रात भर पानी में भिगोकर रख दें और अगली सुबह उस पानी का सेवन करें। यह बुखार कम करने में सहायक है।
9. हल्दी वाला दूध:
हल्दी एक हीटिंग एजेंट की तरह काम करती है। इसे पीने से Digestion को बढ़ावा मिलता है, सूजन को कम करने में मदद मिलती है, और बुखार और सर्दी से लड़ने में भी यह मददगार है। टाइफाइड बुखार में, इम्यूनिटी मजबूत करने के लिए हल्दी वाला दूध पीना लाभदायक है।
10. शहद:
शहद में जीवाणुरोधी गुण होते हैं और यह गले की खराश को शांत करने में मदद करता है। इसे गर्म पानी या हर्बल चाय में मिलाकर इसका सेवन करें।
11. पुदीना :
पुदीने की तासीर गर्म होती है, इसलिए यह शरीर से पसीना निकालकर बुखार को दूर करता है। मौसम बदलने की वजह से बुखार आने पर पुदीने के पत्तों का काढ़ा बनाकर पीने से फायदा मिलता है। पुदीने की चटनी बनाकर खिलाने से भी बुखार और बुखार की वजह से होने वाली भूख की कमी ठीक होती है। 7-10 पुदीने की पत्तियों को एक गिलास पानी में 5 मिनट तक उबालकर, छानकर सुबह सबसे पहले इसका सेवन करना चाहिए।
12. Diet:
हल्का और आसानी से पचने वाला आहार खाएं। जैसे सूप, शोरबा, उबली सब्जियां और सादे चावल आदि। मसालेदार, तैलीय और भारी भोजन से बचें जो पाचन तंत्र में दिक्क्त कर सकते हैं।
13. आराम:
अपने शरीर को स्वस्थ होने और मजबूत बनाने में मदद के लिए पर्याप्त आराम करें।
याद रखें, ये घरेलू उपचार आपके लक्षणों और गंभीरता को कम करने में मदद करते है, लेकिन यह चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं है। टाइफाइड बुखार एक गंभीर और संभावित रूप से जीवन-घातक स्थिति हो सकती है, इसलिए उचित निदान और उपचार के लिए स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर से परामर्श करना महत्वपूर्ण है। यदि आपको संदेह है कि आपको टाइफाइड बुखार है, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
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प्रतिदिन योग करना क्यों जरुरी है? आइए इसके फायदे जानते हैं।
प्रतिदिन योग का अभ्यास करने से कई प्रकार के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक लाभ मिलते हैं। शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए योग जरूरी करना चाहिए। इससे बीमारियां दूर रहती हैं और शरीर मजबूत बनता है। योग से जीवन को एक नई दिशा मिलती है ।
आजकल की बिगड़ती लाइफस्टाइल को संतुलन बनाए रखने के लिए योग बहुत आवश्यक है। योग का असर हमारे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। योग के महत्व को लोगों ने गहराई से समझन चाहिए। रोजाना योग करने से शरीर बीमारियों से दूर रहता है। योग से वजन घटाने और कई बीमारियों को दूर करने में मदद मिलती है। योग से रोगप्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और तनाव दूर होता है। नियमित रूप से योग करने वाले लोग लंबे समय तक स्वस्थ रह सकते हैं। आइये जानते हैं योग करने के फायदे।
प्रतिदिन योग करने के फायदे : (Benefits Of Doing Yoga Daily)
1. शरीर को लचीलापन और ऊर्जावन बनाए :
योग में विभिन्न मुद्राएं और गतिविधियां शामिल हैं जो शरीर की विभिन्न मांसपेशीयों में लचीलेपन और ताकत को बढ़ाती हैं। और ऊर्जा प्रदान करती है। नियमित अभ्यास से संपूर्ण शरीर की जागरूकता और मुद्रा (Posture) में सुधार करने में मदद मिलती है। और हमारे शरीर का प्रत्येक अंग अच्छी तरह से काम करता है।
2. तनाव (Stress) कम होता है:
योग में अक्सर गहरी सांस लेने और ध्यान तकनीके शामिल होती हैं, जो पैरासिम्पेथेटिक तंत्रिका तंत्र (तंत्रिका तंत्र का एक हिस्सा है, जो तनाव या खतरे की स्थिति के बाद शरीर को आराम देता है)को सक्रिय कर सकता है, विश्राम को बढ़ावा देता है और तनाव के स्तर को कम करता है। यह बेहतर मानसिक कल्याण में योगदान देता है।
3. मन की शांति:
योग न केवल हमारे शरीर की मांसपेशियों को अच्छा व्यायाम देता है, बल्कि यह हमारे दिमाग को शांत रखने में भी मदद करता है। चिकित्सा अनुसंधान से पता चला है कि योग शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करता है।योग तनाव से राहत देता है और बेहतर नींद लाता है, भूख और पाचन को बढ़ाता है। यह दिमाग को हमेशा शांत रखता है।
4. बेहतर संतुलन और समन्वय:
कई योग मुद्राओं में एकाग्रता और संतुलन की आवश्यकता होती है, जो समग्र स्थिरता और समन्वय को बढ़ा सकती है। उम्र बढ़ने के साथ यह विशेष रूप से फायदेमंद है।
5. बेहतर Body Posture बनाने में सहायक:
योग बेहतर Body Posture बनाने में सहायक है। यह Body Alignment को ठीक करने में सहायक है और मुद्रा संबंधी समस्याओं को ठीक करने में मदद करता है। यह रीढ़ और मांसपेशियों पर तनाव को कम करता है, पीठ दर्द को रोक सकता है या कम कर सकता है।
6. बीमारियां दूर भगाए:
योग करने से शरीर में होने वाली बीमारियां दूर होती हैं। योगाभ्यास शरीर को स्वस्थ बनाता है, क्योंकि यह हमें रोगों से लड़ने की शक्ति देता है। हृदय रोग, मधुमेह और अस्थमा जैसी कई अन्य बीमारियों के लिए योग की सलाह दी जाती है। योग रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है और श्वसन संबंधी विकारों को भी दूर करता है। इसलिए अगर आप रोजाना योग करेंगे तो आप स्वस्थ रहेंगे।
7. रक्त प्रवाह में वृद्धि:
योग में विभिन्न गतिविधियां और मुद्राएं रक्त प्रवाह को उत्तेजित करती हैं, जिससे पूरे शरीर में रक्त परिसंचरण में सुधार होता है। बेहतर परिसंचरण बेहतर हृदय स्वास्थ्य में योगदान देता है। जिससे ह्रदय स्वास्थ्य अच्छा बना रहता है।
8. शरीर की थकान दूर:
जब हम योग करते हैं तो मांसपेशियों में खिंचाव, मरोड़ जैसी कई क्रियाएं होती हैं। इससे हमारे शरीर की थकान दूर होती है और हम हमेशा तरोताजा महसूस करते हैं। यदि आप नियमित रूप से योग करते हैं तो आपके शरीर में ऊर्जा का निरंतर संचार होता है।
9. नींद की समस्या दूर होती है:
योग करने से मांसपेशियों में खिंचाव और आराम होता है। इससे शारीरिक और मानसिक परिश्रम होता है। इससे नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है। योग से दिमाग के स्लीपिंग हार्मोन भी बढ़ते हैं। जिससे शरीर और दिमाग आरामदायक नींद के लिए तैयार हो जाते हैं।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि योग के साथ व्यक्तिगत अनुभव भिन्न हो सकते हैं, और ऐसा अभ्यास चुनना आवश्यक है जो आपकी आवश्यकताओं और शारीरिक स्थिति के अनुरूप हो। इसके अतिरिक्त, यदि आपको पहले से कोई स्वास्थ्य संबंधी परेशानी है, तो योग सहित कोई भी नई व्यायाम दिनचर्या शुरू करने से पहले एक स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर से परामर्श करना उचित है।
सर्दियों में गुड़ खाने के फायदे
गुड़ सबसे हेल्दी खाद्य पदार्थ में से एक है, जिसे आप अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। ये सर्दियों के दौरान सबसे ज्यादा खाए जाने वाले खाद्य पदार्थ में से एक है। गुड़ को अक्सर लोग सर्दियों के मौसम में खाना पसंद करते हैं। बहुत से लोग हैवी खाने के बाद और सांसों की दुर्गंध से बचने के लिए भी गुड़ का सेवन करते हैं। गुड़ खाना सेहत के लिए फाफी फायेमंद है। यह विटामिन, मिनरल, प्रोटीन, कैल्शियम और आयरन जैसे जरूरी न्यूट्रिएंट्स से भरपूर है। गुड़ खाने से सर्दी, खासी सहित कई बीमारियां दूर होती हैं। गुड़ का सेवन करना, चीनी के सेवन करने से कई ज्यादा फायेदमंद होता है। गुड़ एक नेचुरल स्वीटनर का काम करता है। इसलिए यह रिफाइंड चीनी से कई ज्यादा लाभ पहुँचाता है। बाजार में कई प्रकार और रंगों जैसे हल्का पीला, लाल या भूरा आदि प्रकार के गुड़ मिलते हैं। गुड़ में पोषक तत्वों समेत सर्दियों में खाने से सेहत को कई लाभ मिलते हैं।
सर्दियों में गुड़ खाने के फायदे (Benefits Of Eating Jaggery In Winter)
1. शरीर गर्म रखें:
गुड़ की तासीर गर्म होती है। सर्दियों में गुड़ खाने से मेटाबॉलिज़्म तेज होता है, जिससे शरीर में गर्माहट रहती है। गुड़ के सेवन से सर्दियों में शरीर को अंदर से गर्म रखने में मदद मिलती है। यह तुरंत ऊर्जा पाने का एक बेहतर स्रोत है। खजूर का गुड़ शरीर को सबसे ज्यादा गर्माहट देता है।
2. इम्यूनिटी मजबूत करें:
सर्दियों के मौसम में, गुड़ न केवल मिठास बढ़ाता है, बल्कि यह आपकी इम्यूनिटी को भी मजबूत करता है। यदि आप सर्दियों में निरोग रहना चाहते हैं तो गुड़ का सेवन जरूर करें, ऐसा इसलिए क्योंकि गुड़ रोग प्रतिरोधक क्षमता को बूस्ट करता है इसमें आयरन, मैग्नीशियम, पोटेशियम, और विटामिन्स जैसे अन्य पोषक तत्व भी पाए जाते हैं यह सर्दियों में इम्यूनिटी बूस्टर का काम करता है।
3. सर्दी-जुकाम में फायदेमंद:
गुड़ एंटी बैक्टीरियल गुणों से भरपूर है और शरीर में सूजन को रोकने मे मदद करता है। इस वजह से सर्दी-जुकाम में इसे खाना फायदेमंद हो जाता है। इससे गले की खराश समेत कई समस्याओं में कमी आती है। इसके अलावा सिर दर्द और कमजोरी में भी ये मददगार है क्योंकि गुड़ में आयरन है और ये आयरन रेड ब्लड सेल्स को बढ़ावा देता है।
4. अस्थमा के मरीजों के लिए फायदेमंद:
गुड़ में मौजूद मिनरल्स संक्रमण के खिलाफ शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का काम करते हैं। गुड़ शरीर में आंतरिक गर्मी प्रदान करता है। अस्थमा के मरीजों को खासकर ठंड के दिनों में शरीर में आंतरिक गर्मी की जरूरत पड़ती है। इसलिए अस्थमा के मरीजों को दिन में गुड़ का एक टुकड़ा जरूर खाना चाहिए।
5. एनीमिया से बचाता है:
सर्दियों में गुड़ खाने से एनीमिया से बचा जा सकता है। गुड़ में कैल्शियम, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, पोटैशियम, आयरन जैसे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। साथ ही गुड़ में आयरन और फोलेट की मात्रा सबसे अधिक होती है। इसके सेवन से हीमोग्लोबिन और ब्लड का निर्माण बढ़ता है। इसके अलावा, गुड़ में एंटीऑक्सीडेंट और एंटीइंफ़्लेमेटरी गुण भी होते हैं।
6. ब्लड सर्कुलेशन में फायदेमंद:
गुड़ खाने से रक्त संचार बढ़ता है क्योंकि इसमें आयरन होता है जो हीमोग्लोबिन बनाने में मदद करता है। हीमोग्लोबिन वह प्रोटीन है जो ऑक्सीजन को शरीर के ऊतकों और कोशिकाओं तक पहुंचाता है। जब शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर अच्छा रहता है तो रक्त संचार भी बेहतर होता है।
7. जोड़ों की समस्या दूर करने में सहायक:
सर्दियों में गुड़ खाने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है। गुड़ में कैल्शियम, फास्फोरस, मैग्नीशियम, पोटैशियम, आयरन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। साथ ही, गुड़ में एंटीऑक्सीडेंट और एंटीइंफ़्लेमेटरी गुण भी होते हैं। जो सूजन कम करने में मदद करते हैं। साथ ही गुड़ में आयरन और कैल्शियम पाया जाता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाता है।
8. पाचन तंत्र मजबूत करता है:
सर्दियों में गुड़ खाने से पाचन में सुधार होता है। गुड़ की तासीर गर्म होती है, इसलिए यह पाचन तंत्र को मजबूत करता है और वजन घटाने में भी मदद करता है। गुड़ में मौजूद खनिज पदार्थ शरीर में लौह तत्व (हिमोग्लोबिन) की वृद्धि करते हैं। इसमें मौजूद रेचक गुण कब्ज को रोकते हैं और पाचन एंजाइमों को सक्रिय करते हैं।
9. Energy बढ़ाता है:
सर्दियों में गुड़ खाने से शरीर में गर्माहट बढ़ती है और रक्त वाहिनियां सिकुड़ती नहीं हैं। इससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। गुड़ में आयरन और फ़ॉलिक एसिड होता है, जिससे शरीर को ऊर्जा मिलती है। गुड़ में नैचुरल शुगर होती है, जो ऊर्जा देती है और ठंड से बचाती है।
10. गैस, बदहजमी, और मतली आने जैसी शिकायतों से छुटकारा मिलता है:
खाने के बाद गुड़ का सेवन करने से पाचन दुरुस्त रहता है। इसका सेवन अगर खाने के बाद किया जाए तो खाना आसानी से हजम होता है। साथ ही यह बदहजमी,मतली और अपच जैसी परेशानियों को दूर करता है।
कुछ लोगों को सीधे तौर पर गुड़ खाना नहीं पसंद होता है। ऐसे लोग ठंड के समय गुड़ के लड्डू, चिक्की और तिल के लड्डू बनाकर गुड़ खा सकते हैं। आप हर दिन लगभग 25 ग्राम तक गुड़ का सेवन कर सकते हैं।
इसके अतिरिक्त गर्मियों में गुड़ नहीं खाना चाहिए। गुड़ की तासीर गर्म होती है, इसलिए नाक से खून निकलने की शिकायत बढ़ जाती है। चीनी के मुकाबले गुड़ ज्यादा मीठा होता है। अगर गुड़ का सेवन अधिक मात्रा में किया जाए, तो ब्लड शुगर की समस्या बढ़ सकती है।
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सर्दियों में गाजर खाने के फायदे
सर्दियों में गाजर खाना शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है। गाजर खाने के फायदे बहुत हैं। इसे सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। इसमें कई तरह के पोषत तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए बहुत जरूरी होते हैं। गाजर में प्रचुर मात्रा में विटामिन C, फोलेट, आयरन, फाइबर, विटामिन के और विटामिन ए आदि प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। सर्दियों में गाजर खाने से इम्यूनिटी मजबूत होने के साथ आंखे भी लंबे समय तक स्वस्थ रहती है। सर्दियों में गाजर को सलाद, सूप, सब्जी और जूस आदि के रूप में आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता हैं। गाजर खाने से हमारी त्वचा (Skin) भी हेल्दी रहती हैऔर बीमारियों से शरीर की रक्षा होती हैं। गाजर खाने से शरीर की कमजोरी भी आसानी से दूर होती है, तो आइए जानते हैं सर्दियों में गाजर खाने के अन्य फायदों के बारे में।
गाजर खाने के फायदे: (Benefits Of Eating Carrots)
1. आँखों के लिए फायदेमंद:
सर्दियों में गाजर खाने से आंखे स्वस्थ रहती है। गाजर में मौजूद विटामिन ए और बीटा-कैरोटीन आंखों की रोशनी बढ़ाने में मदद करते हैं। यह आंखों को ड्राई होने से बचाता है और रेटिना और लेंस की रक्षा करता है। गाजर में मौजूद बीटा-कैरोटीन शरीर में जाकर विटामिन A में बदल जाता है। विटामिन A आंखों को स्वस्थ रखने में मदद करता है। साथ ही गाजर खाने से बालों के लिए जरूरी बायोटीन मिलता है।
2. हृदय के लिए फायदेमंद:
गाजर का सेवन करने से हार्ट को बहुत लाभ मिलता है। इसका सेवन करने से Coronary Heart Disease (हृदय और Blood Vessels से जुड़ी बीमारी) होने की संभावना कम हो जाती है। गाजर में पाए जाने वाले मिनरल, पोटैशियम शरीर में सोडियम के लेवल को बैलेंस करने और इसे बाहर निकालने में मदद करता है। यह ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखने में मदद करता है। जिससे आपको दिल से संबंधित बीमारियों का खतरा कम होता जाता है।
3. Immunity मजबूत करने में फायदेमंद:
गाजर कई तरह के पोषक तत्वों से भरपूर होती है। इसमें पोटेशियम, विटामिन K, फास्फोरस और एंटी-ऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करते हैं। गाजर में मौजूद गुण शरीर को हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस और सूजन से भी बचाते हैं।
4. पाचन तंत्र मजबूत करें:
सर्दियों में गाजर खाने से पाचन तंत्र मजबूत रहता है। गाजर में फाइबर होता है, जो पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करता है। इसमें मौजूद फाइबर, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट में Natural vacuum cleaner की तरह काम करता है। यह कब्ज, गैस, पेट फूलने, और अपच जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है।
5. वजन घटाने में सहायक:
सर्दियों में गाजर खाने से वजन घटाने में मदद मिलती है। गाजर में घुलनशील और अघुलनशील दोनों तरह के फाइबर होते हैं। इससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है और वजन कंट्रोल में रहता है। गाजर में कैलोरी की मात्रा भी कम होती है। इसमें मौजूद फाइबर भोजन पचाने में मदद करता है। गाजर में तरल पदार्थ की मात्रा भी ज्यादा होती है। इससे लंबे समय तक भूख नहीं लगती। नाश्ते में गाजर खाना बहुत फायदेमंद होता है।
6. त्वचा के लिए फायदेमंद:
सर्दियों में गाजर खाने से त्वचा को कई फायदे मिलते हैं। गाजर में मौजूद बीटा कैरोटीन, ल्यूटिन, लाइकोपीन, और कई अन्य तत्व त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। इसमें मौजूद कैरोटीन इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है, जिससे स्किन का ग्लो बना रहता है। गाजर का नियमित सेवन करने से Skin में मौजूद धब्बे और दाग कम होते हैं। गाजर में मौजूद विटामिन A, एक्जिमा के लक्षणों को कम करने में मदद करता है।
7. कैंसर के जोखिम को कम करने में सहायक:
गाजर में एंटी-कैंसर गुण पाए जाते हैं। इसका सेवन करने से कैंसर के जोखिम को कुछ हद तक कम करने में मदद मिलती है। गाजर में पॉली-एसिटिलीन व फालकैरिनोल जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो कैंसर कोशिकाओं को विकसित होने से रोकने में मददगार होते हैं।
सर्दियों में गाजर को सलाद, सूप, सब्जी और जूस आदि के रूप में आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। सर्दियों के महीनों के दौरान गाजर सहित विभिन्न खाद्य पदार्थों के स्वास्थ्य लाभों को अधिकतम करने के लिए संतुलित और विविध आहार लेना आवश्यक है।
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कम उम्र में बाल सफेद होने के कारण और घरेलू उपाय
आजकल के दौर में कई लोग कम उम्र में ही सफेद बालों का शिकार बन जाते हैं। बढ़ती उम्र के साथ बालों का सफेद होना आम बात है। लेकिन कम उम्र में बालों का सफेद होना एक बड़ी समस्या है। हमारे शरीर में जब रंग बनाने वाली कोशिकाएं पिग्मेंट बनाना बंद कर देती हैं। तब हमारे बाल सफेद होने लगते हैं। इसके अलावा कई बार बालों में प्राकृतिक हाइड्रोन पेरोक्साइड भी जमा होने लगते हैं। जिसकी वजह से बल सफेद होने लगते हैं। आजकल न जाने कितने युवा सफेद बालों की समस्या से जूझ रहे हैं। कम उम्र में बालों के सफेद होने के कई कारण हो सकते हैं। गलत जीवनशैली, खान-पान, कुछ बीमारियां और पोषक तत्वों की कमी जैसे कई कारणों से कम उम्र में बल सफेद होने लगते हैं।
कम उम्र में बाल सफेद होने के कारण: (Reasons For Hair Becoming Gray At An Early Age)
कम उम्र में बाल सफेद होने के कई कारण हो सकते हैं:
- आनुवंशिक कारक
- विटामिन और प्रोटीन जैसे पोषक तत्वों की कमी
- हाइपोथायरायडिज्म (शरीर में थायरॉइड हार्मोन के स्तर में कमी)
- विटिलिगो (सफेद दाग, त्वचा से जुड़ी समस्या)
- तनाव या कुछ दवाओं का सेवन
- गलत लाइफस्टाइल
- पर्यावरणीय कारक (धूप और प्रदूषण)
विटामिन B-6, B-12, बायोटिन, विटामिन D, या विटामिन E की कोई भी कमी समय से पहले बाल सफेद होने में योगदान कर सकती है। विटामिन बी12 की कमी से आमतौर पर बाल सफेद होते हैं। विटामिन B-12 बालों के लिए जरूरी होता है। यह विटामिन बालों को झड़ने से रोकने में मदद करता है। साथ ही, बालों को काला बनाए रखने में भी सहायक होता है।
बालों के समय से पहले सफेद होने के घरेलू उपचार: (Home Remedies For Premature Graying Of Hair)
बालों के समय से पहले सफेद होना एक सामान्य प्रक्रिया है जो आमतौर से उम्र बढ़ने के साथ होती है। हालांकि, कुछ लोगों के बाल समय से पहले ही सफेद होना शुरू हो जाता है, जिसे प्राकृतिक रूप से कम किया जा सकता है। यहां कुछ घरेलू उपाय हैं जो आपके सफेद बालों को कम करने में मदद कर सकते हैं:
1. करी पत्ता और दही :
करी पत्ता, बालों को सफेद होने से रोकने में मदद करता है। करी पत्ते में मेलेनिन उत्पादन होता है, जो बालों को काला करने का काम करता है। मेलेनिन की कमी से ही बाल सफेद होते हैं।
इसका इस्तेमाल करने के लिए करी पत्तों को पीसकर पेस्ट बना लें और इसे दही के साथ मिलाकर सप्ताह में दो बार बालों पर लगाएं। या करी पत्ते को तेल के साथ मिलाकर बालों में लगाने से बालों की ग्रोथ को बढ़ाने और उनको नेचुरली काला बनाए रखने में भी मदद करता है।
2. आंवला और मेथी का पाउडर :
आंवला बालों को पोषण देने और समय से पहले सफेद होने से रोकने में मदद करता है। आंवले में विटामिन C होता है, जो एक प्रभावी एंटीऑक्सीडेंट है। यह शरीर में एंटीऑक्सीडेंट को बढ़ाता है और बालों को प्राकृतिक रंग देता है।
इसका इस्तेमाल करने के लिए रोजाना एक गिलास आंवले का जूस पीएं। या आंवले के तेल में मेथी का पाउडर मिलाकर पेस्ट बनाएं। इस पेस्ट को स्कैल्प और बालों पर लगाएं। 10-15 मिनट बाद बालों को शैंपू से धो लें। या आंवला पाउडर को पानी में मिलाकर रात भर के लिए भिगोकर रख दें। अगले दिन इस पानी को छानकर बालों में लगाएं। करीब एक घंटे बाद बालों को धो लें।
3. नारियल तेल और नींबू का रस:
नारियल का तेल बालों को पोषण देता है और समय से पहले सफेद होने से रोकता है। नारियल तेल में मौजूद प्रोटीन बालों को पोषण देता है और बालों को अंदर से पोषण देने वाले पोषक तत्वों की आपूर्ति करता है। नारियल तेल और नींबू के रस का इस्तेमाल सफेद बालों से छुटकारा पाने के लिए किया जाता है।
इसके लिए, नारियल के तेल को गर्म करें और इसमें बराबर मात्रा में नींबू का रस मिला लें। इस तेल को बालों पर करीब एक घंटे तक लगाकर रखें और फिर धो लें। हर हफ्ते एक बार ये तरीका अपना सकते हैं।
4. ब्राह्मी का तेल:
ब्राह्मी तेल में मौजूद पोषक तत्वों से समय से पहले सफेद बालों की समस्या दूर होती है। ब्राह्मी तेल में एंटीऑक्सीडेंट तत्व होते हैं, जो बालों को यूवी किरणों से होने वाले नुकसान से बचाते हैं। ब्राह्मी तेल, बालों को Soft और मजबूत बनाने में मदद करता है।
बालों में ब्राह्मी लगाने के लिए, आप ब्राह्मी के पत्तों को पीसकर उसमें नारियल का तेल मिला लें। इसके बाद, इस घोल को अच्छी तरह से पीसकर बालों की जड़ों पर लगा लें। जड़ों के साथ-साथ बालों के निचले हिस्से तक अच्छी तरह से मसाज कर लें। या बालों को धोने से पहले या बाद में, थोड़ी मात्रा में ब्राह्मी तेल से अपने सिर की गोलाकार गति में धीरे-धीरे मालिश करें।
5. मेथी के बीच:
मेथी के बीज में विटामिन-ए, के, और सी होता है। इसमें फ़ॉलिक एसिड भी होता है, जो बालों से जुड़ी समस्याओं को दूर करता है। मेथी में पोटैशियम भी होता है, जो सफेद बालों की समस्या को दूर करने में मदद करता है।
इसका प्रयोग करने के लिए,मेथी के दानों को दोगुनी मात्रा में नारियल के तेल के साथ गर्म करें। जब मेथी के दाने भुनकर लाल हो जाएं, तो तेल को आंच से हटा लें। तेल हल्का गर्म हो, तो इसे बालों पर लगाएं। हफ्ते में दो से तीन बार इस तेल का इस्तेमाल करें।
6. शिकाकाई:
शिकाकाई में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन बालों को पोषण देते हैं और सफेद बालों को काला करने में मदद करते हैं। शिकाकाई में प्राकृतिक काला रंग भी होता है।
इसका इस्तेमाल करने के लिए, शिकाकाई पाउडर में दही मिलाकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को बालों और स्कैल्प पर लगाकर 30 मिनट से 1 घंटे तक लगा रहने दें। हफ्ते में कम से कम एक या दो बार इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
ये घरेलू उपचार नियमित रूप से किए जाने पर आपके बाल मजबूत और स्वस्थ रहते हैं। हालांकि, इन्हें आधिकारिक सलाह के साथ किया जाना चाहिए और अगर सफेदी का समस्या जारी रहती है, तो एक विशेषज्ञ से सलाह प्राप्त करना उचित है।
हम आपकी सहायता किस तरह से कर सकते है?:-
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- रोगी को प्रशिक्षित स्टाफ द्वारा उचित प्रबंधन और देखभाल
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