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  • 24-Jan-2024
  • By Tej Hospital Solution

लिवर इन्फेक्शन के कारण, लक्षण और बचाव के उपाय

लिवर शरीर को स्वस्थ रखने के साथ-साथ शरीर में मौजूद पोषक-तत्वों को पाचन के लिए जरूरी केमिकल में भी बदलता है। यह शरीर में मौजूद विषैले पदार्थों को शरीर से बाहर निकलने में भी मदद करता है। साथ ही हम जो भी खाते हैं उसे ऊर्जा में भी बदलता है। इसलिए लिवर का सही और बेहतर ढंग से कार्य करना आवश्यक है।

लिवर इन्फेक्शन क्या है ? (What Is Liver Infection?)

लिवर इंफेक्शन, शरीर में लिवर के किसी कारणों से ठीक काम न करने के कारण होता है। इसमें लिवर में सूजन की समस्या होने लगती है और लिवर के ऊतक (Tissue) अंदर से डैमेज होकर खराब होने लगते हैं। इससे लिवर फंक्शन प्रभावित होता है और समय के साथ इससे कई प्रकार की दिक्कतें हो सकती हैं।

लिवर इन्फेक्शन के कारण (Cause Of Liver Infection)

लिवर में इंफेक्शन होने की कई वजहें हो सकती हैं:
  • वायरस और पैरासाइट इंफेक्शन 
  • दूषित भोजन या पानी का सेवन
  • बिना जांचे हुए रक्त आधान (Blood Transfusion)
  • संक्रमित मेडिकल उपकरणों का इस्तेमाल
  • लाइफस्टाइल की समस्याएं

लिवर इन्फेक्शन के लक्षण (Symptoms Of Liver Infection)

लिवर में इन्फेक्शन होने पर शुरुआत में पेट में तेज दर्द और सूजन हो सकती है। लिवर से जुड़ी परेशानी होने पर पीलिया की समस्या हो सकती है। इस स्थिति में मरीज को तुरंत इलाज की जरूरत होती है। लिवर खराब होने के कुछ और लक्षण: 
  • त्वचा में खुजली या सूखापन
  • वजन कम होना
  • पीलिया 
  • कमजोरी महसूस होना 
  • पेट में जलन या एसिडिटी
  • पेट में गैस या पेट से आवाज आना
  • पीला या गहरा हरा रंग का मल या मल में बदलाव
  • पेट के ऊपरी हिस्से में छूने पर दर्द, असहजता या नाज़ुक महसूस होना
  • पेट में पानी भरना
  • भूख न लगना
  • निचले पैर, टखनों आदि में सूजन
  • पेशाब का रंग गहरा होना 

लिवर इन्फेक्शन का निदान: (Diagnosis of Liver Infection:)

लिवर इन्फेक्शन के निदान के लिए कुछ परीक्षण इस प्रकार हैं:
1. Liver Function Test (LFT): यह Test खून में प्रोटीन, लिवर एंजाइम और बिलीरुबिन के स्तर को मापने के लिए किया जाता है। यदि इनका स्तर इनके सामान्य स्तर से अलग हुआ तो यह लिवर के संक्रमण (Infection) का संकेत होता है।  
2. वायरल हेपेटाइटिस के लिए ब्लड टेस्ट: यह परीक्षण विशिष्ट वायरस हेपेटाइटिस(A, B, C, D, E ) या एंटीबॉडी की जाँच करने के लिए किया जाता है। 
कुछ मामलों में लिवर के Structure की जाँच करने के लिए, Liver Damage या ट्यूमर के संकेतों की जाँच करने के लिए अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, MRI स्कैन जैसे इमेजिंग परीक्षण किए जा सकते हैं। 

लिवर इन्फेक्शन से बचाव के उपाय: (Measures To Prevent Liver Infection:)

लिवर इन्फेक्शन का उचित इलाज होने पर यह कुछ हफ्तों या महीनों में ठीक हो जाता है। लिवर इन्फेक्शन से बचने के लिए, आपको अपने लाइफस्टाइल में बदलाव करने की जरूरत होती है:
  • शराब और धूम्रपान से दूरी बनाकर रखें। 
  • अत्यधिक तेल-मसालों से बने भोजन का कम से कम सेवन करें। 
  • पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। प्रतिदिन कम से कम 7 से 8 गिलास पानी पियें। 
  • चीनी का सेवन कम करें। 
  • वजन को संतुलित बनाए रखें। 
  • नियमित रूप से Exercise करें। प्रतिदिन कम से कम 15 से 20 मिनट Exercise करने का लक्ष्य रखें।  

लिवर के लिए, हरी सब्ज़ियां, फल, साबुत अनाज, दालें, मूली, गाजर, और लौकी खाएं।  रोजाना कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं। इससे लिवर का स्वास्थ्य ठीक रहता है और शरीर से टॉक्सिक तत्व भी आसानी से बाहर निकल जाते हैं।

लिवर इन्फेक्शन के मरीजों के लिए जीवनशैली में जरूरी बदलाव : (Important Changes In Lifestyle For Liver Infection Patients:)

जीवनशैली में कुछ बदलाव करके लिवर के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। 
  • शराब का सेवन न करें। 
  • तेल-मसालों का कम सेवन करें। 
  • ढेर सारा पानी पिएं। इससे लीवर का स्वास्थ्य ठीक रहता है और शरीर से टॉक्सिक तत्व भी आसानी से बाहर निकल जाते हैं। 
  • अपनी डाइट में अधिक से अधिक पौष्टिक चीजें शामिल करें। लीवर के लिए हरी सब्ज़ियां, फल, साबुत अनाज, दालें, मूली, गाजर और लौकी खाएं। 
  • पपीता का सेवन करें। पपीता विटामिन सी से भरपूर है जो कि एक ऐसा फल है जो लिवर सेल्स को डिटॉक्स करता और इनके काम काज को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।

लिवर इन्फेक्शन की रोकथाम: (Prevention of Liver Infection:)

टीकाकरण, अच्छी स्वस्छता, और कुछ सुरक्षित अभ्यास के माध्यम से, लिवर इन्फेक्शन की रोकथाम संभव है।  
1. Vaccination: लिवर इन्फेक्शन के उपाय के लिए, हेपेटाइटिस A, B के टीके लगवाना आवश्यक है, यह टीके बहुत ही प्रभावी होते हैं। वर्तमान में हेपेटाइटिस C, D और E के टीके उपलब्ध नहीं हैं। 
2. स्वच्छ पेयजल और भोजन: स्वच्छ पानी पीने से और स्वस्छ भोजन ग्रहण करने से, हेपेटाइटिस ए और ई का खतरा टल सकता है। 
3. सुरक्षित रहने के लिए प्रयास: रेजर, टूथब्रश शेयर नहीं करने से, सुरक्षित यौन संबंध बनाने से, टैटू, पियर्सिंग और मेडिकल प्रोसीजर्स के लिए स्टर्लाइज्ड नीडल्स के उपयोग से वायरल हेपेटाइटिस के विकास को रोकना संभव है। 
4. शराब का सीमित सेवन: शराब का सेवन सीमित करने से अल्कोहलिक हेपेटाइटिस और अन्य यकृत रोगों से बचा जा सकता है।  
5. Regular Health Check-Ups: नियमित जाँच से, लिवर इन्फेक्शन की प्रारंभिक पहचान और उपचार में मदद मिल सकती है।

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  • 23-Jan-2024
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लिवर को स्वस्थ और मजबूत रखने के घरेलू उपाय

लीवर हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है। यह शरीर के हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने का कार्य करता है। यदि हमारा लिवर स्वस्थ व ठीक तरिके से काम करता है, तो हमारा शरीर कई तरह की बीमारियों से बचा रहता है। अगर किसी का लिवर कमजोर है तो उसके शरीर में सुस्ती छाई रहती है और थकान समेत कई अन्य दिक्कतें भी देखी जा सकती हैं। समग्र और बेहतर स्वास्थ्य के लिए लीवर का स्वस्थ रहना महत्वपूर्ण है। हालाँकि व्यक्तिगत सलाह के लिए स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर से परामर्श करना आवश्यक है, यहाँ कुछ सामान्य घरेलू उपचार दिए गए हैं जो स्वस्थ और मजबूत लीवर बनाए रखने में योगदान कर सकते हैं।  

लिवर को स्वस्थ और मजबूत बनाए रखने के लिए घरेलू उपाय (Home Remedies To Keep The Liver Healthy And Strong)

1. संतुलित आहार बनाए रखें:
फलों, सब्जियों, साबुत अनाज और  प्रोटीन से भरपूर संतुलित आहार का सेवन करें। एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे कि जामुन, ब्लूबेरी,सेब, ब्रोकली, पत्ता गोभी, पालक, बैंगन, टमाटर, चुकंदर, लहसुन, आंवला आदि शामिल करें। अत्यधिक वसा और Refined Sugar का सेवन सीमित करें।

2. हाइड्रेटेड रहें:
अपने शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने और लीवर की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने के लिए दिन भर में खूब पानी पिएं। प्रतिदिन कम से कम 7 से 8  गिलास पानी जरूर पीना चाहिए। 

3. खट्टे फलों का अत्यधिक सेवन करें :
अपने लिवर को स्वस्थ रखने के लिए आपको ज्यादा से ज्यादा खट्टे फलों का सेवन करना चाहिए। इन फलों के सेवन से बॉडी डिटॉक्स होती है। अगर किसी का लिवर कमजोर है तो उसे संतरा, मौसंबी, नींबू, कीवी को डाइट में शामिल करना चाहिए।  इनमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं और उनसे इम्यूनिटी पावर मजबूत होती है। 

4. लहसुन का सेवन:
लिवर के कमजोर होने पर लहसुन का सेवन करना चाहिए। इसमें कई बीमारियों को दूर करने की क्षमता होती है। इसके साथ ही यह बीमार लिवर को स्वस्थ एवं दुरुस्त करने में भी सहायक है। लहसुन शरीर से जहरीले पदार्थ को बाहर निकलता है और लिवर को मजबूती प्रदान करता है। आप खली पेट भी लहसुन का सेवन कर सकते हैं।

5. नींबू पानी:
नींबू  लिवर के लिए काफी फायदेमंद है। नींबू में डी-लिमोनेने नामक तत्व पाया जाता है जो लिवर की कोशिकाओं को सक्रिय (Active) करता है। इससे लिवर साफ होता है। रोजाना नींबू पानी पीने से लिवर को फायदा मिलता है। रोज सुबह खाली पेट एक गिलास नींबू पानी पियें। 

6. हल्दी:
कमजोर लिवर को मजबूती प्रदान करने में हल्दी भी काफी लाभदायक मानी जाती है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटीबैक्टीरियल अच्छा पाए जाते हैं। यह बढ़ते वजन को भी नियंत्रित करती है। इसे खाना बनाते वक्त मसालों के साथ मिलाकर खाएं या दूध में चुटकीभर हल्दी मिलाकर रोज पिएं। इससे आप लिवर संबंधी रोगों से बचे रहेंगे।

7. ग्रीन टी: 
ग्रीन टी में मौजूद कैटेचिन सेहत के लिए फायदेमंद होता है। ग्रीन टी पीने से लिवर सम्बन्धी बीमारियां होने का खतरा कम होता है। ग्रीन टी में एंटी-ऑक्सीडेंट होते हैं, जो शरीर के लिए बहुत जरूरी होते हैं। अगर आप अपने कमजोर लिवर को मजबूत बनाना चाहते हैं तो दिन में कम से कम एक बार ग्रीन टी का सेवन जरूर करें।  इसके सेवन से बॉडी डिटॉक्सिफाई होती है। 

8.  शराब का सेवन न करें:
 शराब का सेवन लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए शराब का सेवन न करें।

9. नियमित व्यायाम करें:
लीवर के कार्यों के साथ समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि में संलग्न रहें। प्रतिदिन कम से कम 15 से 20 मिनट व्यायाम करने का लक्ष्य रखें। 

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थितियाँ भिन्न हो सकती हैं। अपनी विशिष्ट स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर व्यक्तिगत सलाह के लिए किसी स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर से परामर्श लें। यदि आप लगातार लक्षणों का अनुभव करते हैं या अपने लीवर के स्वास्थ्य के बारे में चिंतित हैं, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

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पेट दर्द के कारण और घरेलू उपाय

आजकल पेट में दर्द होना आम समस्या बन गई है क्योंकि लोगों की जीवन शैली इतनी अनियमित हो गई है कि इसका सीधा असर उनके पाचन तंत्र पर पड़ता है। पेट शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है जो शरीर की कार्यप्रणाली में एक अहम भूमिका निभाता है। शरीर में होने वाली अत्यधिक आंतरिक समस्याएं पेट से जुड़ी होती है। देर तक बैठ कर काम करना, समय के अभाव के कारण जंक फूड ज्यादा खाना, पर्याप्त मात्रा में नींद न होना जैसे समस्याओं के कारण सामान्य तौर पर बदहजमी या पेट संबंधी समस्याएं होती है जिसके कारण पेट में दर्द होने लगता है।

पेट दर्द होने के कारण (Cause Of Stomach Ache)

पेट दर्द कई कारणों से हो सकता है। इसके कुछ कारण ये हैं:
सामान्य कारण:
  • अत्यधिक भोजन करने से
  • अत्यधिक पानी पीने से
  • तेल, मिर्च मसाला वाला खाना अधिक समय तक खाने से
  • गंदा (Impure) पानी पीने से
  • बाहर का खाना जैसे पिज्जा, बर्गर, आइसक्रीम, समौसा आदि ज्यादा खाने से
  • खाली पेट अधिक समय तक काम करने से
  • रात का बचा बासी खाना खाने से
  • महिलाओं में मासिक स्राव के समय
  • संक्रमित (Infected) भोजन खाने से
  • खाना हजम न  होने से
  • सूखा माँस (Dry meat) खाने से
  • खाना खाने के बाद ज्यादा तेज दौड़ने से

अन्य कारण:

  • गैस समस्या (गैस्ट्रिक प्रॉबल्म)
  • किडनी स्टोन
  • कब्ज की शिकयत
  • अपेंडिसाइटिस
  • फूड पॉइजनिंग
  • अल्सर या फोड़ा
  • हर्निया
  • इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम
  • पित्त की पथरी
  • यूरीनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन Urinary tract Infection (UTI))
  • एसीडिटी (Acidity)

पेट दर्द से राहत पाने के घरेलू उपाय

Home Remedies To Get Relief From Stomach Ache

1. मेथी दाना:
मेथी के दाने पेट दर्द में काफी फायदेमंद होते हैं। मेथी के दाने खाने से शरीर में मौजूद गंदगी बाहर निकल जाती है, जिससे पेट से जुड़ी समस्याएं नहीं होतीं हैं। इसके लिए मेथी के दाने को थोड़ा सा भून लें और फिर उसे पीसकर पाउडर बना लें। इसे गर्म पानी के साथ लें। ध्यान रहे कि मेथी के दाने को ज्यादा न भूनें व पानी भी ज्यादा गर्म न हो।

2. अनार का सेवन:
पेट दर्द में अनार का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है। अनार का जूस पीने से पाचनतंत्र मजबूत होता है और कब्ज, गैस, ब्लोटिंग जैसी समस्याएं दूर होती हैं। अनार के जूस के नियमित सेवन से पेट अच्छे तरह से साफ होता है। पेट दर्द में अनार का सेवन काले नमक के साथ करना चाहिए। 

3. हींग का सेवन:
हींग का इस्तेमाल कई सालों से पेट दर्द, उल्टी, मरोड़, और कब्ज की समस्या में आराम देने के लिए किया जा रहा है। हींग एक मात्र ऐसी औषधि है जो अस्थमा में भी काम आती है। हींग की तासीर गर्म होती है। हींग के पानी का स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें नमक या जीरा भी मिला सकते हैं। हींग के पानी को रोजाना खाना खाने से पहले पीने से डाइजेशन ठीक रहता है। आधा छोटा चम्मच हींग को पानी के साथ मिलाकर इसका सेवन करें।  

4. जायफल और नींबू का सेवन:
पेट दर्द से राहत पाने के लिए, जायफल और नींबू का इस्तेमाल किया जाता है। जायफल को नींबू के रस में मिलाकर शिशु को चटाने से पेट दर्द और गैस की समस्या ठीक हो जाती है। पेट दर्द से छुटकारा पाने के लिए, जायफल पाउडर में एक चम्मच नींबू का रस मिलाएं। इस मिश्रण को गुनगुने पानी में मिलाकर पीने से पेट दर्द से राहत मिलती है। 

5. अदरक:
पेट दर्द की समस्या में अदरक काफी फायदेमंद माना जाता है। अदरक में एंटी-इन्फ्लेमेटरी, एंटी-बैक्टीरियल, और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। अदरक का सेवन करने से पाचन तंत्र मजबूत होता है। अदरक का पानी बनाने के लिए, एक टुकड़ा अदरक को कद्दूकश कर गर्म पानी में उबाल लें। स्वाद के लिए इसमें शहद मिला सकते हैं। 

6. पुदीना:
गर्मियों में पुदीना खाने से पेट की गर्मी कम होती है। इससे गैस, पेट दर्द, सीने में जलन जैसी समस्याओं से राहत मिलती है। इसके अलावा, हीट स्ट्रोक का खतरा भी कम होता है। पुदीने का सेवन करने से सीने में जकड़न या अस्थमा जैसी बीमारी में राहत मिलती है। पुदीना और निम्बू का रस बनाकर पीने से पेट दर्द में जल्द आराम मिलता है। 


7. एलोवेरा जूस:
एलोवेरा जूस पीने से पाचन तंत्र अच्छा रहता है और खाने को पचाने में मदद मिलती है। एलोवेरा के पौधे में मौजूद एंजाइम, ब्लड शुगर और फैट को कंट्रोल करते हैं।  एलोवेरा जूस में विटामिन सी, विटामिन ए, विटामिन ई, कैल्शियम, मैग्नीशियम, और फाइबर होता है।ये सभी विटामिन और मिनरल पाचन को दुरुस्त करते हैं और कब्ज दूर करते हैं। 

8. अजवाइन का पानी:
अजवायन चूर्ण का प्रयोग अजवायन 1 या 2 ग्राम और सोठ 1 ग्राम दोनों को साथ में अच्छी तरह से पीसकर गुनगुने पानी के साथ खाली पेट या नाश्ते के बाद लेना चाहिए। यह पाउडर पेट दर्द को कम करता है तथा भूख को बढ़ाता है। यह पाउडर दिन में दो बार सुबह और शाम लेना चाहिए।

9. जीरा का पानी:
जीरा का पानी पेट दर्द और पाचन से जुड़ी समस्याओं में राहत दिलाता है। जीरा का पानी एसिडिटी और इसके लक्षणों जैसे सीने में जलन, दर्द, मतली, सूजन, कब्ज आदि को कम करने और रोकने में असरदार है। इसके लिए, एक गिलास पानी में एक छोटा चम्मच भुने जीरे का पाउडर मिलाकर पिएं। छाछ में भुना जीरा और काली मिर्च डालकर पीने से पेट संबंधी कई समस्याएं नहीं होतीं। 

यदि पेट दर्द बना रहता है या आपके लक्षण बिगड़ जाते हैं, तो चिकित्सकीय सलाह लें। इसके अतिरिक्त, यदि आपको कोई एलर्जी या विशिष्ट स्वास्थ्य स्थितियाँ हैं, तो नए उपचार आजमाने से पहले किसी स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर से जाँच करना महत्वपूर्ण है।

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सर्दियों में चुकंदर खाने के फायदे

सर्दियों का मौसम आते ही लोग अपनी डाइट में कई तरह के बदलाव करने लगते हैं।  सर्दियों के मौसम में डाइजेस्टिव सिस्‍टम बेहतर ढंग से काम करता है इसलिए इस मौसम में लोग हैवी डाइट लेना पसंद करते हैं। अधिक ठंड की वजह से कई लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है, इसलिए ठंड शुरू होने से पहले डाइट में ऐसी चीजों को शामिल करें जिससे शरीर को गर्मी मिल सके। 

सर्दियां में चुकंदर खाना काफी फायदेमंद माना जाता है। चुकंदर में कई प्रकार के पोषक तत्व पाए जाते हैं। यह एंटीऑक्सीडेंट का अच्छा स्रोत है। इसमें फाइटोन्यूट्रिएंट्स नाम का एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और शरीर को डिटॉक्स करने के तत्व भी पाए जाते हैं। सर्दियों में चुकंदर खाने से बॉडी गर्म रहती है और शरीर को ऊर्जा भी मिलती है। सर्दियों में चुकंदर खाने से कई स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं। चुकंदर के जूस को भी आप अपनी डाइट का हिस्सा बना सकते हैं।

सर्दियों में चुकंदर खाने के फायदे : (Benefits Of Eating Beetroot In Winter)

1. पोषक तत्वों से भरपूर: 

चुकंदर विटामिन (जैसे विटामिन C), खनिज (पोटेशियम और मैंगनीज सहित), और फाइबर जैसे आवश्यक पोषक तत्वों का एक अच्छा स्रोत है। ये पोषक तत्व समग्र स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं और प्रतिरक्षा प्रणाली का मजबूत करने में मदद करता है, साथ ही सर्दियों के महीनों के दौराब सर्दी और फ्लू से भी बचता है।

2.प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देता है:

सर्दियों में जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर होती है, वे सबसे अधिक बीमार पड़ते हैं।चुकंदर में विटामिन C की मात्रा प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने में मदद करती है। सर्दियों में शरीर को विभिन्न संक्रमणों और बीमारियों से बचाने में मदद करने के लिए एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) का होना आवश्यक है।

3. Blood Circulation बढ़ाता है:

चुकंदर में नाइट्रेट होता है, जिसे शरीर नाइट्रिक ऑक्साइड में परिवर्तित करता है। नाइट्रिक ऑक्साइड रक्त वाहिकाओं को चौड़ा करने, रक्त प्रवाह और परिसंचरण में सुधार करने में मदद करता है। यह हृदय के स्वास्थ्य को बनाए रखने में भी फायदेमंद होता है, जो सर्दियों के महीनों के दौरान विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

4. हाइड्रेटेड रखता है: 

चुकंदर में पानी की मात्रा अधिक होती है, जो शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करती है। सर्दियों में हाइड्रेटेड रहना महत्वपूर्ण है, क्योंकि सर्दियों के दौरान हवा शुष्क हो जाती है, और लोगों को उतनी प्यास नहीं लगती जितनी गर्म महीनों में लगती है।

5. बॉडी डिटॉक्स करने में सहायक:

चुकंदर में एंटीऑक्सिडेंट और यौगिक होते हैं। चुकंदर के जूस को डिटॉक्स ड्रिंक (Beetroot Detox Drink) के नाम से भी जाना जाता है। यह लिवर सेल्स को उत्तेजित करता है और शरीर के टॉक्सिंस को बाहर निकालने में मदद करता है। साथ ही इसमें मौजूद कई तत्व शरीर में फैटी एसिड को इकट्ठा नहीं होने देते हैं।

6. त्वचा के लिए फायदेमंद:

चुकंदर में मौजूद नाइट्रेट, शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड में बदल जाते हैं। इससे त्वचा में रक्त प्रवाह और ऑक्सीजन की आपूर्ति में सुधार होता है। इससे Face पर निखार आता है और त्वचा को पोषक तत्व मिलते हैं। साथ ही चुकंदर में मौजूद विटामिन-सी मेलेनिन के गठन को कम करता है और हाइपरपिग्मेंटेशन को रोकता है। यह कोलेजन उत्पादन और त्वचा की मरम्मत में भी मदद करता है।

7. पाचन में सहायक: 

चुकंदर, फाइबर का एक अच्छा स्रोत है, जो स्वस्थ पाचन तंत्र को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। फाइबर कब्ज को रोकने और नियमित मल त्याग को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है।

सर्दियों में रोजाना एक चुकंदर का सेवन दोपहर के भोजन के साथ करना चाहिए। चुकंदर को सलाद के रूप में खाया जा सकता है। इसे कद्दूकस करके आटे में गूंथकर रोटी भी बनाई जा सकती है। इसके अलावा, चुकंदर का जूस, हलवा, और रायता भी बनाया जा सकता है। 

इसके अतिरिक्त, यह ध्यान रखना आवश्यक है कि व्यक्तिगत आहार संबंधी जरूरतें अलग-अलग हो सकती हैं, इसलिए व्यक्तिगत सलाह के लिए किसी स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर या पोषण विशेषज्ञ से परामर्श करना उचित है।

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सर्दियों में पपीता खाने के फायदे

कई पोषक तत्वों से भरपूर पपीता हमारे स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होता है। सर्दियों के मौसम में इसके सेवन से कई तरह की समस्याओं से राहत मिलती है। पेट के लिए सबसे अच्छे और फायदेमंद फलों की गिनती में पपीता आता है। इसमें पाचक एंजाइम (Digestive Enzymes) होते हैं और साथ ही यह विटामिन C, विटामिन E, फोलेट, मैग्नीशियम और पौटेशियम के साथ-साथ फाइबर का भी अच्छा स्त्रोत होता है। गर्मियों में तो पपीता खाया ही जाता है लेकिन सर्दियों में भी इसे खाने से शरीर को कई फायदे मिलते हैं। कब्ज से लेकर सर्दियों में खांसी-जुकाम तक की दिक्कत दूर करने में भी पपीता असरदार होता है। आइए सर्दियों में पपीता खाने से सेहत को होने वाले फायदों के बारे में जानते हैं। 

सर्दियों में पपीता खाने के फायदे (Benefits Of Eating Papaya In Winter)

सर्दियों में पपीता खाने के कुछ फायदे इस प्रकार हैं:

1. इम्युनिटी मजबूत करें:

सर्दियों के आते ही हमारी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। ऐसे में यह बेहद जरूरी है कि हम अपने खानपान में कुछ ऐसे फूड शामिल करें, जो हमारी इम्युनिटी को बूस्ट करें। ऐसे में पपीते का सेवन आपके लिए फायदेमंद होता है। विटामिन सी और कई तरह के एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर पपीते का सेवन करने से हमारी इम्युनिटी मजबूत होती है, जिससे हम कई वायरल संक्रमणों से खुद को बचा सकते हैं।

2. पाचन में सहायक: 

पपीते में पपेन और काइमोपैपेन जैसे एंजाइम मौजूद होते हैं। पपेन नाम का एंजाइम भोजन को तेजी से तोड़ने में मदद करता है। और काइमोपैन एंजाइम सूजन को कम करता है और मेटाबोलिज्म में सुधार करता है। पपीते में फाइबर और पानी की मात्रा भी ज्यादा होती है। ये कब्ज को रोकने और पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में भी मदद करता हैं। 

3. त्वचा के लिए फायदेमंद: 

सर्दियों का मौसम त्वचा के लिए कठोर हो सकता है, जिससे सूखापन और जलन हो सकती है। पपीते में मौजूद विटामिन सी और अन्य एंटीऑक्सीडेंट कोलेजन निर्माण को बढ़ावा देकर स्किन को नुकसान पहुंचाने वाले फ्री रेडिकल्स को भी दूर करते हैं।  इससे स्किन को एंटी-एजिंग गुण भी मिलते हैं। 

4. शरीर को हाइड्रेट रखने में सहायक:

सर्दियों के दौरान कई लोग पानी पीना कम कर देते हैं सर्दियों में हाइड्रेटेड रहना महत्वपूर्ण है। पपीते में पानी की मात्रा अधिक होती है, जो शरीर को हाइड्रेट रखने में सहायक है और शारीरिक गतिविधियों को बनाए रखने में मदद करता है।

5. वजन कम करने में सहायक:

पपीता कम कैलोरी वाला फल है, जो Weight Manage करने में मदद कर सकता है। विटामिन C, फोलेट और पोटैशियम से भरपूर पपीते में बहुत कम कैलोरी पाई जाती है, जो Healthy तरीके से वजन कम करने में मददगार होता है। पपीता खाने पर पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है। और बार-बार भूख नहीं लगती है। 

6. हड्डियों के लिए फायदेमंद: 

पपीते में विटामिन K पाया जाता है, जो हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। विटामिन K का पर्याप्त सेवन हड्डियों को मजबूत और स्वस्थ बनाए रखने में सहायता प्रदान करता है।

7. हृदय के लिए फायदेमंद: 

सर्दियों में पपीता खाने से ह्रदय स्वस्थ रहता है। पपीता कॉलेस्ट्रोल को कम करने के साथ ही डायबिटीज, मोटापा और ह्रदय सम्बन्धी परेशानियों को दूर रखने में भी असरदार है। इसमें पौटेशियम की अच्छी मात्रा होती है जिससे ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है।  ऐसे में खानपान में पपीता शामिल करने पर ह्रदय संबंधी परेशानियां दूर रहती है। पपीते में कैल्शियम भी पाया जाता है, जो शरीर में खून बनाने, हार्ट और मांसपेशियों के लिए सहायक है। 

8. आंखों के लिए फायदेमंद:

पपीते में विटामिन ए और सी होता है। ये आंखों के लिए फायदेमंद है। पपीते में एंटीऑक्सीडेंट ल्यूटिन और जेक्सैन्थिन होते हैं। ये प्राकृतिक सनब्लॉक का काम करते हैं। ये आंखों को हानिकारक नीली रोशनी से बचाता है। साथ ही कच्चा पपीता खाने से आंखों की रोशनी तेज होती है। 

याद रखें कि विभिन्न प्रकार के फलों और सब्जियों सहित संतुलित और विविध आहार, समग्र स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। सर्वोत्तम स्वास्थ्य के लिए विभिन्न प्रकार के पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करना महत्वपूर्ण है।

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  • 09-Jan-2024
  • By Tej Hospital Solution

बवासीर के लिए बेहतरीन घरेलू उपचार

बवासीर (Hemorrhoids), जिसे पाइल्स और हेमरॉइड्स भी कहा जाता है, गुदा और निचले मलाशय में सूजी हुई नसें हैं। बवासीर वैरिकाज नसों (जब आपकी नसें उभरी हुई होती हैं , तो आपकी नसों के भीतर रक्तचाप बढ़ जाता है। नसें चौड़ी और खिंची हुई हो जाती हैं, जिससे वे नंगी आंखों से अधिक स्पष्ट दिखाई देने लगती हैं।) के समान है। बवासीर मलाशय के अंदर विकसित होता है, जिसे आंतरिक बवासीर कहा जाता है। वे गुदा के आसपास की त्वचा के नीचे भी विकसित हो सकते हैं, जिन्हें बाहरी बवासीर कहा जाता है।

बवासीर के लक्षण (Symptoms Of Piles)

  • गुदा के आस-पास कठोर गांठ जैसी महसूस होना
  • शौच के बाद भी पेट साफ न लगना
  • शौच के दौरान जलन के साथ खून आना
  • मल त्याग के दौरान बहुत पीड़ा होना
  • गुदा के आस-पास खुजली, लालीपन, और सूजन रहना
  • गुदा वाले हिस्से में दर्द, खासकर लंबे समय तक बैठे रहने पर

बवासीर के कारण (Causes Of Piles)

  • मल त्याग करते समय जोर लगाना
  • लंबे समय तक पालथी मोड़ के बैठना
  • कब्ज या दस्त का लंबे समय तक रहना
  • मोटापा
  • गर्भावस्था
  • लंबे समय तक खड़े होकर काम करना
  • हेमरॉइडल वेन्स में खराब वाल्व होना

बवासीर के लिए घरेलू इलाज (Home Remedies For Piles)

बवासीर के इलाज के लिए कई विकल्प उपलब्ध हैं। कई लोगों को घरेलू उपचार और जीवनशैली में बदलाव से भी  राहत मिलता हैं।  हालाँकि, व्यक्तिगत सलाह और उपचार के लिए किसी स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर से परामर्श करना महत्वपूर्ण है। यहां कुछ घरेलू उपचार दिए गए हैं जिनसे राहत मिल सकती है:

1. आहार परिवर्तन:

फाइबर का सेवन बढ़ाएं। अधिक फल, सब्जियां, साबुत अनाज और फलियां खाने से मल को नरम करने और मल त्याग के दौरान तनाव को कम करने में मदद मिलती है।

 हाइड्रेटेड रहें। भरपूर पानी पीने से कब्ज को रोकने में मदद मिलती है, जिससे बवासीर के लक्षण कम हो सकते हैं।

2. गर्म स्नान:

15-20 मिनट तक गर्म पानी से नहाने से जलन और परेशानी से राहत मिलती है। नहाने के पानी में थोड़ी मात्रा में एप्सम (Epsom) नमक मिलाने से भी आराम मिल सकता है।

3. एलोवेरा:  

एलोवेरा के सूजनरोधक और चिकित्सकीय गुणों से बवासीर की जलन कम हो जाती है।  यह आंतरिक और बाह्य दोनों तरह के पाइल्स के इलाज में फायदेमंद है। एलोवेरा जेल लगाने से बवासीर की समस्या से राहत मिलती है। इससे दर्द और सूजन कम होती है। एक चम्मच एलोवेरा जेल लेकर उसमें एक चुटकी हल्दी पाउडर मिलाएं। रात में सोने से पहले गुदा द्वार पर थोड़ा सा पेस्ट लगाकर सोएं। दो हफ़्तों तक लगातार इसका इस्तेमाल करें। 

4. Witch Haze Compress:

एक कॉटन बॉल या पैड को विच हेजल (Witch Hazel) में भिगोएँ और इसे प्रभावित जगह पर कुछ मिनटों के लिए लगाएं। विच हेजल में कसैले गुण होते हैं जो सूजन को कम करने में मदद करते हैं।

5. कोल्ड कंप्रेस:

प्रभावित क्षेत्र में कोल्ड कंप्रेस या आइस पैक लगाने से सूजन को कम करने और जलन को कम करने में मदद मिल सकती है। त्वचा के सीधे संपर्क से बचने के लिए आइस पैक को कपड़ों में लपेटकर लगाना सुनिश्चित करें।

6. सिट्ज बाथ: 

गर्म पानी से नहाना, बवासीर के कारण होने वाली जलन को शांत करने में मदद कर सकता है। सिटज बाथ इस्तेमाल करने का प्रयास करें। सिट्ज बाथ एक ऐसी विधि है जिसमें एक छोटे प्लास्टिक के टब का उपयोग किया जाता है जो टॉयलेट सीट पर फिट हो जाता है ताकि आप प्रभावित हिस्से को बस उसमें डुबो सकें। इस पानी में बीटाडीन का घोल या डॉक्टर द्वारा सुझाए गए अन्य एंटीसेप्टिक घोल का उपयोग किया जा सकता है। 

7. शारीरिक गतिविधि:

बवासीर के लक्षणों को असरदार तरीके से प्रबंधित करने के लिए घर पर व्यायाम करना एक शानदार उपाय हो सकता है। नियमित पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज करना बवासीर के लिए असरदार साबित हो सकता है। अपनी पेल्विक फ्लोर की माँसपेशियों को मजबूत करने से, बिना ज्यादा दबाव डाले अपनी आंत को खाली करने में मदद मिल सकती है।चलना, तैरना और अन्य कम प्रभाव वाले व्यायाम न करने की सलाह दी जाती है।

8. नारियल का तेल:

नारियल का तेल बवासीर के लक्षणों को कम करने में मदद करता है। यह एक प्राकृतिक मॉइस्चराइजर है। नारियल के तेल में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाइल्स का इलाज कर सकते हैं। इसे मरहम के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। 

याद रखें, घरेलू उपचारों के प्रति व्यक्तिगत प्रतिक्रियाएं अलग-अलग हो सकती हैं, और यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि आपके लक्षण स्थिर हैं या गंभीर हैं। इसके अतिरिक्त, यदि आपको पेट दर्द, अत्यधिक दर्द या अन्य संबंधित लक्षणों का अनुभव होता है, तो तुरंत स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर से परामर्श लें।

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